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Section 88 BNS 2023 : गर्भपात कारित करने" (Causing miscarriage)

 भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 88 "गर्भपात कारित करने" (Causing miscarriage) के अपराध और उसके लिए निर्धारित सजा के प्रावधानों को विस्तार से स्पष्ट करती है। यह प्रावधान भ्रूण और महिलाओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

धारा 88 के मुख्य कानूनी प्रावधान निम्नलिखित हैं:

1. अपराध की प्रकृति: इस धारा के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर (voluntarily) किसी गर्भवती महिला (woman with child) का गर्भपात कराता है, तो उसे इस कृत्य के लिए अपराधी माना जाएगा।

2. अपवाद (Exception - किन परिस्थितियों में यह अपराध नहीं है): कानून में चिकित्सकों को और विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण छूट दी गई है। यदि यह गर्भपात पूरी तरह से सद्भावना (good faith) में किया गया हो और इसका एकमात्र उद्देश्य उस गर्भवती महिला की जान बचाना (saving the life of the woman) हो, तो इस कृत्य को अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जाएगा।

3. सजा का प्रावधान: इस अपराध के लिए सजा की अवधि को गर्भावस्था की स्थिति (stage of pregnancy) के आधार पर दो अलग-अलग भागों में बांटा गया है:

  • सामान्य अवस्था (Woman with child): यदि महिला गर्भवती है, तो दोषी व्यक्ति को अधिकतम 3 वर्ष तक के कारावास की सजा दी जा सकती है। यह कारावास साधारण या कठोर (imprisonment of either description) किसी भी प्रकार का हो सकता है। इसके अलावा, अपराधी पर केवल जुर्माना लगाया जा सकता है, या उसे कारावास और जुर्माना दोनों से दंडित किया जा सकता है।
  • विकसित गर्भ (Quick with child): यदि महिला का गर्भ काफी विकसित हो चुका है (जिस अवस्था में महिला को गर्भ के भीतर भ्रूण की हलचल महसूस होने लगती है, जिसे कानूनी भाषा में 'quick with child' कहा गया है), तो अपराध अधिक गंभीर हो जाता है। ऐसे मामले में दोषी को अधिकतम 7 वर्ष तक के कारावास की सजा दी जा सकती है, और साथ ही उस पर अनिवार्य रूप से जुर्माना (fine) भी लगाया जाएगा।

स्वयं का गर्भपात कराने वाली महिला पर भी लागू (महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण): इस धारा में एक बहुत ही महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण (Explanation) जोड़ा गया है। इसके अनुसार, यदि कोई गर्भवती महिला स्वयं अपना गर्भपात कारित करती है (बिना किसी जान के खतरे जैसी आपातकालीन स्थिति के), तो वह महिला भी इस धारा (धारा 88) के दायरे में आएगी और उसे भी इस अपराध के लिए समान रूप से जवाबदेह माना जाएगा।

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