BNS Section 216: शपथ लेकर झूठा बयान देना पड़ सकता है भारी! जानिए तीन साल तक की सजा का प्रावधान
Introduction
Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 का Section 216 ऐसे व्यक्ति को दंडित करता है, जो शपथ या प्रतिज्ञान के अधीन सत्य बोलने के लिए कानूनन बाध्य होने के बावजूद लोक सेवक या कानून द्वारा अधिकृत व्यक्ति के समक्ष झूठा बयान देता है।
इस प्रावधान का उद्देश्य शपथ के अधीन दिए जाने वाले बयानों की सत्यता बनाए रखना और न्यायिक एवं वैधानिक प्रक्रियाओं में जानबूझकर झूठ बोलने पर कानूनी जवाबदेही निर्धारित करना है।
Section 216 BNS का मूल वैधानिक पाठ
Section 216. False statement on oath or affirmation to public servant or person authorised to administer an oath or affirmation.
“Whoever, being legally bound by an oath or affirmation to state the truth on any subject to any public servant or other person authorised by law to administer such oath or affirmation, makes, to such public servant or other person as aforesaid, touching that subject, any statement which is false, and which he either knows or believes to be false or does not believe to be true, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to three years, and shall also be liable to fine.”
Section 216 BNS का हिंदी अर्थ
यदि कोई व्यक्ति किसी विषय पर सत्य बोलने के लिए शपथ या प्रतिज्ञान द्वारा कानूनन बाध्य है और वह किसी लोक सेवक या ऐसे अन्य व्यक्ति के समक्ष, जिसे कानून के अंतर्गत शपथ या प्रतिज्ञान दिलाने का अधिकार प्राप्त है, उस विषय के संबंध में झूठा बयान देता है तथा वह जानता है या मानता है कि उसका बयान झूठा है अथवा उसे अपने बयान के सत्य होने का विश्वास नहीं है, तो उसे तीन वर्ष तक के किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित किया जा सकता है और वह जुर्माना देने के लिए भी उत्तरदायी होगा।
Section 216 BNS के आवश्यक तत्व (Essential Ingredients)
व्यक्ति का शपथ या प्रतिज्ञान से बंधा होना
इस अपराध का पहला आवश्यक तत्व यह है कि व्यक्ति किसी विषय पर सत्य बोलने के लिए शपथ या प्रतिज्ञान के माध्यम से कानूनन बाध्य हो। केवल किसी व्यक्ति द्वारा दिया गया सामान्य बयान इस Section को लागू करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
शपथ दिलाने वाले व्यक्ति का कानूनी रूप से अधिकृत होना
शपथ या प्रतिज्ञान दिलाने वाला व्यक्ति लोक सेवक अथवा ऐसा अन्य व्यक्ति होना चाहिए, जिसे कानून द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान दिलाने का अधिकार प्राप्त हो।
बयान उसी विषय से संबंधित होना चाहिए
झूठा बयान उसी विषय के संबंध में दिया गया होना चाहिए, जिस पर व्यक्ति शपथ या प्रतिज्ञान के अधीन सत्य बताने के लिए बाध्य है।
बयान का झूठा होना
व्यक्ति द्वारा दिया गया बयान वस्तुतः झूठा होना चाहिए। केवल बयान में विरोधाभास या तथ्यात्मक अंतर होने से अपने आप Section 216 का अपराध सिद्ध नहीं होता।
झूठे होने का ज्ञान या विश्वास
व्यक्ति को यह पता होना चाहिए या उसका यह विश्वास होना चाहिए कि बयान झूठा है। यह भी आवश्यक है कि वह उस बयान को सत्य नहीं मानता हो।
इस प्रकार, केवल गलत जानकारी देना और जानबूझकर झूठा बयान देना अलग-अलग परिस्थितियाँ हैं। Section 216 में व्यक्ति की जानकारी और मानसिक स्थिति महत्त्वपूर्ण है।
Section 216, Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023.
Section 216 BNS के अंतर्गत सजा (Punishment)
| दंड का प्रकार | प्रावधान |
|---|---|
| कारावास | अधिकतम तीन वर्ष |
| कारावास का प्रकार | साधारण या कठोर, दोनों में से कोई |
| जुर्माना | जुर्माना भी लगाया जा सकता है |
| संयुक्त दंड | कारावास के साथ जुर्माना |
Section 216 में कारावास की अवधि अधिकतम तीन वर्ष निर्धारित है। इसके अतिरिक्त दोषी व्यक्ति जुर्माने के लिए भी उत्तरदायी होगा। इस Section में जुर्माने की कोई निश्चित अधिकतम राशि निर्धारित नहीं की गई है।
Section 216, Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023.
BNSS के अंतर्गत अपराध का वर्गीकरण
BNSS की First Schedule के अनुसार Section 216 BNS के अंतर्गत अपराध की प्रकृति निम्नलिखित है:
| कानूनी पहलू | वर्गीकरण |
|---|---|
| अपराध की प्रकृति | Non-Cognizable (गैर-संज्ञेय) |
| जमानत | Bailable (जमानतीय) |
| विचारण करने वाला न्यायालय | Magistrate of the First Class |
| अधिकतम कारावास | तीन वर्ष |
| जुर्माना | जुर्माना भी देय होगा |
First Schedule, Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023.
