BNS Section 218: सरकारी अधिकारी द्वारा संपत्ति जब्त करने से रोकना अपराध! जानिए सजा और कानूनी प्रावधान
Introduction
Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 (BNS) का Section 218 उस व्यक्ति के विरुद्ध दंड का प्रावधान करता है, जो किसी लोक सेवक द्वारा कानून के अधिकार के अंतर्गत संपत्ति लिए जाने का विरोध करता है।
इस अपराध के लिए यह भी आवश्यक है कि विरोध करने वाले व्यक्ति को यह जानकारी हो या उसके पास यह विश्वास करने का कारण हो कि संपत्ति लेने वाला व्यक्ति लोक सेवक है।
Section 218 BNS का मूल वैधानिक पाठ
Section 218. Resistance to the taking of property by the lawful authority of a public servant.
“Whoever offers any resistance to the taking of any property by the lawful authority of any public servant, knowing or having reason to believe that he is such public servant, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to six months, or with fine which may extend to ten thousand rupees, or with both.”
Section 218 BNS का हिंदी अर्थ
यदि कोई व्यक्ति किसी लोक सेवक द्वारा उसके कानूनी अधिकार के अंतर्गत किसी संपत्ति को लिए जाने का विरोध करता है और उसे यह जानकारी है या विश्वास करने का कारण है कि वह व्यक्ति लोक सेवक है, तो उसे छह महीने तक के साधारण या कठोर कारावास, दस हजार रुपये तक के जुर्माने या दोनों से दंडित किया जा सकता है।
Section 218, Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023.
Section 218 BNS के आवश्यक तत्व (Essential Ingredients)
संपत्ति का लिया जाना (Taking of Property)
इस अपराध का पहला आवश्यक तत्व यह है कि किसी संपत्ति को लोक सेवक द्वारा लिया जा रहा हो। संपत्ति चल या अचल हो सकती है। यह कार्य किसी कानूनी प्रक्रिया के अंतर्गत जब्ती, कुर्की या अन्य वैध कार्रवाई के रूप में हो सकता है।
लोक सेवक की वैध शक्ति (Lawful Authority)
संपत्ति लेने वाला व्यक्ति लोक सेवक होना चाहिए और वह संपत्ति लेने की कार्रवाई अपने कानूनी अधिकार के अंतर्गत कर रहा हो। केवल सरकारी पद पर होना पर्याप्त नहीं है; संबंधित संपत्ति लेने की कार्रवाई भी कानून द्वारा अधिकृत होनी चाहिए।
यदि लोक सेवक के पास संपत्ति लेने का वैधानिक अधिकार ही नहीं है, तो Section 218 के इस आवश्यक तत्व पर प्रश्न उठ सकता है।
संपत्ति लेने का विरोध (Resistance)
व्यक्ति द्वारा लोक सेवक की संपत्ति लेने की वैध कार्रवाई का विरोध किया जाना चाहिए। विरोध का स्वरूप मामले के तथ्यों के अनुसार निर्धारित होगा। केवल असहमति व्यक्त करना और संपत्ति लेने की कार्रवाई में वास्तविक विरोध करना अलग-अलग परिस्थितियाँ हैं।
लोक सेवक की पहचान का ज्ञान
आरोपी को यह जानकारी होनी चाहिए या उसके पास यह विश्वास करने का कारण होना चाहिए कि संपत्ति लेने वाला व्यक्ति लोक सेवक है। यदि यह मानसिक तत्व मौजूद नहीं है, तो Section 218 के अंतर्गत अपराध स्थापित करने में कठिनाई हो सकती है।
Section 218, Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023.
Section 218 BNS के अंतर्गत सजा (Punishment)
| दंड का प्रकार | अधिकतम दंड |
|---|---|
| कारावास | छह महीने तक |
| कारावास का प्रकार | साधारण या कठोर |
| जुर्माना | ₹10,000 तक |
| संयुक्त दंड | कारावास और जुर्माना दोनों |
इस Section के अंतर्गत न्यायालय छह महीने तक का कारावास, दस हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों लगा सकता है।
Section 218, Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023.
BNSS के अंतर्गत अपराध का वर्गीकरण
Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 की First Schedule में Section 218 BNS के अपराध का वर्गीकरण इस प्रकार दिया गया है:
| कानूनी पहलू | वर्गीकरण |
|---|---|
| अपराध की प्रकृति | Non-Cognizable (गैर-संज्ञेय) |
| जमानत | Bailable (जमानतीय) |
| विचारण करने वाला न्यायालय | कोई भी Magistrate |
| अधिकतम कारावास | छह महीने |
| अधिकतम जुर्माना | ₹10,000 |
| दंड | कारावास या जुर्माना या दोनों |
First Schedule, Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023.
