भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 89 महिला की "सहमति के बिना गर्भपात कारित करने" (Causing miscarriage without woman's consent) के अत्यंत गंभीर अपराध और उसके लिए कठोर सजा का प्रावधान करती है। यह धारा सीधे तौर पर हमारी पिछली चर्चा (धारा 88 - गर्भपात कारित करने) से जुड़ी हुई है।
धारा 89 के मुख्य कानूनी प्रावधान:
इस धारा के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति धारा 88 के तहत उल्लिखित अपराध (यानी गर्भपात) किसी गर्भवती महिला की सहमति के बिना (without the consent of the woman) करता है या करवाता है, तो वह इस धारा के तहत अपराधी माना जाएगा।
इस कानून में एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात स्पष्ट की गई है कि इस अपराध की गंभीरता इस बात पर निर्भर नहीं करेगी कि गर्भावस्था किस चरण में थी। चाहे महिला का गर्भ विकसित हो चुका हो (quick with child) या वह गर्भावस्था के शुरुआती चरण में हो (not quick with child), महिला की इच्छा या सहमति के विरुद्ध गर्भपात कराना हर स्थिति में समान रूप से एक जघन्य अपराध माना जाएगा।
सजा का प्रावधान:
चूंकि यह कृत्य एक महिला के शरीर, उसकी स्वतंत्रता और अजन्मे भ्रूण के खिलाफ किया गया एक अत्यंत गंभीर अपराध है, इसलिए इसके लिए कानून में बहुत सख्त सजा तय की गई है:
- आजीवन कारावास: दोषी व्यक्ति को आजीवन कारावास (Imprisonment for life) की सजा दी जा सकती है।
- 10 वर्ष तक की जेल: या फिर, मामले की परिस्थितियों को देखते हुए उसे अधिकतम 10 वर्ष तक के कारावास (जो कि साधारण या कठोर किसी भी प्रकार का हो सकता है) की सजा दी जा सकती है।
- जुर्माना: कारावास की इन दोनों ही स्थितियों में अपराधी पर अनिवार्य रूप से जुर्माना (fine) भी लगाया जाएगा।
संक्षेप में, यह प्रावधान महिलाओं को जबरन गर्भपात और उनके शरीर पर अनचाहे चिकित्सकीय हस्तक्षेप से बचाने के लिए एक बहुत ही मजबूत कानूनी सुरक्षा (Legal Safeguard) प्रदान करता है।
