भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 90 एक अत्यंत गंभीर अपराध से संबंधित है, जहाँ गर्भपात (miscarriage) कारित करने के इरादे से किए गए किसी कृत्य के परिणामस्वरूप गर्भवती महिला की मृत्यु हो जाती है।
यह धारा हमारी पिछली चर्चाओं (धारा 88 और 89 - जो गर्भपात कारित करने से संबंधित हैं) का ही विस्तार है और उस दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति के लिए सजा तय करती है जब गर्भपात के अनधिकृत या खतरनाक प्रयास में महिला की जान चली जाती है।
धारा 90 के मुख्य कानूनी प्रावधान:
इस धारा को अपराध की परिस्थितियों, विशेषकर महिला की सहमति (consent) के आधार पर, दो उप-धाराओं में बांटा गया है:
1. गर्भपात के इरादे से किए गए कार्य से महिला की मृत्यु (धारा 90(1)): यदि कोई व्यक्ति किसी गर्भवती महिला (woman with child) का गर्भपात कराने के स्पष्ट इरादे से कोई भी ऐसा कृत्य करता है, और उस कृत्य के परिणामस्वरूप उस महिला की मृत्यु (death of such woman) हो जाती है, तो वह इस धारा के तहत अपराधी माना जाएगा।
- सजा का प्रावधान: ऐसे मामले में दोषी व्यक्ति को अधिकतम 10 वर्ष तक के कारावास की सजा दी जा सकती है। यह कारावास मामले की प्रकृति के अनुसार साधारण या कठोर (either description) हो सकता है। इसके साथ ही अपराधी पर अनिवार्य रूप से जुर्माना (fine) भी लगाया जाएगा।
2. महिला की सहमति के बिना किए गए कृत्य से मृत्यु (धारा 90(2)): यदि उपर्युक्त कृत्य (अर्थात गर्भपात कराने का वह प्रयास जिससे महिला की मृत्यु हो गई) उस गर्भवती महिला की सहमति के बिना (without the consent of the woman) किया गया था, तो कानून इसे और भी अधिक जघन्य अपराध मानता है।
- सजा का कठोर प्रावधान: बिना सहमति के किए गए इस अपराध के लिए दोषी को आजीवन कारावास (Imprisonment for life) की सजा दी जा सकती है। या फिर, न्यायालय मामले की परिस्थितियों को देखते हुए उसे उप-धारा (1) में निर्दिष्ट सजा (यानी 10 वर्ष तक का कारावास) दे सकता है, और इसके साथ जुर्माना भी लागू होगा।
कानून में दिया गया महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण (Explanation): इस धारा में अपराधियों को किसी भी प्रकार के तकनीकी या कानूनी बचाव से रोकने के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण शामिल किया गया है। कानून यह स्पष्ट करता है कि इस अपराध के लिए दोषी ठहराए जाने के लिए यह साबित करना बिल्कुल भी आवश्यक नहीं है कि अपराधी को इस बात की जानकारी थी (should know) कि उसके इस कृत्य से उस महिला की मृत्यु हो सकती है।
सरल शब्दों में, यदि किसी व्यक्ति का इरादा केवल गैर-कानूनी तरीके से गर्भपात कराने का था, लेकिन उसके लापरवाही भरे या खतरनाक कृत्य से महिला की जान चली जाती है, तो वह यह कहकर नहीं बच सकता कि उसका इरादा महिला की हत्या करने का नहीं था या उसे मृत्यु की आशंका नहीं थी। इरादा सिर्फ 'गर्भपात' कराने का होना ही उसे धारा 90 के तहत इस गंभीर सजा का भागीदार बनाने के लिए पर्याप्त है।