उदाहरण से समझिए
मान लीजिए कि न्यायालय के आदेश के अनुसार एक अधिकृत लोक सेवक किसी व्यक्ति की संपत्ति कुर्क करने या कब्जे में लेने पहुँचता है। संबंधित व्यक्ति जानता है कि वह अधिकारी लोक सेवक है और उसे कानून के अंतर्गत संपत्ति लेने का अधिकार प्राप्त है। इसके बावजूद वह संपत्ति लेने की कार्रवाई का विरोध करता है।
यदि अभियोजन यह साबित कर देता है कि संपत्ति लेने की कार्रवाई वैध थी, आरोपी ने उसका विरोध किया और उसे लोक सेवक की पहचान का ज्ञान था या विश्वास करने का कारण था, तो Section 218 BNS के अंतर्गत अपराध बन सकता है।
Section 218 BNS का फ्लोचार्ट
लोक सेवक द्वारा संपत्ति लेने की कार्रवाई
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क्या संपत्ति लेने की कार्रवाई वैध है?
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क्या कार्रवाई करने वाला व्यक्ति लोक सेवक है?
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क्या आरोपी को लोक सेवक होने का
ज्ञान या विश्वास करने का कारण था?
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क्या आरोपी ने संपत्ति लेने का विरोध किया?
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क्या Section 218 के सभी आवश्यक
तत्व सिद्ध होते हैं?
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Section 218 BNS के अंतर्गत
कानूनी कार्रवाईSection 217 और Section 218 BNS में अंतर
दोनों Sections लोक सेवक की वैधानिक शक्तियों से संबंधित हैं, लेकिन इनके अंतर्गत अलग-अलग प्रकार के आचरण को दंडनीय बनाया गया है।
| आधार | Section 217 BNS | Section 218 BNS |
|---|---|---|
| मुख्य विषय | लोक सेवक को नुकसान पहुँचाने के उद्देश्य से झूठी सूचना देना | लोक सेवक द्वारा संपत्ति लेने की वैध कार्रवाई का विरोध करना |
| आवश्यक आचरण | जानबूझकर झूठी सूचना देना | संपत्ति लेने में विरोध करना |
| मानसिक तत्व | सूचना झूठी होने का ज्ञान या विश्वास और लोक सेवक से अनुचित कार्य करवाने का उद्देश्य या संभावना का ज्ञान | लोक सेवक की पहचान का ज्ञान या ऐसा विश्वास करने का कारण |
| अधिकतम कारावास | एक वर्ष | छह महीने |
| अधिकतम जुर्माना | ₹10,000 | ₹10,000 |
Sections 217 and 218, Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023.
Section 218 और Section 221 BNS में अंतर
Section 218 का संबंध लोक सेवक द्वारा संपत्ति लिए जाने के विरोध से है, जबकि Section 221 लोक सेवक को उसके सार्वजनिक कर्तव्यों के निर्वहन में बाधा पहुँचाने से संबंधित है।
इसलिए दोनों Sections के अंतर्गत अपराध के आवश्यक तत्व अलग-अलग हैं। किसी मामले में कौन-सा प्रावधान लागू होगा, यह संबंधित कार्रवाई और उसके तथ्यों पर निर्भर करेगा।
Sections 218 and 221, Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023.
Section 218 BNS का व्यावहारिक महत्त्व
यह प्रावधान सरकारी और न्यायिक अधिकारियों द्वारा कानून के अंतर्गत की जाने वाली संपत्ति संबंधी कार्रवाई को प्रभावी बनाने में सहायता करता है। उदाहरण के लिए, जब कोई सक्षम अधिकारी कानूनी प्रक्रिया के तहत संपत्ति को जब्त या कुर्क करने की कार्रवाई करता है, तो उस कार्रवाई का जानबूझकर विरोध करने पर Section 218 लागू हो सकता है।
हालाँकि, इस अपराध को स्थापित करने के लिए केवल संपत्ति लेने का विरोध पर्याप्त नहीं है। यह भी साबित करना आवश्यक है कि लोक सेवक कानूनन संपत्ति लेने के लिए अधिकृत था और आरोपी को उसके लोक सेवक होने का ज्ञान था या ऐसा विश्वास करने का कारण था।
निष्कर्ष
Section 218 BNS, 2023 के अंतर्गत किसी लोक सेवक द्वारा कानून के अधिकार से संपत्ति लिए जाने का विरोध करना दंडनीय अपराध है, बशर्ते आरोपी को यह जानकारी हो या विश्वास करने का कारण हो कि वह व्यक्ति लोक सेवक है।
इस अपराध के लिए छह महीने तक का साधारण या कठोर कारावास, दस हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। BNSS की First Schedule के अनुसार यह गैर-संज्ञेय और जमानतीय अपराध है तथा इसका विचारण कोई भी Magistrate कर सकता है।
Related Sections
Section 217 BNS: लोक सेवक को नुकसान पहुँचाने के उद्देश्य से झूठी सूचना देना।
Section 219 BNS: लोक सेवक के अधिकार से बिक्री के लिए प्रस्तुत संपत्ति की बिक्री में बाधा डालना।
Section 221 BNS: लोक सेवक के सार्वजनिक कार्यों के निर्वहन में बाधा डालना।

