भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 106 मुख्य रूप से 'लापरवाही से मृत्यु कारित करने' (Causing death by negligence) के अपराध और उससे जुड़े दंड के प्रावधानों को निर्धारित करती है।
दिए गए स्रोतों के अनुसार, धारा 106 की उपधारा (2) (Section 106(2)) विशेष रूप से वाहन दुर्घटनाओं और 'हिट-एंड-रन' (hit-and-run) जैसे गंभीर मामलों से संबंधित है। इसके पूर्ण कानूनी प्रावधान निम्नलिखित हैं:
- अपराध की शर्तें: यदि कोई व्यक्ति उतावलेपन या लापरवाही से वाहन चलाकर (rash and negligent driving) किसी अन्य व्यक्ति की मृत्यु का कारण बनता है।
- आपराधिक मानव वध न होना: यह कृत्य कानूनी तौर पर 'आपराधिक मानव वध' (culpable homicide) की श्रेणी में नहीं आना चाहिए।
- प्रशासन को सूचना दिए बिना भागना: यह उपधारा तब लागू होती है जब मृत्यु कारित करने वाला व्यक्ति घटना के तुरंत बाद किसी पुलिस अधिकारी या मजिस्ट्रेट को दुर्घटना की सूचना दिए बिना मौके से भाग जाता है (escapes without reporting it)।
सजा (Punishment): इस प्रावधान (धारा 106(2)) के तहत दोषी पाए जाने पर अपराधी को दोनों में से किसी भी भांति (कठोर या साधारण) के कारावास की सजा दी जाएगी, जिसकी अवधि को 10 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, और उसे आर्थिक जुर्माना भी देना होगा। (विस्तृत संदर्भ के लिए कृपया ध्यान दें कि दिए गए स्रोत दस्तावेज़ में केवल धारा 106(2) का ही पाठ उपलब्ध है)।
भारत के सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णय (Leading Supreme Court Judgments): (महत्वपूर्ण सूचना: कृपया ध्यान दें कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों की यह जानकारी मेरे द्वारा दिए गए स्रोतों (दस्तावेज़) का हिस्सा नहीं है। चूँकि BNS, 2023 एक नया कानून है, इसलिए नीचे दिए गए ऐतिहासिक निर्णय मुख्य रूप से पुरानी भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 304A पर आधारित हैं, जो अब वर्तमान BNS की धारा 106 के समतुल्य है। आप इस जानकारी को स्वतंत्र रूप से सत्यापित कर सकते हैं।)
इस विषय (लापरवाही से मृत्यु) पर सर्वोच्च न्यायालय के कुछ सबसे प्रमुख (Leading) मामले निम्नलिखित हैं:
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Jacob Mathew v. State of Punjab (2005): यह आपराधिक लापरवाही (विशेषकर पेशेवर या मेडिकल लापरवाही) के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय का सबसे महत्वपूर्ण मामला है। इस मामले में न्यायालय ने स्पष्ट किया कि किसी कृत्य को आपराधिक लापरवाही मानने के लिए, लापरवाही का स्तर बहुत उच्च यानी "घोर लापरवाही" (Gross Negligence) होना चाहिए। केवल निर्णय लेने में साधारण चूक या दुर्घटना को आपराधिक लापरवाही नहीं माना जा सकता।
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Alister Anthony Pareira v. State of Maharashtra (2012): यह हिट-एंड-रन (Hit-and-run) और अत्यधिक लापरवाही से वाहन चलाने का एक प्रमुख निर्णय है। इस मामले में एक व्यक्ति ने नशे में फुटपाथ पर सो रहे लोगों पर कार चढ़ा दी थी। सर्वोच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि ऐसे अपराधों से समाज पर गहरा प्रभाव पड़ता है, इसलिए ऐसे अपराधियों के प्रति कोई नरमी नहीं बरती जानी चाहिए और उन्हें कठोर सजा मिलनी चाहिए ताकि समाज में एक निवारक (deterrent) संदेश जाए।
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Sushil Ansal v. State Through CBI (2014) - उपहार सिनेमा त्रासदी मामला: यह मामला इस बात का ऐतिहासिक उदाहरण है कि व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में प्रबंधन की लापरवाही के कारण यदि लोगों की मृत्यु होती है, तो वे उत्तरदायी हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा मानकों (safety standards) की अनदेखी करना घोर लापरवाही है और यदि इसके परिणामस्वरूप लोगों की मृत्यु होती है, तो यह लापरवाही से मृत्यु कारित करने का स्पष्ट अपराध है।
