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Section 5 of the POCSO Act 2012 गुरुतर प्रवेशी लैंगिक हमला (Aggravated Penetrative Sexual Assault)

 अध्याय 2 की धारा 5: गुरुतर प्रवेशी लैंगिक हमला (Aggravated Penetrative Sexual Assault)

लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (POCSO Act) की धारा 5 में 'गुरुतर प्रवेशी लैंगिक हमले' (Aggravated Penetrative Sexual Assault) को विस्तार से परिभाषित किया गया है। यह धारा उन विशेष परिस्थितियों, विश्वास के पदों (positions of trust) या क्रूरताओं को सूचीबद्ध करती है, जिनके तहत किया गया 'प्रवेशी लैंगिक हमला' (जिसे धारा 3 में परिभाषित किया गया है) एक अति-गंभीर (Aggravated) श्रेणी का अपराध बन जाता है।

इस धारा के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति निम्नलिखित में से किसी भी परिस्थिति में बालक पर प्रवेशी लैंगिक हमला करता है, तो उसे "गुरुतर प्रवेशी लैंगिक हमला" कहा जाता है:

1. रक्षक या प्राधिकारी द्वारा किया गया हमला:

  • (क) पुलिस अधिकारी द्वारा: यदि कोई पुलिस अधिकारी थाने की सीमाओं के भीतर, अपनी ड्यूटी के दौरान, या पुलिस अधिकारी के रूप में अपनी पहचान का उपयोग करते हुए किसी बालक पर प्रवेशी लैंगिक हमला करता है।
  • (ख) सशस्त्र बल या सुरक्षा बल के सदस्य द्वारा: यदि इन बलों का कोई सदस्य अपनी तैनाती के क्षेत्र में, ड्यूटी के दौरान, या अपनी पहचान का इस्तेमाल करते हुए ऐसा अपराध करता है।
  • (ग) लोक सेवक (Public Servant) द्वारा: यदि कोई भी सरकारी या लोक सेवक ऐसा अपराध करता है।

2. संस्थाओं के कर्मचारियों या प्रबंधकों द्वारा किया गया हमला:

  • (घ) हिरासत या संरक्षण गृहों में: यदि किसी जेल, रिमांड होम, संरक्षण गृह, या संप्रेक्षण गृह का प्रबंधक या कर्मचारी वहां रह रहे किसी बालक के साथ ऐसा अपराध करता है।
  • (ङ) अस्पताल में: यदि किसी अस्पताल (चाहे वह सरकारी हो या प्राइवेट) का प्रबंधक या कोई कर्मचारी (Staff) वहां किसी बालक पर हमला करता है।
  • (च) शैक्षणिक या धार्मिक संस्थाओं में: यदि किसी स्कूल, शिक्षण संस्थान या धार्मिक संस्था का प्रबंधक या कर्मचारी वहां के किसी बालक पर यह अपराध करता है।
  • (ण) सेवा प्रदाता द्वारा: यदि कोई व्यक्ति, जो बालक को सेवा प्रदान करने वाली किसी संस्था का स्वामी, प्रबंधक या कर्मचारी है, यह अपराध करता है।
  • (त) न्यासी (Trustee) या प्राधिकारी द्वारा: यदि कोई व्यक्ति बालक के न्यासी या प्राधिकारी के पद पर रहते हुए यह कृत्य करता है।

3. पारिवारिक या विश्वास के रिश्तों (Domestic/Fiduciary Relationships) में:

  • (ढ) नातेदार या घरेलू संबंध: यदि हमलावर बालक का रक्त संबंधी, दत्तक (adopted), विवाह या संरक्षकता द्वारा रिश्तेदार है, या उसका पालन-पोषण करने वाला है। यदि वह बालक के माता-पिता के साथ घरेलू संबंध रखता है या बालक के साथ एक ही 'साझी गृहस्थी' (Shared household) में रहता है।

4. क्रूरता, हिंसा और विशेष परिस्थितियों पर आधारित:

