अध्याय 3: अश्लील प्रयोजनों के लिए बालक का उपयोग और उसके लिए दंड
पोक्सो अधिनियम, 2012 का अध्याय 3 बालकों को अश्लील (Pornographic) गतिविधियों में धकेले जाने और बालक संबंधी अश्लील सामग्री के निर्माण, प्रसार व भंडारण (Storage) को रोकने के लिए अत्यंत कठोर प्रावधान करता है। इस अध्याय में मुख्य रूप से तीन धाराएँ शामिल हैं: धारा 13, धारा 14 और धारा 15।
नीचे इन तीनों धाराओं का विस्तृत और संपूर्ण विवरण दिया गया है:
1. धारा 13: अश्लील प्रयोजनों के लिए बालक का उपयोग (Use of child for pornographic purposes)
यह धारा अश्लील प्रयोजनों के लिए बच्चों के शोषण के दायरे को व्यापक रूप से परिभाषित करती है। इसके अनुसार, जो कोई भी व्यक्ति किसी बालक का उपयोग टेलीविजन चैनलों, इंटरनेट, प्रिंट मीडिया या किसी अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों या विज्ञापनों में करता है (चाहे वह व्यक्तिगत उपयोग के लिए हो या वितरण के लिए), और यदि उसका उद्देश्य लैंगिक परितोष (Sexual gratification) है, तो वह इस अपराध का दोषी माना जाएगा।
इसके अंतर्गत निम्नलिखित कृत्य शामिल हैं:
- (क) बालक की जननेन्द्रियों (Genitals) का प्रदर्शन करना।
- (ख) वास्तविक या नकली लैंगिक कार्यों (Penetrative or non-penetrative sexual acts) में बालक का उपयोग करना।
- (ग) बालक का कोई भी अशोभनीय या अश्लीलतापूर्ण प्रदर्शन (Obscene representation) करना।
धारा 13 का स्पष्टीकरण (Explanation):
"बालक का उपयोग" करने के अंतर्गत अश्लील सामग्री को तैयार करने, उसका उत्पादन (production) करने, उसे प्रस्तुत (presentation) करने, प्रसारित (transmission) करने, प्रकाशित करने, सुकर (facilitate) बनाने और वितरित करने के लिए प्रिंटिंग, इलेक्ट्रॉनिक, कंप्यूटर या किसी अन्य तकनीक के माध्यम से बालक को शामिल करना शामिल है।
2. धारा 14: अश्लील प्रयोजनों के लिए बालक के उपयोग के लिए दंड (Punishment for use of child for pornographic purposes)
इस धारा को दो उप-धाराओं में विभाजित किया गया है, जिसमें अपराधियों के लिए कड़े दंड का प्रावधान है:
- धारा 14(1) - अश्लील प्रयोजनों के लिए उपयोग करने पर दंड: जो कोई भी अश्लील प्रयोजनों के लिए बालक या बालकों का उपयोग करेगा, उसे न्यूनतम पाँच (5) वर्ष के कारावास की सजा दी जाएगी और वह जुर्माने से भी दंडनीय होगा। यदि वह व्यक्ति दूसरी बार या उसके बाद यह अपराध करते हुए दोषी पाया जाता है, तो उसे न्यूनतम सात (7) वर्ष के कारावास की सजा दी जाएगी और वह जुर्माने से भी दंडनीय होगा।
- धारा 14(2) - प्रत्यक्ष रूप से शामिल होने पर संचयी (Cumulative) दंड: यदि कोई व्यक्ति बच्चों का अश्लील प्रयोजनों के लिए उपयोग करते हुए स्वयं उन अश्लील कृत्यों में सीधे भाग लेता है, और ऐसा करके वह धारा 3 (प्रवेशी लैंगिक हमला), धारा 5 (गुरुतर प्रवेशी लैंगिक हमला), धारा 7 (लैंगिक हमला) या धारा 9 (गुरुतर लैंगिक हमला) के तहत कोई अपराध करता है, तो उसे उपधारा (1) के तहत मिलने वाली सजा के अतिरिक्त क्रमशः धारा 4, धारा 6, धारा 8 और धारा 10 के तहत भी अलग से दंडित किया जाएगा।
3. धारा 15: बालकों को संलिप्त करने वाली अश्लील सामग्री के भंडारण के लिए दंड (Punishment for storage of child pornographic material)
यह धारा बच्चों से संबंधित अश्लील सामग्री (CSAM) को अपने पास रखने, साझा करने और व्यावसायिक लाभ के लिए उसका भंडारण करने को कड़ा अपराध बनाती है। 2019 के संशोधनों के बाद इस धारा को और अधिक सख्त बनाया गया है:
