भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 100 "आपराधिक मानव वध" (Culpable Homicide) को विस्तार से परिभाषित करती है। यह मानव जीवन के विरुद्ध अपराधों के अध्याय में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधान है।
आपराधिक मानव वध की परिभाषा: इस धारा के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति कोई ऐसा कार्य (act) करता है जिसके परिणामस्वरूप किसी अन्य व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, तो वह 'आपराधिक मानव वध' का दोषी माना जाएगा, बशर्ते वह कृत्य निम्नलिखित में से किसी एक परिस्थिति के अंतर्गत किया गया हो:
- मृत्यु कारित करने का इरादा: कृत्य स्पष्ट रूप से किसी व्यक्ति की जान लेने (मृत्यु कारित करने) के इरादे (intention of causing death) से किया गया हो।
- घातक चोट पहुँचाने का इरादा: कृत्य किसी व्यक्ति को ऐसी शारीरिक चोट (bodily injury) पहुँचाने के इरादे से किया गया हो, जिसके बारे में यह माना जाता हो कि उससे मृत्यु होने की पूरी संभावना है।
- मृत्यु होने की संभावना का ज्ञान: कृत्य इस ज्ञान (knowledge) के साथ किया गया हो कि उस कार्य के परिणामस्वरूप किसी की मृत्यु होने की संभावना है।
महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण (Explanations): इस धारा को अधिक स्पष्ट और न्यायसंगत बनाने के लिए इसमें तीन बहुत ही महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जोड़े गए हैं:
- स्पष्टीकरण 1 (बीमारी या दुर्बलता से पीड़ित व्यक्ति): यदि कोई व्यक्ति किसी ऐसे व्यक्ति को शारीरिक चोट पहुँचाता है जो पहले से ही किसी विकार, बीमारी या शारीरिक दुर्बलता (disorder, disease or bodily infirmity) से पीड़ित है, और उस चोट के कारण उस बीमार व्यक्ति की मृत्यु जल्दी (accelerates the death) हो जाती है, तो कानून की नजर में यह माना जाएगा कि चोट पहुँचाने वाले व्यक्ति ने ही उसकी मृत्यु कारित की है। अपराधी यह बचाव नहीं ले सकता कि पीड़ित की मृत्यु उसकी बीमारी के कारण हुई।
- स्पष्टीकरण 2 (इलाज की उपलब्धता): जहाँ किसी शारीरिक चोट के कारण मृत्यु हो जाती है, वहाँ चोट पहुँचाने वाले व्यक्ति को ही उस मृत्यु का कारण माना जाएगा, भले ही उचित उपचार और कुशल चिकित्सा (resorting to proper remedies and skilful treatment) का सहारा लेकर उस व्यक्ति की जान बचाई जा सकती थी।
- स्पष्टीकरण 3 (अजन्मे या नवजात बच्चे की मृत्यु): माँ के गर्भ में पल रहे बच्चे (child in the mother’s womb) की मृत्यु कारित करना सीधे तौर पर 'मानव वध' (homicide) नहीं माना जाता है। हालांकि, यदि किसी जीवित बच्चे के शरीर का कोई भी हिस्सा गर्भ से बाहर आ चुका हो (भले ही बच्चे ने अभी तक साँस न ली हो या वह पूरी तरह से पैदा न हुआ हो) और तब उसकी मृत्यु कारित की जाती है, तो यह कृत्य 'आपराधिक मानव वध' (culpable homicide) माना जा सकता है।
कानून में दिए गए उदाहरण (Illustrations): इस अपराध की प्रकृति को समझने के लिए कानून में निम्नलिखित सटीक उदाहरण दिए गए हैं:
- उदाहरण 1: 'A' किसी गड्ढे के ऊपर लकड़ियाँ और घास इस इरादे या ज्ञान के साथ बिछाता है कि इससे किसी की मृत्यु हो सकती है। 'Z' उस जमीन को ठोस मानकर उस पर चलता है, गड्ढे में गिर जाता है और उसकी मृत्यु हो जाती है। यहाँ 'A' ने 'आपराधिक मानव वध' का अपराध किया है।
- उदाहरण 2: 'A' जानता है कि 'Z' एक झाड़ी के पीछे छिपा है, लेकिन 'B' को यह नहीं पता। 'A', 'Z' की मृत्यु कारित करने के स्पष्ट इरादे से 'B' को उस झाड़ी पर गोली चलाने के लिए प्रेरित करता है। 'B' गोली चलाता है और 'Z' मारा जाता है। इस मामले में 'B' किसी अपराध का दोषी नहीं हो सकता है (क्योंकि उसे सच नहीं पता था), लेकिन 'A' ने आपराधिक मानव वध का अपराध किया है।
- उदाहरण 3 (अपवाद स्वरूप स्थिति): 'A' किसी मुर्गे को मारने और चुराने के इरादे से उस पर गोली चलाता है, लेकिन गोली झाड़ी के पीछे खड़े 'B' को लग जाती है और उसकी मौत हो जाती है। ('A' को बिल्कुल नहीं पता था कि 'B' वहाँ मौजूद है)। यहाँ, यद्यपि 'A' एक गैरकानूनी कृत्य (चोरी/गोली चलाना) कर रहा था, फिर भी वह आपराधिक मानव वध का दोषी नहीं है। इसका कारण यह है कि उसका इरादा 'B' को मारने का नहीं था और न ही उसे इस बात का ज्ञान था कि उसके कृत्य से किसी व्यक्ति की मृत्यु हो सकती है।
