भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 97 "चोरी करने के इरादे से 10 वर्ष से कम आयु के बच्चे का अपहरण या व्यपहरण (Kidnapping or abducting child under ten years of age with intent to steal from its person)" के अपराध और उसकी सजा का प्रावधान करती है।
यह धारा हमारी पिछली चर्चाओं (बच्चों के विरुद्ध अपराधों) का ही एक और महत्वपूर्ण हिस्सा है। अक्सर अपराधी छोटे बच्चों के शरीर पर मौजूद कीमती सामान (जैसे सोने-चांदी के गहने, चेन, आदि) चुराने के लालच में उन्हें अगवा कर लेते हैं, यह कानून विशेष रूप से इसी तरह के अपराधों को लक्षित करता है।
धारा 97 के मुख्य कानूनी प्रावधान:
1. अपराध की प्रकृति और परिस्थितियां: इस धारा के अनुसार, कोई व्यक्ति इस अपराध का दोषी तब माना जाएगा जब वह निम्नलिखित कृत्य करता है:
- बच्चे की उम्र: पीड़ित बच्चा 10 वर्ष से कम आयु का होना चाहिए।
- अपहरण (Kidnapping/Abducting): उस बच्चे का अपहरण या व्यपहरण किया गया हो।
- आपराधिक इरादा (Intention): इस अपहरण का मुख्य उद्देश्य और इरादा उस बच्चे के शरीर से कोई 'चल संपत्ति' (movable property) बेईमानी से (dishonestly) छीनना या चुराना हो।
2. सजा का प्रावधान: चूंकि यह कृत्य छोटे और असहाय बच्चों के खिलाफ किया गया अपराध है, इसलिए कानून में इसके लिए सख्त सजा निर्धारित की गई है:
- कारावास: इस अपराध के दोषी व्यक्ति को अधिकतम 7 वर्ष तक के कारावास की सजा दी जा सकती है।
- कारावास की प्रकृति: अदालत द्वारा दिया जाने वाला यह कारावास मामले की गंभीरता के आधार पर साधारण या कठोर (imprisonment of either description) किसी भी प्रकार का हो सकता है।
- जुर्माना: कारावास की सजा के साथ-साथ, अपराधी पर अनिवार्य रूप से जुर्माना (fine) भी लगाया जाएगा।
संक्षेप में, यह धारा छोटे बच्चों को उन अपराधियों से सुरक्षित करने के लिए बनाई गई है जो महज उनके आभूषणों या अन्य सामानों को चुराने के लिए उनकी जान को जोखिम में डालते हुए उनका अपहरण कर लेते हैं।
