Introduction
भारतीय न्याय संहिता, 2023 (Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023) का Section 199 लोक सेवकों द्वारा जाँच के दौरान कानून के निर्देशों की जानबूझकर अवज्ञा करने तथा कुछ निर्दिष्ट गंभीर अपराधों से संबंधित सूचना दर्ज न करने पर दंड का प्रावधान करता है। यह प्रावधान विशेष रूप से आपराधिक जाँच में कानून के पालन और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।
Section 199 के तीन प्रमुख भाग हैं। Clause (a) उस स्थिति से संबंधित है जिसमें लोक सेवक कानून द्वारा निषिद्ध होने के बावजूद किसी व्यक्ति को जाँच के उद्देश्य से किसी स्थान पर उपस्थित होने के लिए कहता है। Clause (b) जाँच करने के तरीके को नियंत्रित करने वाले कानूनी निर्देश की जानबूझकर अवज्ञा से संबंधित है, जब उससे किसी व्यक्ति को प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। Clause (c) कुछ सूचीबद्ध अपराधों के संबंध में Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 के Section 173(1) के अंतर्गत दी गई सूचना दर्ज न करने पर लागू होता है।
Statutory Text of Section 199 BNS
Section 199. Public servant disobeying direction under law.
“ Whoever, being a public servant,—
(a) knowingly disobeys any direction of the law which prohibits him from requiring the attendance at any place of any person for the purpose of investigation into an offence or any other matter; or
(b) knowingly disobeys, to the prejudice of any person, any other direction of the law regulating the manner in which he shall conduct such investigation; or
(c) fails to record any information given to him under sub-section (1) of section 173 of the Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 in relation to cognizable offence punishable under section 64, section 65, section 66, section 67, section 68, section 70, section 71, section 74, section 76, section 77, section 79, section 124, section 143 or section 144,
shall be punished with rigorous imprisonment for a term which shall not be less than six months but which may extend to two years, and shall also be liable to fine. ”
Meaning and Scope of Section 199 BNS
Section 199 लोक सेवक द्वारा जाँच के दौरान कुछ विशिष्ट कानूनी दायित्वों का उल्लंघन करने पर आपराधिक दायित्व निर्धारित करता है। इस Section के अंतर्गत केवल सामान्य प्रशासनिक त्रुटि और दंडनीय अवज्ञा में अंतर करना आवश्यक है। Clause (a) और Clause (b) में जानबूझकर अवज्ञा की शर्त स्पष्ट रूप से दी गई है, जबकि Clause (c) निर्दिष्ट अपराधों से संबंधित सूचना दर्ज करने में विफलता को संबोधित करता है।
इस प्रावधान में “public servant” का अर्थ ऐसे लोक सेवक से है जिस पर संबंधित कानूनी कर्तव्य लागू होता है। Clause (a) और (b) के लिए यह देखना आवश्यक है कि किस कानूनी निर्देश का उल्लंघन हुआ, आरोपी लोक सेवक को उस निर्देश की जानकारी थी या नहीं और Clause (b) के मामले में क्या अवज्ञा से किसी व्यक्ति को प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। Clause (c) के लिए यह जाँचना आवश्यक है कि सूचना BNSS Section 173(1) के अंतर्गत दी गई थी और वह इस Clause में सूचीबद्ध अपराधों से संबंधित थी या नहीं।
Section 199, Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023.
Essential Ingredients of Section 199 BNS
Public Servant
Section 199 का आरोपी लोक सेवक होना चाहिए और कथित कृत्य उसके उस कानूनी दायित्व से संबंधित होना चाहिए जो इस Section के संबंधित Clause में वर्णित है। किसी व्यक्ति का सरकारी पद पर होना अपने आप में अपराध सिद्ध नहीं करता; संबंधित Clause के आवश्यक तत्व भी स्थापित होने चाहिए।
Section 199, Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023.
Knowing Disobedience Under Clause (a)
Clause (a) उस स्थिति पर लागू होता है जिसमें कानून लोक सेवक को किसी व्यक्ति की किसी स्थान पर उपस्थिति की माँग करने से रोकता है, ताकि किसी अपराध या अन्य विषय की जाँच की जा सके। लोक सेवक द्वारा ऐसे कानूनी निषेध की जानकारी होते हुए भी उसका उल्लंघन करना इस Clause का केंद्र है।
इस Clause का उद्देश्य जाँच के नाम पर किसी व्यक्ति को वहाँ उपस्थित होने के लिए बाध्य करने से रोकना है जहाँ लागू कानून ऐसा करने की अनुमति नहीं देता। मामले में संबंधित कानूनी निषेध और उसकी जानबूझकर अवज्ञा का प्रमाण महत्वपूर्ण होगा।
Section 199(a), Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023.
