भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 92 "आपराधिक मानव वध (culpable homicide) की श्रेणी में आने वाले कृत्य द्वारा किसी विकसित अजन्मे बच्चे (quick unborn child) की मृत्यु कारित करने" के अपराध और उसकी सजा से संबंधित है। यह धारा हमारी पिछली चर्चाओं (धारा 88 से 91) की ही तरह अजन्मे बच्चे के जीवन की रक्षा से जुड़ी है।
धारा 92 के मुख्य कानूनी प्रावधान:
1. अपराध की प्रकृति: इस धारा के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति कोई ऐसा कृत्य (act) करता है जिसके परिणामस्वरूप यदि किसी व्यक्ति (जैसे गर्भवती महिला) की मृत्यु हो जाती, तो उस कृत्य को 'आपराधिक मानव वध' (culpable homicide) माना जाता। लेकिन उस कृत्य से महिला की मृत्यु होने के बजाय, उसके गर्भ में पल रहे विकसित बच्चे (quick unborn child) की मृत्यु हो जाती है, तो वह व्यक्ति इस धारा के तहत अपराधी माना जाएगा। यहाँ 'विकसित बच्चा' या 'quick unborn child' से तात्पर्य गर्भावस्था की उस अवस्था से है जब गर्भ में भ्रूण की हलचल महसूस होने लगती है।
कानून में दिया गया उदाहरण (Illustration): इस प्रावधान को स्पष्ट करने के लिए कानून में एक सटीक उदाहरण दिया गया है: मान लीजिए 'A', यह जानते हुए कि उसके कृत्य से एक गर्भवती महिला की मृत्यु होने की पूरी संभावना है, उस पर कोई ऐसा हमला या कृत्य करता है जो 'आपराधिक मानव वध' की कोटि में आता है। इस कृत्य से वह महिला घायल तो होती है लेकिन उसकी मृत्यु नहीं होती; परंतु इस कृत्य के परिणामस्वरूप उस महिला के गर्भ में पल रहे विकसित बच्चे (quick unborn child) की मृत्यु हो जाती है। इस स्थिति में, 'A' इस धारा (धारा 92) में परिभाषित अपराध का दोषी होगा।
2. सजा का प्रावधान: इस गंभीर अपराध के लिए कानून में सख्त सजा निर्धारित की गई है:
- कारावास: दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति को अधिकतम 10 वर्ष तक के कारावास की सजा दी जा सकती है।
- कारावास की प्रकृति: अदालत द्वारा दिया जाने वाला यह कारावास मामले की परिस्थितियों के आधार पर साधारण या कठोर (imprisonment of either description) किसी भी प्रकार का हो सकता है।
- जुर्माना: कारावास की सजा के साथ-साथ, अपराधी पर अनिवार्य रूप से जुर्माना (fine) भी लगाया जाएगा।