- धारा 15(1) - साझा करने या प्रसारित करने के आशय से भंडारण: कोई भी व्यक्ति जो ऐसी अश्लील सामग्री को साझा या प्रसारित करने के इरादे से अपने पास रखता है या उसका भंडारण करता है, लेकिन उसे मिटाने (delete), नष्ट करने या अधिकृत अधिकारी को रिपोर्ट करने में विफल रहता है, वह पहली बार में कम से कम 5,000 रुपये के जुर्माने से दायी होगा। दूसरी बार या उसके बाद के अपराध के लिए जुर्माना कम से कम 10,000 रुपये होगा।
- धारा 15(2) - प्रसार या वितरण करने पर दंड: कोई भी व्यक्ति जो कानूनन रिपोर्टिंग या अदालत में साक्ष्य के रूप में उपयोग करने के अलावा, किसी भी समय या किसी भी तरीके से बच्चों से जुड़ी अश्लील सामग्री का पारेषण (Transmission), प्रदर्शन, प्रचार या वितरण करता है, उसे तीन (3) वर्ष तक के कारावास, या जुर्माने, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
- धारा 15(3) - व्यावसायिक उद्देश्यों (Commercial purposes) के लिए भंडारण: यदि कोई व्यक्ति व्यावसायिक लाभ के इरादे से ऐसी सामग्री का भंडारण करता है, तो उसे पहली बार दोषी पाए जाने पर न्यूनतम तीन (3) वर्ष के कठोर कारावास की सजा दी जाएगी, जिसे पाँच (5) वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माना या दोनों। यदि वह दूसरी बार या उसके बाद भी ऐसा करता हुआ पाया जाता है, तो उसे न्यूनतम पाँच (5) वर्ष के कारावास की सजा दी जाएगी, जिसे सात (7) वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है और वह जुर्माने का भी भागीदार होगा।
अध्याय 3 (विशेष रूप से धारा 15) पर भारत के सर्वोच्च न्यायालय के प्रमुख निर्णय (Leading Supreme Court Judgments):
1. Just Rights for Children Alliance Vs. S. Harish & Anr. (2024) - [ऐतिहासिक और हालिया निर्णय]: यह बाल अश्लीलता (CSAM) और पोक्सो अधिनियम की धारा 15 के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय का सबसे महत्वपूर्ण और मार्गदर्शक (Leading) फैसला है।
- मामले की पृष्ठभूमि: मद्रास उच्च न्यायालय ने एक फैसले में कहा था कि यदि कोई व्यक्ति केवल अपने व्यक्तिगत उपयोग के लिए बाल अश्लील सामग्री (Child Pornography) डाउनलोड करता है और उसे देखता है, लेकिन उसे दूसरों के साथ साझा या वितरित नहीं करता, तो यह पोक्सो अधिनियम की धारा 15 के तहत अपराध नहीं है।
- सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालय के इस फैसले को पूरी तरह से खारिज कर दिया। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट व्यवस्था दी कि बच्चों से जुड़ी अश्लील सामग्री (CSAM) को केवल डाउनलोड करना, देखना या अपने फोन/कंप्यूटर में रखना भी पोक्सो अधिनियम की धारा 15 के तहत एक गंभीर और दंडनीय अपराध है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि बच्चों का अश्लील साहित्य के लिए शोषण समाज के लिए एक गंभीर खतरा है, और इसे "केवल व्यक्तिगत उपयोग" कहकर बख्शा नहीं जा सकता।
2. In Re: Prajwala Letter dated 18.2.2015 (Videos of Sexual Violence and Child Pornography) : इस बहुचर्चित मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर बाल यौन शोषण सामग्री और अश्लील वीडियो के प्रसार पर स्वतः संज्ञान लिया था।
- निर्णय: न्यायालय ने गूगल, फेसबुक, माइक्रोसॉफ्ट और अन्य तकनीकी दिग्गजों के साथ-साथ भारत सरकार को सख्त निर्देश दिए कि वे बच्चों से संबंधित अश्लील सामग्री (CSAM) को इंटरनेट से तुरंत हटाने, इसके अपलोड होने पर रोक लगाने और इस संबंध में एक प्रभावी शिकायत प्रणाली स्थापित करने के लिए कड़े कदम उठाएं। न्यायालय ने माना कि धारा 13, 14 और 15 का क्रियान्वयन तभी प्रभावी हो सकता है जब डिजिटल स्पेस में ऐसी सामग्री की उपलब्धता को पूरी तरह से ब्लॉक किया जाए।
