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Section 203 BNS 2023 – Public Servant Unlawfully Buying or Bidding for Property

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Section 203 BNS, 2023: Public Servant Unlawfully Buying or Bidding for Property

Section 203 BNS 2023 के तहत प्रतिबंधित संपत्ति खरीदने या बोली लगाने वाले लोक सेवक के दंड और संपत्ति की जब्ती के प्रावधान समझें।

Introduction

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की Section 203 ऐसे लोक सेवक के विरुद्ध दंड का प्रावधान करती है, जो कानूनन किसी विशिष्ट संपत्ति को खरीदने या उसकी बोली लगाने से प्रतिबंधित होने के बावजूद ऐसा करता है। इस प्रावधान का उद्देश्य लोक सेवकों को उनके आधिकारिक पद से उत्पन्न कानूनी प्रतिबंधों का उल्लंघन करके संपत्ति के लेन-देन में अनुचित लाभ प्राप्त करने से रोकना है।

इस Section की विशेषता यह है कि प्रतिबंधित खरीद या बोली केवल लोक सेवक के अपने नाम से ही नहीं, बल्कि किसी अन्य व्यक्ति के नाम से, संयुक्त रूप से या अन्य लोगों के साथ हिस्सेदारी में किए जाने पर भी इसके दायरे में आ सकती है। यदि संपत्ति खरीदी जा चुकी है, तो Section के अनुसार उसे जब्त किया जाएगा।

Bare Act Provision

Section 203 — Public servant unlawfully buying or bidding for property

“Whoever, being a public servant, and being legally bound as such public servant, not to purchase or bid for certain property, purchases or bids for that property, either in his own name or in the name of another, or jointly, or in shares with others, shall be punished with simple imprisonment for a term which may extend to two years, or with fine, or with both; and the property, if purchased, shall be confiscated.”

Section 203, Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023.

Meaning and Scope of Section 203 BNS

Section 203 का मूल उद्देश्य ऐसी संपत्ति की खरीद या बोली को दंडित करना है, जिसके संबंध में संबंधित लोक सेवक पर कानूनन खरीदने या बोली लगाने का प्रतिबंध लागू है।

इस अपराध के लिए यह आवश्यक है कि संबंधित लोक सेवक पर अपने पद या लोक सेवक के रूप में उसकी कानूनी स्थिति के कारण उस विशिष्ट संपत्ति को खरीदने या उसकी बोली लगाने से संबंधित प्रतिबंध लागू हो। इसके बाद भी यदि वह उस संपत्ति को खरीदता है या उसके लिए बोली लगाता है, तो Section 203 लागू हो सकती है।

केवल लोक सेवक होना और किसी संपत्ति को खरीदना अपने आप में इस अपराध को स्थापित नहीं करता। अभियोजन को उस कानूनी प्रतिबंध तथा प्रतिबंधित खरीद या बोली के तथ्यों को स्थापित करना होगा।

Section 203, Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023.

Essential Ingredients of Section 203 BNS

The Accused Must Be a Public Servant

इस Section का पहला आवश्यक तत्व यह है कि अभियुक्त लोक सेवक हो। उसकी स्थिति और संबंधित पद पर लागू कानून के आधार पर यह निर्धारित किया जाएगा कि वह इस प्रावधान के अंतर्गत आता है या नहीं।

A Legal Prohibition Must Apply to the Property

दूसरा आवश्यक तत्व यह है कि लोक सेवक पर किसी विशिष्ट संपत्ति को खरीदने या उसकी बोली लगाने से संबंधित कानूनी प्रतिबंध लागू हो। यह प्रतिबंध संबंधित कानून या लागू वैधानिक प्रावधान से उत्पन्न होना चाहिए।

इसलिए, किसी लोक सेवक द्वारा खरीदी गई प्रत्येक संपत्ति को अवैध नहीं माना जा सकता। यह देखना आवश्यक है कि क्या उस विशेष संपत्ति के संबंध में खरीद या बोली लगाने पर कानूनी रोक थी।

The Public Servant Must Purchase or Bid for the Property

तीसरा तत्व यह है कि लोक सेवक प्रतिबंधित संपत्ति को खरीदता है या उसके लिए बोली लगाता है। Section में खरीद और बोली लगाने, दोनों को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है।

अतः संपत्ति का अंतिम रूप से खरीदा जाना हर स्थिति में अपराध के मूल तत्व के लिए आवश्यक नहीं है, क्योंकि Section प्रतिबंधित संपत्ति के लिए बोली लगाने को भी दंडनीय बनाती है।

The Transaction May Be in Different Names or Forms

Section 203 के अनुसार, प्रतिबंधित लेन-देन निम्नलिखित रूपों में किया जाए, तब भी प्रावधान लागू हो सकता है:

अपने नाम से संपत्ति खरीदना या बोली लगाना।

किसी अन्य व्यक्ति के नाम से खरीदना या बोली लगाना।

संयुक्त रूप से संपत्ति खरीदना या बोली लगाना।

अन्य व्यक्तियों के साथ हिस्सेदारी में संपत्ति खरीदना या बोली लगाना।

इस भाषा का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लोक सेवक केवल किसी अन्य व्यक्ति का नाम इस्तेमाल करके लागू कानूनी प्रतिबंध से बच न सके।

Section 203, Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023.

