भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 93, "12 वर्ष से कम आयु के बच्चे को उसके माता-पिता या देखभाल करने वाले व्यक्ति द्वारा लावारिस छोड़ने या त्यागने" (Exposure and abandonment of child under twelve years of age, by parent or person having care of it) के अपराध और उसकी सजा का प्रावधान करती है।
यह धारा हमारी पिछली चर्चाओं (धारा 88 से 92, जो भ्रूण या अजन्मे बच्चों से जुड़े अपराधों पर केंद्रित थीं) से आगे बढ़ते हुए, जन्म ले चुके छोटे और असहाय बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है।
धारा 93 के मुख्य कानूनी प्रावधान:
1. अपराध की परिस्थितियां (Conditions for the offence): इस धारा के तहत अपराध तब माना जाता है जब निम्नलिखित शर्तें पूरी होती हैं:
- बच्चे की उम्र: बच्चा 12 वर्ष से कम आयु का होना चाहिए।
- अपराधी कौन हो सकता है: यह अपराध केवल उस व्यक्ति द्वारा किया जा सकता है जो उस बच्चे का पिता (father) है, माता (mother) है, या कोई अन्य व्यक्ति है जिसके पास उस बच्चे की देखभाल (care) की जिम्मेदारी है।
- कृत्य और इरादा: माता-पिता या केयरटेकर द्वारा बच्चे को किसी भी स्थान पर (expose or leave) इस स्पष्ट इरादे (intention) से छोड़ देना कि उसे पूरी तरह से त्याग दिया जाए (wholly abandoning such child)।
2. सजा का प्रावधान: ऐसे निष्ठुर कृत्य के लिए दोषी पाए जाने वाले माता-पिता या देखभाल करने वाले व्यक्ति के लिए कानून में सख्त सजा तय की गई है:
- कारावास: दोषी को अधिकतम 7 वर्ष तक के कारावास की सजा दी जा सकती है। अदालत द्वारा दिया जाने वाला यह कारावास मामले की प्रकृति के आधार पर साधारण या कठोर (imprisonment of either description) किसी भी प्रकार का हो सकता है।
- जुर्माना या दोनों: अपराधी पर केवल जुर्माना (fine) लगाया जा सकता है, या उसे कारावास और जुर्माना दोनों सजाओं से एक साथ दंडित किया जा सकता है।
3. महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण (Explanation - बच्चे की मृत्यु होने पर): इस धारा में एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात (Explanation) स्पष्ट की गई है। इसके अनुसार, यदि इस तरह लावारिस छोड़े जाने के परिणामस्वरूप (in consequence of the exposure) उस बच्चे की मृत्यु हो जाती है, तो यह धारा उस अपराधी पर हत्या (murder) या आपराधिक मानव वध (culpable homicide) का मुकदमा चलाने से नहीं रोकेगी।
सरल शब्दों में, यदि बच्चे को त्यागने के कारण उसकी मौत हो जाती है, तो अपराधी यह बचाव नहीं ले सकता कि उस पर केवल धारा 93 (बच्चे को छोड़ने) के तहत अधिकतम 7 साल की सजा का मुकदमा चलना चाहिए; बल्कि उस पर हत्या या गैर-इरादतन हत्या जैसे अधिक गंभीर अपराधों के तहत मुकदमा चलाया जाएगा और तदनुसार सजा दी जाएगी।
