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Section 7 of the POCSO Act 2012: लैंगिक हमला (Sexual Assault)

 धारा 7: लैंगिक हमला (Sexual Assault)

लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (POCSO Act) के अध्याय 2 की धारा 7 "लैंगिक हमले" (Sexual Assault) को विस्तार से परिभाषित करती है।

इस धारा के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति निम्नलिखित कृत्य करता है, तो यह कहा जाता है कि उसने "लैंगिक हमला" किया है:

  1. सीधा स्पर्श (Direct Touch): जो कोई व्यक्ति, "लैंगिक आशय" (Sexual intent) से किसी बालक की योनि (vagina), लिंग (penis), गुदा (anus) या स्तनों (breasts) को स्पर्श करता है।
  2. बालक से स्पर्श कराना (Making the child touch): यदि कोई व्यक्ति, लैंगिक आशय से बालक से अपने (स्वयं के) या किसी भी अन्य व्यक्ति की योनि, लिंग, गुदा या स्तन का स्पर्श कराता है।
  3. प्रवेशन के बिना शारीरिक संपर्क (Physical contact without penetration): यदि कोई व्यक्ति, लैंगिक आशय से कोई भी ऐसा अन्य कार्य करता है जिसमें शारीरिक संपर्क (Physical contact) तो होता है, लेकिन उसमें "प्रवेशन" (Penetration) नहीं किया गया हो। (प्रवेशन वाले कृत्य धारा 3 के तहत 'प्रवेशी लैंगिक हमले' में आते हैं)।

इस धारा के तहत अपराध के गठन के लिए सबसे महत्वपूर्ण तत्व "लैंगिक आशय" (Sexual Intent) का होना है। यह धारा मुख्य रूप से यौन दुर्व्यवहार के उन मामलों को दंडित करने के लिए है जहाँ सीधा शारीरिक संपर्क हुआ है, लेकिन वह बलात्कार या प्रवेशन की श्रेणी में नहीं आता।



धारा 7 (लैंगिक हमला) के संदर्भ में भारत के सर्वोच्च न्यायालय का प्रमुख निर्णय (Leading Supreme Court Judgment):

1. Attorney General for India Vs. Satish & Anr. (2021) - "Skin-to-Skin Contact" Case: यह पोक्सो अधिनियम की धारा 7 की व्याख्या के संबंध में अब तक का सबसे ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण (Leading) फैसला है।

  • पृष्ठभूमि: बॉम्बे उच्च न्यायालय (नागपुर पीठ) ने एक मामले में यह विवादास्पद निर्णय दिया था कि यदि कपड़ों के ऊपर से बच्चे के अंगों को दबाया जाता है और सीधा "स्किन-टू-स्किन" (त्वचा से त्वचा का) संपर्क नहीं होता है, तो यह पोक्सो की धारा 7 के तहत 'लैंगिक हमला' (Sexual Assault) नहीं माना जाएगा।
  • सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय: भारत के तत्कालीन अटॉर्नी जनरल और राष्ट्रीय महिला आयोग की अपीलों पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालय के इस फैसले को सिरे से खारिज कर दिया। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि धारा 7 के तहत "स्पर्श" (Touch) का अर्थ केवल प्रत्यक्ष 'स्किन-टू-स्किन' संपर्क तक सीमित नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने स्थापित किया कि धारा 7 का मुख्य तत्व अपराधी का "लैंगिक आशय" (Sexual Intent) है। यदि बुरे आशय से बच्चे को कपड़ों के ऊपर से भी छुआ जाता है, तो वह पूर्ण रूप से धारा 7 के तहत "लैंगिक हमला" माना जाएगा। न्यायालय ने कहा कि कानून की ऐसी संकीर्ण व्याख्या (skin-to-skin) करने से इस अधिनियम का मूल उद्देश्य ही नष्ट हो जाएगा।

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