भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 96 "अवैध यौन संबंधों के लिए बच्चे को फुसलाने या प्रेरित करने (Procuration of child)" के गंभीर अपराध और उसके लिए सजा का प्रावधान करती है।
यह धारा हमारी पिछली चर्चा (धारा 95) की ही तरह बच्चों को यौन शोषण और आपराधिक जाल में फंसने से बचाने के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण कानूनी सुरक्षा कवच है।
धारा 96 के मुख्य कानूनी प्रावधान:
1. अपराध की प्रकृति और परिस्थितियां: इस धारा के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति किसी भी तरीके या माध्यम (by any means whatsoever) से निम्नलिखित कृत्य करता है, तो वह इस अपराध का दोषी माना जाएगा:
- किसी बच्चे को किसी स्थान से जाने के लिए फुसलाना या प्रेरित करना (induces any child to go from any place)।
- या, बच्चे को कोई भी ऐसा कार्य करने के लिए प्रेरित करना (to do any act)।
2. आपराधिक इरादा (Criminal Intent): उपर्युक्त कृत्य इस स्पष्ट इरादे (intent) या जानकारी (knowledge) के साथ किया गया होना चाहिए कि उस बच्चे को किसी अन्य व्यक्ति के साथ अवैध यौन संबंध (illicit intercourse) बनाने के लिए या तो मजबूर किया जाएगा (forced) या फिर बहकाया/फुसलाया (seduced) जाएगा।
3. सजा का प्रावधान: चूँकि यह बच्चों के मासूमियत और उनके शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य के खिलाफ एक जघन्य अपराध है, इसलिए इसके लिए सख्त सजा निर्धारित की गई है:
- कारावास: इस अपराध के लिए दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति को अधिकतम 10 वर्ष तक के कारावास की सजा दी जा सकती है।
- जुर्माना: कारावास की सजा के साथ-साथ, ऐसे अपराधी पर अनिवार्य रूप से जुर्माना (fine) भी लगाया जाएगा।
सरल शब्दों में निष्कर्ष: यह धारा उन दलालों, बिचौलियों या अपराधियों पर सख्ती से लागू होती है जो बच्चों को नौकरी का झांसा देकर, बहला-फुसला कर, या किसी भी अन्य तरीके से बरगला कर ऐसी स्थिति या स्थान पर ले जाते हैं जहाँ किसी तीसरे व्यक्ति द्वारा उनका यौन शोषण किया जाना तय होता है। यह कानून स्पष्ट करता है कि केवल यौन शोषण करने वाला ही नहीं, बल्कि उस बच्चे को उस शोषण तक पहुँचाने वाला या फुसलाने वाला व्यक्ति भी 10 साल तक की जेल का हकदार होगा।
