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BNS की धारा 62 के तहत सजा की गणना कैसे की जाती है?

 भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 62 के तहत किसी अपराध को करने के 'प्रयास' (Attempt) के लिए सजा की गणना मुख्य अपराध के लिए निर्धारित अधिकतम सजा के आधार पर की जाती है।

सजा की गणना करने के मुख्य नियम इस प्रकार हैं:

  • निश्चित अवधि के कारावास के मामले में: यदि किसी अपराध के लिए एक निश्चित अवधि की सजा तय है, तो उस अपराध के प्रयास के लिए अपराधी को उस मुख्य अपराध के लिए निर्धारित सबसे लंबी सजा की अवधि के आधे (one-half) हिस्से तक की सजा दी जा सकती है।
  • आजीवन कारावास (Life Imprisonment) के मामले में: यदि मुख्य अपराध के लिए आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है, तो इसके प्रयास की सजा की गणना करने के लिए BNS की धारा 6 का उपयोग किया जाता है। धारा 6 के अनुसार, सजा की अवधि के हिस्सों (fractions) की गणना करने के लिए आजीवन कारावास को 20 वर्ष के कारावास के बराबर माना जाता है। इस प्रकार, आजीवन कारावास वाले अपराध के प्रयास के लिए अधिकतम सजा 20 वर्ष का आधा, यानी 10 वर्ष तक हो सकती है।
  • जुर्माने का प्रावधान: कारावास के अलावा, अपराधी पर उस विशिष्ट अपराध के लिए निर्धारित जुर्माना भी लगाया जा सकता है, या फिर उसे कारावास और जुर्माना दोनों से दंडित किया जा सकता है।

यह नियम केवल तब लागू होता है जब उस विशिष्ट अपराध के 'प्रयास' के लिए संहिता में पहले से कोई अलग या स्पष्ट सजा का प्रावधान न किया गया हो।

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