भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 98 "वेश्यावृत्ति (prostitution) या अन्य अनैतिक उद्देश्यों के लिए बच्चे को बेचने" (Selling child for purposes of prostitution, etc.) के अत्यंत जघन्य अपराध को परिभाषित करती है और इसके लिए सख्त सजा का प्रावधान करती है।
यह धारा बच्चों को मानव तस्करी, यौन शोषण और देह व्यापार जैसे अपराधों से बचाने के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण कानूनी ढाल है।
धारा 98 के मुख्य कानूनी प्रावधान:
1. अपराध की प्रकृति और परिस्थितियां: इस कानून के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति किसी बच्चे (child) के साथ निम्नलिखित कृत्य करता है, तो वह अपराधी माना जाएगा:
- बच्चे को बेचना (sells), किराए पर देना (lets to hire), या किसी भी अन्य तरीके से किसी को सौंपना (disposes of)।
- आपराधिक इरादा: यह कार्य इस स्पष्ट इरादे (intent) से किया गया हो कि उस बच्चे का इस्तेमाल (चाहे वह किसी भी उम्र में हो) वेश्यावृत्ति (prostitution), किसी भी व्यक्ति के साथ अवैध यौन संबंध (illicit intercourse), या किसी भी गैरकानूनी और अनैतिक उद्देश्य (unlawful and immoral purpose) के लिए किया जाएगा।
- यदि व्यक्ति का इरादा स्पष्ट न भी हो, लेकिन उसे यह संभावना या जानकारी (knowledge) हो कि बच्चे का इस्तेमाल ऐसे घिनौने कार्यों के लिए किया जा सकता है, तब भी वह इस धारा के तहत समान रूप से दोषी होगा।
2. सजा का प्रावधान: चूंकि यह कृत्य बच्चों के जीवन और गरिमा के खिलाफ एक अत्यंत गंभीर अपराध है, इसलिए कानून में इसके लिए सख्त सजा निर्धारित की गई है:
- इस अपराध के दोषी व्यक्ति को अधिकतम 10 वर्ष तक के कारावास की सजा दी जा सकती है।
- यह कारावास मामले की गंभीरता के आधार पर साधारण या कठोर (imprisonment of either description) किसी भी प्रकार का हो सकता है।
- कारावास के साथ-साथ, अपराधी पर अनिवार्य रूप से जुर्माना (fine) भी लगाया जाएगा।
महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण (Explanations): इस धारा को और अधिक सख्त और स्पष्ट बनाने के लिए इसमें दो महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जोड़े गए हैं:
- स्पष्टीकरण 1 (लड़कियों के मामले में कानूनी धारणा): यदि 18 वर्ष से कम आयु की किसी लड़की (female under the age of eighteen years) को किसी वेश्या (prostitute) या वेश्यालय (brothel) चलाने/प्रबंधित करने वाले व्यक्ति को बेचा या सौंपा जाता है, तो कानून अदालत में यह मानकर चलेगा (presumed) कि उस लड़की को वेश्यावृत्ति के इरादे से ही सौंपा गया है। अपराधी को खुद यह साबित करना होगा कि उसका इरादा यह नहीं था (until the contrary is proved)।
- स्पष्टीकरण 2 ('अवैध यौन संबंध' की परिभाषा): इस धारा के तहत "अवैध यौन संबंध" (illicit intercourse) का अर्थ ऐसे दो व्यक्तियों के बीच यौन संबंध है, जिनकी कानूनी रूप से शादी नहीं हुई है। हालांकि, यदि उनका रिश्ता उनके समुदाय के पर्सनल लॉ या रीति-रिवाजों द्वारा "विवाह के समान" (quasi-marital relation) मान्यता प्राप्त है, तो उसे इस धारा के तहत 'अवैध' नहीं माना जाएगा।
संक्षेप में, यह धारा सीधे तौर पर बच्चों की खरीद-फरोख्त और देह व्यापार के माफियाओं पर चोट करती है और यह सुनिश्चित करती है कि मासूम बच्चों को इस दलदल में धकेलने वाले किसी भी व्यक्ति को 10 साल तक की कड़ी सजा मिले।