Disobedience Causing Prejudice Under Clause (b)
Clause (b) जाँच करने के तरीके को नियंत्रित करने वाले अन्य कानूनी निर्देशों की जानबूझकर अवज्ञा से संबंधित है। इसके लिए अवज्ञा से किसी व्यक्ति को प्रतिकूल प्रभाव या नुकसान पहुँचना भी आवश्यक है। इसलिए जाँच की प्रक्रिया में हर अनियमितता अपने आप इस Clause का अपराध नहीं बनती; लागू कानूनी निर्देश, उसकी जानबूझकर अवज्ञा और संबंधित व्यक्ति के प्रति प्रतिकूल प्रभाव का आकलन करना होगा।
Section 199(b), Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023.
Failure to Record Information Under Clause (c)
Clause (c) ऐसे लोक सेवक को दंडित करता है जो BNSS Section 173(1) के अंतर्गत दी गई ऐसी सूचना दर्ज करने में विफल रहता है जो इस Clause में सूचीबद्ध संज्ञेय अपराधों से संबंधित हो। यह Clause विशेष रूप से सूचीबद्ध अपराधों पर लागू होता है, न कि प्रत्येक संज्ञेय अपराध पर स्वतः।
इस भाग में जानबूझकर अवज्ञा की भाषा Clause (a) और Clause (b) की तरह अलग से नहीं लिखी गई है। इसका मुख्य प्रश्न यह है कि क्या संबंधित सूचना BNSS Section 173(1) के अंतर्गत दी गई थी, क्या वह निर्दिष्ट अपराध से संबंधित थी और क्या लोक सेवक उसे दर्ज करने में विफल रहा।
Section 199(c), Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023.
Offences Listed Under Section 199(c)
Section 199(c) निम्नलिखित BNS Sections के अंतर्गत दंडनीय संज्ञेय अपराधों से संबंधित सूचना दर्ज न करने को शामिल करता है:
| BNS Section | विषय |
|---|---|
| Section 64 | Rape |
| Section 65 | कुछ निर्दिष्ट परिस्थितियों में बलात्कार के लिए दंड |
| Section 66 | बलात्कार के कारण मृत्यु या लगातार निष्क्रिय अवस्था |
| Section 67 | पृथक रह रही पत्नी के साथ पति द्वारा यौन संबंध |
| Section 68 | प्राधिकार प्राप्त व्यक्ति द्वारा यौन संबंध |
| Section 70 | सामूहिक बलात्कार |
| Section 71 | बार-बार अपराध करने वालों के लिए दंड |
| Section 74 | महिला की लज्जा भंग करने के आशय से हमला या आपराधिक बल |
| Section 76 | महिला को निर्वस्त्र करने के आशय से हमला या आपराधिक बल |
| Section 77 | Voyeurism |
| Section 79 | महिला की मर्यादा का अपमान करने के आशय से शब्द, संकेत या कृत्य |
| Section 124 | खतरनाक साधनों से गंभीर चोट पहुँचाना या अम्ल आदि से संबंधित अपराध |
| Section 143 | मानव तस्करी |
| Section 144 | तस्करी किए गए व्यक्ति का शोषण |
उपरोक्त सूची Section 199(c) में उल्लिखित Sections पर आधारित है। किसी विशिष्ट मामले में संबंधित अपराध के लागू उपखंड, तथ्य और BNSS Section 173(1) के अंतर्गत सूचना की प्रकृति की जाँच करना आवश्यक होगा।
Section 199(c), Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023.
Punishment Under Section 199 BNS
Section 199 के अंतर्गत दोषसिद्ध लोक सेवक को कठोर कारावास दिया जा सकता है, जिसकी अवधि कम-से-कम छह महीने होगी और जो दो वर्ष तक बढ़ सकती है। इसके अतिरिक्त, आरोपी जुर्माने के लिए भी उत्तरदायी होगा।
यहाँ “rigorous imprisonment” का अर्थ ऐसा कारावास है जिसमें कानून के अनुसार कठोर श्रम शामिल हो सकता है। Section में न्यूनतम छह महीने का कारावास निर्धारित है; इसलिए दंड तय करते समय न्यायालय को इस न्यूनतम सीमा और लागू कानूनी प्रावधानों का ध्यान रखना होगा।
Section 199, Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023.
