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Section 23 & 24 BNS 2023: धारा 23 और 24 (नशे या मत्तता का बचाव - Defense of Intoxication)

 भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023: धारा 23 और 24 (नशे या मत्तता का बचाव - Defense of Intoxication)

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आज हम भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के अध्याय III (General Exceptions) की दो अत्यंत व्यावहारिक और तकनीकी धाराओं—धारा 23 (Section 23) और धारा 24 (Section 24) का गहराई से विश्लेषण (detailed analysis) करेंगे।

आपराधिक न्यायशास्त्र (Criminal Jurisprudence) में नशे या मत्तता (Intoxication) को लेकर एक सीधा सा नियम है—"नशा कोई बहाना नहीं है" (Intoxication is not an excuse)। लेकिन, कानून उन लोगों की रक्षा भी करता है जिन्हें धोखे से या जबरदस्ती नशा कराया गया हो। इसीलिए कानून नशे को दो भागों में बांटता है: 'अनैच्छिक नशा' (Involuntary Intoxication - धारा 23) और 'स्वैच्छिक नशा' (Voluntary Intoxication - धारा 24)।

आइए इन दोनों धाराओं को एक Expert Lawyer की तरह क्लॉज़-वाइज़ डिकोड करते हैं:

धारा 23: अनैच्छिक नशे के कारण निर्णय लेने में अक्षम व्यक्ति का कार्य (Involuntary Intoxication)


  • मूल कानूनी प्रावधान: BNS की धारा 23 स्पष्ट करती है कि कोई भी बात 'अपराध' (Offence) नहीं है, जो किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा की जाती है, जो उस कार्य को करते समय नशे (intoxication) के कारण यह जानने में अक्षम है कि उस कार्य की प्रकृति क्या है, या वह जो कर रहा है वह गलत या कानून के विरुद्ध है।

  • सबसे महत्वपूर्ण शर्त (The Core Condition): यह पूर्ण बचाव (absolute immunity) तभी मिलेगा जब वह नशा उस व्यक्ति को 'उसकी जानकारी के बिना' (without his knowledge) या 'उसकी इच्छा के विरुद्ध' (against his will) दिया गया हो।

  • Practical Example: मान लीजिए 'A' एक पार्टी में जाता है। 'B' धोखे से (बिना 'A' की जानकारी के) 'A' की कोल्ड-ड्रिंक में शराब या कोई ड्रग्स मिला देता है। 'A' नशे में बेसुध हो जाता है और उसी हालत में 'C' पर हमला कर देता है। यहाँ 'A' को धारा 23 के तहत पूरा बचाव मिलेगा क्योंकि नशा अनैच्छिक (without his knowledge) था, और उस नशे के कारण वह अपने कार्य की प्रकृति समझने में पूरी तरह अक्षम था।

धारा 24: स्वैच्छिक नशे में किया गया अपराध (Voluntary Intoxication)

  • मूल कानूनी प्रावधान: यह धारा उस व्यक्ति पर लागू होती है जिसने खुद अपनी मर्ज़ी से नशा किया हो (Voluntary Intoxication)। धारा 24 के अनुसार, यदि कोई अपराध ऐसा है जिसे साबित करने के लिए 'विशेष ज्ञान या आशय' (particular knowledge or intent) की आवश्यकता होती है, तो एक स्वैच्छिक नशे में धुत व्यक्ति से कानून यही मानेगा कि उसके पास वह 'ज्ञान' (Knowledge) था जो उसे तब होता जब वह नशे में नहीं होता (sober state)।

  • अपवाद: यह नियम केवल तभी लागू नहीं होगा जब नशा उसकी जानकारी के बिना या उसकी इच्छा के विरुद्ध कराया गया हो (Involuntary)।

  • Practical Example: 'A' अपनी मर्ज़ी से बहुत ज़्यादा शराब पीता है। नशे की हालत में वह अपनी कार अंधाधुंध चलाता है और फुटपाथ पर सो रहे लोगों को कुचल देता है। कोर्ट में 'A' यह बचाव नहीं ले सकता कि "मैं नशे में था, मुझे 'ज्ञान' नहीं था कि क्या हो रहा है।" धारा 24 के तहत, कोर्ट यह मानेगा कि 'A' को अपनी कार की गति और उसके खतरनाक परिणामों का पूरा 'ज्ञान' (Knowledge) था, जैसे कि वह बिना नशे के होता।

Court Insight & Legal Linkage: 

सुप्रीम कोर्ट ने 'Basdev vs. State of PEPSU' के ऐतिहासिक मामले में स्वैच्छिक नशे (Voluntary Intoxication) पर बहुत ही बारीक लकीर खींची थी। कोर्ट ने कहा था कि स्वैच्छिक नशे में कानून व्यक्ति के 'ज्ञान' (Knowledge) का तो अनुमान लगा सकता है, लेकिन उसके 'इरादे' (Intention / Mens Rea) का नहीं। यदि व्यक्ति इतना नशे में था कि वह कोई 'इरादा' बना ही नहीं सकता था, तो उसे हत्या (Murder) की जगह गैर-इरादतन हत्या (Culpable Homicide) की सजा मिल सकती है, लेकिन वह पूरी तरह छूट नहीं सकता। आप अपनी तैयारी के लिए इस जजमेंट को स्वतंत्र रूप से verify कर सकते हैं।)

Short Trick for Memory: 

Exams में इन धाराओं को याद रखने के लिए मेरी यह आसान ट्रिक अपनाएं:

 Sections 23 and 24 clearly establish that while the law protects the innocent victims of intoxication, it never allows voluntary drunkenness to become a license to commit crimes! Keep your concepts crystal clear and keep revising.


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