उदाहरण से समझिए
मान लीजिए कि किसी व्यक्ति को कानून के अंतर्गत किसी विषय पर शपथ दिलाई गई है और उसे सत्य बयान देने के लिए बाध्य किया गया है। वह किसी लोक सेवक के समक्ष बयान देता है कि उसने एक विशेष घटना अपनी आँखों से देखी है, जबकि वह जानता है कि उसने वह घटना नहीं देखी थी।
यदि यह सिद्ध हो जाता है कि व्यक्ति शपथ के अधीन सत्य बोलने के लिए बाध्य था और उसने जानते हुए झूठा बयान दिया, तो उसके विरुद्ध Section 216 BNS के अंतर्गत कार्रवाई की जा सकती है।
Section 216 BNS का प्रक्रिया फ्लोचार्ट
व्यक्ति से सत्य बयान देने की अपेक्षा
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क्या व्यक्ति शपथ या प्रतिज्ञान से बंधा है?
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क्या शपथ दिलाने वाला व्यक्ति
कानूनन अधिकृत है?
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क्या बयान संबंधित विषय के बारे में है?
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क्या बयान वास्तव में झूठा है?
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क्या व्यक्ति जानता था या मानता था
कि बयान झूठा है?
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Section 216 BNS के आवश्यक तत्व
सिद्ध होने पर कानूनी कार्रवाईSection 213, 214, 215 और 216 BNS में अंतर
इन Sections का संबंध लोक सेवक के समक्ष कानूनी दायित्वों से है, लेकिन प्रत्येक Section अलग प्रकार के आचरण को दंडनीय बनाता है।
| Section | अपराध का स्वरूप | अधिकतम दंड |
|---|---|---|
| Section 213 | शपथ या प्रतिज्ञान लेने से इनकार | छह महीने का साधारण कारावास या ₹5,000 जुर्माना या दोनों |
| Section 214 | लोक सेवक के वैध प्रश्न का उत्तर देने से इनकार | छह महीने का साधारण कारावास या ₹5,000 जुर्माना या दोनों |
| Section 215 | अपने बयान पर हस्ताक्षर करने से इनकार | तीन महीने का साधारण कारावास या ₹3,000 जुर्माना या दोनों |
| Section 216 | शपथ या प्रतिज्ञान के अधीन झूठा बयान देना | तीन वर्ष तक का कारावास और जुर्माना |
Section 216 और Section 227 BNS में अंतर
Section 216 और Section 227 दोनों झूठे बयान से संबंधित हैं, लेकिन इनके कानूनी तत्व अलग हैं।
| आधार | Section 216 BNS | Section 227 BNS |
|---|---|---|
| मुख्य विषय | शपथ या प्रतिज्ञान के अधीन लोक सेवक या अधिकृत व्यक्ति को झूठा बयान देना | कानूनन सत्य बताने के लिए बाध्य व्यक्ति द्वारा झूठा साक्ष्य देना |
| शपथ की स्थिति | शपथ या प्रतिज्ञान आवश्यक | शपथ या कानून के स्पष्ट प्रावधान के अधीन सत्य बताने का दायित्व |
| संबंधित व्यक्ति | लोक सेवक या शपथ दिलाने के लिए कानूनन अधिकृत अन्य व्यक्ति | कानूनन सत्य बताने या घोषणा करने के लिए बाध्य व्यक्ति |
| मुख्य कानूनी प्रश्न | क्या शपथ के अधीन जानबूझकर झूठा बयान दिया गया? | क्या कानूनन सत्य बताने के दायित्व का उल्लंघन करके झूठा साक्ष्य दिया गया? |
Section 227 BNS में False Evidence की परिभाषा दी गई है। दोनों Sections के आवश्यक तत्वों का अलग-अलग परीक्षण करना आवश्यक है।
Sections 216 and 227, Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023.
Section 216 BNS का महत्त्व
यह प्रावधान शपथ या प्रतिज्ञान के अधीन दिए जाने वाले बयानों की विश्वसनीयता बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि कोई व्यक्ति कानूनन सत्य बोलने के लिए बाध्य होने के बावजूद जानबूझकर झूठा बयान देता है, तो उसकी जवाबदेही निर्धारित की जा सकती है।
इस Section के अंतर्गत केवल गलत बयान होना पर्याप्त नहीं है। यह भी स्थापित करना आवश्यक है कि व्यक्ति शपथ या प्रतिज्ञान से कानूनन बाध्य था और उसे अपने बयान के झूठे होने का ज्ञान या विश्वास था अथवा वह उसे सत्य नहीं मानता था।
निष्कर्ष
Section 216 BNS, 2023 के अंतर्गत शपथ या प्रतिज्ञान के अधीन जानबूझकर झूठा बयान देना दंडनीय अपराध है। इसके लिए अधिकतम तीन वर्ष के साधारण या कठोर कारावास के साथ जुर्माने का प्रावधान है। अपराध सिद्ध करने के लिए शपथ या प्रतिज्ञान का कानूनी दायित्व, अधिकृत व्यक्ति के समक्ष बयान, बयान का झूठा होना और व्यक्ति की दोषपूर्ण मानसिक स्थिति महत्त्वपूर्ण हैं।
Related Sections
Section 213 BNS: शपथ या प्रतिज्ञान लेने से इनकार करना।
Section 214 BNS: लोक सेवक के वैध प्रश्न का उत्तर देने से इनकार करना।
Section 215 BNS: अपने बयान पर हस्ताक्षर करने से इनकार करना।
Section 227 BNS: झूठा साक्ष्य देना (Giving False Evidence)।