Nature of Offence and Trial
Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 की First Schedule के अनुसार Section 199 का अपराध संज्ञेय (Cognizable) और जमानतीय (Bailable) है। इसका विचारण प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा किया जा सकता है।
संज्ञेय होने का अर्थ है कि लागू प्रक्रिया के अनुसार पुलिस बिना वारंट गिरफ्तारी कर सकती है। हालांकि, गिरफ्तारी की शक्ति का अर्थ यह नहीं है कि प्रत्येक मामले में गिरफ्तारी अनिवार्य है; गिरफ्तारी और जाँच BNSS के लागू प्रावधानों के अधीन होंगी। जमानतीय होने का अर्थ है कि संबंधित वैधानिक शर्तें पूरी होने पर आरोपी जमानत पाने का अधिकार रखता है।
First Schedule, Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023.
Practical Examples
Example Under Clause (a)
मान लीजिए कि कानून किसी लोक सेवक को जाँच के उद्देश्य से किसी व्यक्ति को एक विशेष स्थान पर उपस्थित होने की माँग करने से रोकता है। यदि लोक सेवक उस कानूनी निषेध को जानते हुए भी व्यक्ति की उपस्थिति की माँग करता है, तो परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर Clause (a) लागू हो सकता है।
Section 199(a), Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023.
Example Under Clause (b)
मान लीजिए कि जाँच करने के तरीके के संबंध में कानून एक विशेष प्रक्रिया निर्धारित करता है। लोक सेवक उस कानूनी निर्देश को जानते हुए उसका उल्लंघन करता है और इस अवज्ञा से किसी व्यक्ति के अधिकारों या हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। यदि सभी आवश्यक तत्व स्थापित हों, तो Clause (b) के अंतर्गत दायित्व बन सकता है।
Section 199(b), Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023.
Example Under Clause (c)
मान लीजिए कि पुलिस अधिकारी को BNSS Section 173(1) के अंतर्गत ऐसी सूचना दी जाती है जो BNS Section 70 के अंतर्गत दंडनीय संज्ञेय अपराध से संबंधित है। यदि अधिकारी उस सूचना को दर्ज करने में विफल रहता है, तो Clause (c) के अंतर्गत उसकी आपराधिक जिम्मेदारी का प्रश्न उठ सकता है।
Section 199(c), Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023.
Difference Between Section 198 and Section 199 BNS
Section 198 लोक सेवक द्वारा अपने आधिकारिक आचरण को नियंत्रित करने वाले कानूनी निर्देश की जानबूझकर अवज्ञा पर लागू होता है, जब उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति को नुकसान पहुँचाना हो या उसे नुकसान होने की संभावना का ज्ञान हो। इसके विपरीत, Section 199 जाँच की प्रक्रिया से संबंधित विशिष्ट कानूनी निर्देशों की अवज्ञा तथा कुछ सूचीबद्ध अपराधों के संबंध में सूचना दर्ज न करने को संबोधित करता है।
Section 198 में अधिकतम एक वर्ष का साधारण कारावास, जुर्माना या दोनों निर्धारित हैं। Section 199 में कम-से-कम छह महीने और अधिकतम दो वर्ष का कठोर कारावास तथा जुर्माने का प्रावधान है। इसलिए दोनों Sections में अपराध के तत्वों और दंड में महत्वपूर्ण अंतर है।
Sections 198 and 199, Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023.
Conclusion
Section 199 BNS, 2023 जाँच के दौरान लोक सेवकों के वैधानिक कर्तव्यों के पालन को सुनिश्चित करने वाला महत्वपूर्ण प्रावधान है। यह कानून द्वारा निषिद्ध उपस्थिति की माँग करने, जाँच की प्रक्रिया नियंत्रित करने वाले कानूनी निर्देशों की जानबूझकर अवज्ञा से किसी व्यक्ति को प्रतिकूल प्रभाव पहुँचाने और कुछ निर्दिष्ट अपराधों से संबंधित सूचना दर्ज न करने पर लागू हो सकता है।
इस Section के अंतर्गत दोषसिद्धि होने पर कम-से-कम छह महीने और अधिकतम दो वर्ष का कठोर कारावास तथा जुर्माना निर्धारित है। अपराध संज्ञेय और जमानतीय है तथा इसका विचारण प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा किया जा सकता है।
Related Sections
Section 198 BNS: लोक सेवक द्वारा किसी व्यक्ति को नुकसान पहुँचाने के आशय से कानून की अवज्ञा।
Section 200 BNS: अस्पताल के प्रभारी द्वारा BNSS Section 397 के प्रावधानों का उल्लंघन।
Section 173 BNSS: संज्ञेय अपराधों की सूचना और पुलिस द्वारा उसे दर्ज करने से संबंधित प्रक्रिया।
