लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (POCSO Act) की धारा 11 विशेष रूप से "लैंगिक उत्पीड़न" (Sexual Harassment) को विस्तार से परिभाषित करती है। यह धारा उन गैर-शारीरिक यौन व्यवहारों और कृत्यों को अपराध की श्रेणी में लाती है जो किसी बालक की गरिमा, निजता और मानसिक शांति को ठेस पहुँचाते हैं।
इस धारा के अनुसार, कोई व्यक्ति किसी बालक पर लैंगिक उत्पीड़न करता है, यह तब कहा जाता है जब वह व्यक्ति "लैंगिक आशय" (Sexual intent) से निम्नलिखित में से कोई भी कृत्य करता है:
धारा 11 के तहत लैंगिक उत्पीड़न के विभिन्न कृत्य:
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शब्दों, ध्वनियों या अंगविक्षेपों द्वारा उत्पीड़न (Words, Sounds, or Gestures): कोई भी ऐसा शब्द कहना, कोई ध्वनि (sound) निकालना, कोई अंगविक्षेप (gesture) करना, या किसी वस्तु या शरीर के किसी हिस्से को इस आशय से प्रदर्शित करना कि बालक उस शब्द या ध्वनि को सुने, या उस अंगविक्षेप/वस्तु/शरीर के भाग को देखे।
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बालक से उसके शरीर का प्रदर्शन कराना (Exhibition of Child's Body): बालक को इस बात के लिए विवश या प्रेरित करना कि वह अपने शरीर या अपने शरीर के किसी हिस्से का प्रदर्शन करे, ताकि उसे वह अपराधी या कोई अन्य व्यक्ति देख सके।
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अश्लील सामग्री या वस्तुएं दिखाना (Showing Obscene Material): अश्लील (pornographic) उद्देश्यों के लिए किसी भी रूप (format) या मीडिया (चाहे मुद्रित हो या इलेक्ट्रॉनिक) में बालक को कोई अश्लील वस्तु या चित्र दिखाना।
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पीछा करना या संपर्क साधना (Stalking or Contacting): प्रत्यक्ष रूप से या इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल या किसी भी अन्य माध्यम (जैसे सोशल मीडिया, फोन, इंटरनेट आदि) से बालक का बार-बार या लगातार पीछा करना, उस पर नजर रखना (watching) या उससे संपर्क करने का प्रयास करना।
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तस्वीरें या वीडियो सार्वजनिक करने की धमकी देना (Threatening to Release Images/Videos): बालक के शरीर के किसी हिस्से या किसी यौन कृत्य में बालक के शामिल होने के वास्तविक या रूपांतरित/बनाए गए (morphed) चित्रों/वीडियो को मीडिया (या इंटरनेट) के किसी भी रूप में उपयोग करने या प्रसारित करने की धमकी देना।
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अश्लील प्रयोजनों के लिए प्रलोभन देना (Inducement or Gratification): अश्लील उद्देश्यों के लिए किसी बालक को कोई लालच (प्रलोभन) देना या किसी भी प्रकार का परितोष (gratification/payment) प्रदान करना।
महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण (Explanation): अधिनियम में यह स्पष्ट किया गया है कि किसी भी मामले में यह प्रश्न कि आरोपी का "लैंगिक आशय" (Sexual Intent) था या नहीं, पूरी तरह से तथ्य का प्रश्न (Question of Fact) होगा, जिसका निर्धारण न्यायालय मामले की परिस्थितियों के आधार पर करेगा।
धारा 11 (लैंगिक उत्पीड़न) पर भारत के सर्वोच्च न्यायालय के प्रमुख निर्णय (Leading Supreme Court Judgments):
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Attorney General for India Vs. Satish & Anr. (2021) - "Skin-to-Skin Contact" Case: सर्वोच्च न्यायालय ने इस ऐतिहासिक मामले में पोक्सो अधिनियम के मूल सिद्धांतों को प्रतिपादित किया। यद्यपि यह मामला धारा 7 (लैंगिक हमला) से संबंधित था, न्यायालय ने स्पष्ट किया कि पोक्सो कानून के तहत भौतिक स्पर्श (physical touch) न होने पर भी, यदि आरोपी की मंशा में "लैंगिक आशय" (Sexual Intent) प्रमाणित होता है, तो वह कृत्य अपराध की श्रेणी में आएगा। यह सिद्धांत धारा 11 (लैंगिक उत्पीड़न) के उन मामलों में अत्यंत प्रासंगिक है जहाँ बिना किसी शारीरिक संपर्क के भी बालक को शब्दों, इशारों या डिजिटल माध्यमों से प्रताड़ित किया जाता है।
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Nipun Saxena Vs. Union of India (2018): इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने बच्चों की निजता और उनके संरक्षण के अधिकारों को सर्वोपरि माना। विशेष रूप से धारा 11 के क्लॉज (iv) और (v) के संदर्भ में (जहाँ डिजिटल या इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से बच्चों का पीछा करने या उनकी आपत्तिजनक तस्वीरों को वायरल करने की धमकी दी जाती है), न्यायालय ने सख्त निर्देश दिए कि डिजिटल माध्यमों पर बच्चों के ऐसे उत्पीड़न को रोकने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों को त्वरित और कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।