  • (छ) सामूहिक हमला (Gang Assault): यदि किसी बालक पर एक से अधिक व्यक्तियों के समूह द्वारा सामान्य आशय (Common intention) से प्रवेशी लैंगिक हमला किया जाता है। (इसमें हर व्यक्ति ऐसे दायी होगा मानो उसने वह कृत्य अकेले किया हो)।
  • (ज) हथियारों का प्रयोग: यदि हमला करते समय घातक आयुध, अग्न्यायुध (firearms), मर्म पदार्थ या संक्षारक पदार्थ (corrosive substances) का इस्तेमाल किया जाता है।
  • (झ) घोर चोट पहुंचाना: यदि हमले से बालक को घोर उपहति (grievous hurt) होती है, या उसके जननांगों (genitals) को क्षति पहुंचती है।
  • (ञ) गंभीर परिणाम उत्पन्न होना: यदि हमले के कारण:
    • बालक शारीरिक या मानसिक रूप से अशक्त (disabled/mentally ill) हो जाता है।
    • बालिका के मामले में, वह गर्भवती (Pregnant) हो जाती है।
    • बालक एचआईवी (HIV) या किसी अन्य प्राणघातक रोग/संक्रमण का शिकार हो जाता है।
    • बालक की मृत्यु हो जाती है।
  • (थ) गर्भावस्था का ज्ञान: यह जानते हुए हमला करना कि बालक (बालिका) पहले से गर्भवती है।
  • (द) हत्या का प्रयास: प्रवेशी लैंगिक हमला करना और उसके साथ बालक की हत्या करने का प्रयत्न करना।
  • (प) निर्वस्त्र करना: बालक को सार्वजनिक रूप से निर्वस्त्र करना या नग्न करके प्रदर्शित करना।
  • (ध) आपदा या दंगों के दौरान: सांप्रदायिक/पंथिक हिंसा या प्राकृतिक आपदा जैसी स्थितियों के दौरान बालक पर हमला करना।

5. पीड़ित की भेद्यता (Vulnerability) और आदतन अपराध:

  • (ट) अशक्तता का लाभ उठाना: बालक की मानसिक या शारीरिक अशक्तता का अनुचित लाभ उठाकर प्रवेशी लैंगिक हमला करना।
  • (ठ) बार-बार अपराध करना: एक ही बालक पर एक से अधिक बार या बार-बार (Repeatedly) यह हमला करना।
  • (ड) 12 वर्ष से कम आयु के बालक के साथ: यदि पीड़ित बालक की आयु 12 वर्ष से कम है।
  • (न) पूर्व दोषसिद्धि (Repeat Offender): यदि अपराधी पहले भी पोक्सो अधिनियम या किसी अन्य कानून के तहत यौन अपराध के लिए दोषसिद्ध (convicted) हो चुका हो।


पोक्सो अधिनियम की धारा 5 (गुरुतर अपराधों) के संदर्भ में भारत के सर्वोच्च न्यायालय के प्रमुख निर्णय (Leading Supreme Court Judgments):

  1. Shatrughna Baban Meshram Vs. State of Maharashtra (2020): यह धारा 5 (गुरुतर प्रवेशी लैंगिक हमला) और धारा 6 (उसके लिए दंड) के तहत एक अत्यंत महत्वपूर्ण मामला है। इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि जब अपराध धारा 5(m) (वर्तमान में धारा 5(ड) - 12 वर्ष से कम आयु के बालक के साथ अपराध) या धारा 5(j)(iv) (वर्तमान में धारा 5(ञ)(iv) - अपराध जिसके परिणामस्वरूप मृत्यु हो जाए) के तहत आता है, तो यह 'दुर्लभ से दुर्लभ' (Rarest of Rare) श्रेणी में आ सकता है। न्यायालय ने अत्यंत छोटी बच्चियों के साथ होने वाले जघन्य गुरुतर यौन अपराधों के लिए मृत्युदंड की पुष्टि करने के लिए सिद्धांत स्थापित किए।

  2. Amanullah & Anr. Vs. State of Bihar (2016): यद्यपि यह निर्णय कई कानूनों के संचयी प्रभाव पर है, लेकिन यह पोक्सो की धारा 5 के तहत 'संरक्षक' (Guardian) या 'शिक्षक' (Teacher) द्वारा विश्वास के पद (Fiduciary Capacity) का दुरुपयोग किए जाने के मामलों में मार्गदर्शक है। सर्वोच्च न्यायालय ने लगातार यह माना है कि जब भी धारा 5 के तहत उल्लिखित श्रेणियों (जैसे शिक्षक, पुलिस, रिश्तेदार) द्वारा अपराध किया जाता है, तो यह समाज के विश्वास पर एक प्रहार है। ऐसे मामलों में न्यायालयों को किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरतनी चाहिए।

  3. Alakh Alok Srivastava Vs. Union of India (2018): इसी जनहित याचिका के परिणामस्वरूप भारत सरकार ने पोक्सो अधिनियम में संशोधन किया था, जिसमें धारा 5 के कई प्रावधानों (जैसे मृत्यु होने पर, या 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के साथ अपराध) को और अधिक सख्त बनाया गया था और धारा 6 में मृत्युदंड (Capital Punishment) को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया। सर्वोच्च न्यायालय ने इस निर्णय में 'गुरुतर (Aggravated)' यौन अपराधों के विरुद्ध न्याय प्रणाली को कठोरता से लागू करने के दिशा-निर्देश दिए थे।

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