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Section 25 to 29 BNS 2023: का विश्लेषण - सहमति का बचाव (Defense of Consent)

 BNS 2023: धारा 25 से 29 तक का विश्लेषण - सहमति का बचाव (Defense of Consent)

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आज हम भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के अध्याय III (General Exceptions) की एक बहुत ही महत्वपूर्ण श्रृंखला—धारा 25 से 29 तक का गहराई से विश्लेषण (detailed analysis) करेंगे।

आपराधिक न्यायशास्त्र (Criminal Jurisprudence) में यह सिद्धांत लैटिन सूत्र "Volenti non fit injuria" (जिसने स्वेच्छा से सहमति दी हो, उसे हुई क्षति कानूनी रूप से चोट नहीं मानी जाती) पर आधारित है। लेकिन कानून हर प्रकार की 'सहमति' (Consent) को मान्यता नहीं देता।

आइए एक Expert Lawyer की तरह इन सभी धाराओं को बिल्कुल क्रमानुसार (serially) और क्लॉज़-वाइज़ डिकोड करते हैं:

धारा 25: सहमति से किया गया कार्य (Consent in General/Sports) - Section 25

  • मूल कानूनी प्रावधान: यदि कोई कार्य किसी व्यक्ति (जिसकी आयु 18 वर्ष से अधिक हो) की सहमति (express or implied) से किया गया है, तो वह अपराध नहीं है, बशर्ते (provided) वह कार्य 'मृत्यु या घोर उपहति' (death or grievous hurt) कारित करने के इरादे से न किया गया हो, और न ही ऐसा होने की जानकारी (knowledge) हो।
  • Practical Example: 'A' और 'Z' मनोरंजन के लिए आपस में तलवारबाज़ी (fencing) का खेल खेलने के लिए सहमत होते हैं। इस सहमति का अर्थ है कि वे खेल के दौरान लगने वाली चोट का जोखिम उठाने को तैयार हैं। यदि बिना किसी बेईमानी (foul play) के खेलते हुए 'A' की तलवार से 'Z' को चोट लग जाती है, तो 'A' ने कोई अपराध नहीं किया है।

धारा 26: व्यक्ति के फायदे के लिए सद्भावपूर्वक किया गया कार्य (Medical Exception for Adults) - Section 26

  • मूल कानूनी प्रावधान: यह धारा मुख्य रूप से डॉक्टरों (Surgeons/Doctors) को कानूनी सुरक्षा (immunity) देती है। यदि किसी व्यक्ति के 'फायदे' (benefit) के लिए 'सद्भावपूर्वक' (in good faith) उसकी सहमति से कोई कार्य किया जाता है, तो उसे अपराध नहीं माना जाएगा, बशर्ते उसमें मृत्यु कारित करने का इरादा (intention to cause death) न हो।
  • Practical Example: एक सर्जन 'A' जानता है कि एक अत्यंत जटिल ऑपरेशन से मरीज 'Z' की जान जा सकती है, लेकिन वह 'Z' को बचाने के उद्देश्य से (सद्भावपूर्वक) 'Z' की सहमति लेकर ऑपरेशन करता है। यदि दुर्भाग्यवश 'Z' की मृत्यु हो जाती है, तो सर्जन 'A' ने कोई अपराध नहीं किया है।

धारा 27: शिशु या विकृतचित्त व्यक्ति के फायदे के लिए संरक्षक की सहमति (Medical Exception for Minors/Unsound Mind) - Section 27

  • मूल कानूनी प्रावधान: यदि मरीज 12 वर्ष से कम आयु (under twelve years of age) का शिशु है या विकृतचित्त (unsound mind) है, तो वह कानूनी रूप से खुद सहमति नहीं दे सकता। ऐसे में उसके 'संरक्षक' (guardian) या वैध प्रभारी की सहमति से उसके फायदे के लिए किया गया कार्य अपराध नहीं होगा।
  • कानूनी अपवाद (Provisos): इस धारा के तहत जानबूझकर मृत्यु कारित करने (intentional causing of death), या केवल मृत्यु/घोर उपहति को टालने के अलावा किसी अन्य कारण से मृत्यु की संभावना वाला काम करने की अनुमति नहीं है।

धारा 28: भय या भ्रम के अधीन दी गई सहमति (Invalid Consent) - Section 28 

यह इस श्रृंखला की सबसे तकनीकी और परीक्षा के दृष्टिकोण से अहम धारा है। कानून मानता है कि 'स्वतंत्र सहमति' (Free Consent) ही वैध है। BNS स्पष्ट करता है कि सहमति (Consent) वैध नहीं मानी जाएगी यदि वह:

  • (a) भय या भ्रम: क्षति के डर (fear of injury) या तथ्य के भ्रम (misconception of fact) में दी गई हो, और कार्य करने वाला यह बात जानता हो।
  • (b) विकृतचित्तता या नशा: पागलपन या नशे (intoxication) के कारण दी गई हो, जहाँ व्यक्ति परिणाम समझने में अक्षम (unable to understand the nature and consequence) हो।
  • (c) शिशु की आयु: जब तक कि संदर्भ से अन्यथा प्रतीत न हो, 12 वर्ष से कम आयु (under twelve years of age) के बच्चे द्वारा दी गई हो।

Court Insight 

सुप्रीम कोर्ट ने Anurag Soni v. State of Chhattisgarh और Pramod Suryabhan Pawar v. State of Maharashtra जैसे ऐतिहासिक मामलों में 'धारा 28' (पुरानी IPC धारा 90) की व्याख्या करते हुए स्पष्ट किया है कि "यदि कोई पुरुष विवाह का झूठा वादा (False promise of marriage) करके किसी महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाता है, तो वह 'तथ्य के भ्रम' (misconception of fact) के तहत प्राप्त की गई सहमति है।" कानून की नजर में यह कोई सहमति नहीं है, और आरोपी पर BNS 2023 की धारा 69 (Sexual intercourse by deceitful means) के तहत मुकदमा चल सकता है। आप अपनी तैयारी के लिए इन जजमेंट्स को स्वतंत्र रूप से verify कर सकते हैं।

धारा 29: ऐसे कार्यों का अपवर्जन जो स्वतंत्र रूप से अपराध हैं (Limits of Consent) - Section 29

  • मूल कानूनी प्रावधान: यह धारा स्पष्ट करती है कि आप किसी ऐसे कृत्य के लिए 'सहमति' नहीं दे सकते जो अपने आप में (independently) समाज के खिलाफ अपराध है।
  • Practical Example: 'गर्भपात कारित करना' (Causing miscarriage) अपने आप में एक अपराध है (जब तक कि वह महिला की जान बचाने के लिए सद्भावपूर्वक न किया गया हो)। भले ही महिला या उसके संरक्षक ने इस कृत्य के लिए अपनी 'सहमति' दे दी हो, फिर भी वह सहमति इस गैरकानूनी कार्य को सही (justify) नहीं ठहरा सकती।

These sections precisely establish the boundaries of human autonomy and consent under Indian criminal law! Keep your concepts crystal clear and keep revising.


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