Punishment Under Section 203 BNS

Section 203 में निम्नलिखित दंड निर्धारित किए गए हैं।

Simple Imprisonment: अधिकतम दो वर्ष तक का साधारण कारावास।

Fine: जुर्माना।

Both: साधारण कारावास और जुर्माना दोनों।

Confiscation of Property: यदि प्रतिबंधित संपत्ति खरीदी गई है, तो Section के अनुसार उस संपत्ति को जब्त किया जाएगा।

यहाँ एक महत्वपूर्ण अंतर है। कारावास और जुर्माने का प्रावधान अपराध के लिए दंड निर्धारित करता है, जबकि संपत्ति की जब्ती का प्रावधान खरीदी गई प्रतिबंधित संपत्ति के संबंध में अतिरिक्त कानूनी परिणाम निर्धारित करता है। Section में कारावास की अधिकतम अवधि दो वर्ष है।

Section 203, Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023.

Nature and Classification of the Offence

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की First Schedule के अनुसार, Section 203 के अंतर्गत अपराध का वर्गीकरण इस प्रकार है:

ClassificationPosition
Cognizable or Non-cognizableNon-cognizable
Bailable or Non-bailableBailable
Court competent to tryMagistrate of the First Class
PunishmentSimple imprisonment up to two years, or fine, or both
Confiscationखरीदी गई संपत्ति की जब्ती

इस वर्गीकरण के अनुसार, यह गैर-संज्ञेय और जमानतीय अपराध है तथा इसका विचारण प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा किया जा सकता है।

First Schedule, Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023; Section 203, Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023.

Illustrations

Purchase in the Public Servant’s Own Name

मान लीजिए कि किसी लोक सेवक पर लागू कानून उसे एक विशेष सरकारी नीलामी में संपत्ति खरीदने से प्रतिबंधित करता है। इसके बावजूद वह अपने नाम से उस संपत्ति के लिए बोली लगाता है। यदि लागू कानूनी प्रतिबंध और बोली लगाने के तथ्य स्थापित हो जाते हैं, तो Section 203 के आवश्यक तत्व पूरे हो सकते हैं।

Purchase Through Another Person

मान लीजिए कि कोई लोक सेवक कानूनन प्रतिबंधित संपत्ति को अपने नाम से खरीदने के बजाय किसी अन्य व्यक्ति के नाम से खरीदता है। Section 203 में किसी अन्य व्यक्ति के नाम से खरीदने या बोली लगाने को भी शामिल किया गया है। इसलिए, केवल नाम बदल देने से कानूनी प्रतिबंध समाप्त नहीं हो जाता।

Joint Purchase or Purchase in Shares

मान लीजिए कि कोई लोक सेवक प्रतिबंधित संपत्ति को अन्य व्यक्तियों के साथ संयुक्त रूप से खरीदता है या उसमें हिस्सेदारी प्राप्त करता है। यदि संपत्ति के संबंध में कानूनी प्रतिबंध लागू है और लेन-देन Section में वर्णित स्वरूप का है, तो संयुक्त खरीद या हिस्सेदारी भी इस Section के दायरे में आ सकती है।

ये उदाहरण Section की भाषा और आवश्यक तत्वों को समझाने के लिए हैं। वास्तविक मामले में लागू कानूनी प्रतिबंध और लेन-देन की परिस्थितियों का परीक्षण आवश्यक होगा।

Difference Between Section 202 and Section 203 BNS

Section 202 और Section 203, दोनों लोक सेवकों पर लागू कानूनी प्रतिबंधों के उल्लंघन से संबंधित हैं, लेकिन इनके विषय अलग हैं।

Section 202 ऐसे लोक सेवक द्वारा व्यापार करने को दंडनीय बनाती है, जिस पर कानूनन व्यापार न करने का दायित्व है। इसके अंतर्गत अधिकतम एक वर्ष का साधारण कारावास, जुर्माना, दोनों या सामुदायिक सेवा का प्रावधान है।

इसके विपरीत, Section 203 ऐसे लोक सेवक द्वारा किसी विशिष्ट संपत्ति को खरीदने या उसकी बोली लगाने से संबंधित है, जिसे ऐसा करने से कानूनन प्रतिबंधित किया गया है। इसके अंतर्गत अधिकतम दो वर्ष का साधारण कारावास, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। यदि संपत्ति खरीदी गई है, तो उसकी जब्ती का भी प्रावधान है।

इस प्रकार, Section 202 का केंद्र प्रतिबंधित व्यापार है, जबकि Section 203 का केंद्र प्रतिबंधित संपत्ति की खरीद या बोली है।

Sections 202–203, Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023.

Conclusion

Section 203 BNS, 2023 लोक सेवकों द्वारा कानूनन प्रतिबंधित संपत्ति खरीदने या उसकी बोली लगाने को दंडनीय बनाती है। यह प्रावधान अपने नाम से किए गए लेन-देन के साथ-साथ किसी अन्य व्यक्ति के नाम से, संयुक्त रूप से या हिस्सेदारी में किए गए प्रतिबंधित लेन-देन को भी समाहित करता है।

इस अपराध को स्थापित करने के लिए यह दिखाना आवश्यक है कि अभियुक्त लोक सेवक था, उस पर संबंधित संपत्ति खरीदने या बोली लगाने का कानूनी प्रतिबंध लागू था और उसने इसके बावजूद प्रतिबंधित खरीद या बोली की। यदि संपत्ति खरीदी गई है, तो Section 203 के अनुसार उसकी जब्ती का प्रावधान लागू होता है।

Related Sections

Section 201 BNS: Public servant framing an incorrect document with intent to cause injury.

Section 202 BNS: Public servant unlawfully engaging in trade.

Section 204 BNS: Personating a public servant.


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