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Section 210 BNS, 2023 in Hindi: दस्तावेज प्रस्तुत न करने की सजा

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सरकारी अधिकारी को दस्तावेज नहीं दिया तो होगी सजा! जानिए Section 210 BNS, 2023 का पूरा कानून

Introduction

भारतीय न्याय संहिता, 2023 (Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023) की Section 210 ऐसे व्यक्ति द्वारा दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड प्रस्तुत न करने से संबंधित है, जो कानून के अंतर्गत उसे प्रस्तुत करने या सौंपने के लिए बाध्य है। यह प्रावधान लोक सेवक के वैध अधिकार और कानूनी रूप से आवश्यक दस्तावेजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाया गया है।

इस Section में सामान्य स्थिति और न्यायालय में दस्तावेज प्रस्तुत करने की स्थिति के लिए अलग-अलग दंड निर्धारित हैं। सामान्य मामले में अधिकतम एक महीने का साधारण कारावास या ₹5,000 तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। यदि दस्तावेज न्यायालय में प्रस्तुत या सौंपा जाना आवश्यक है, तो अधिकतम छह महीने का साधारण कारावास या ₹10,000 तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

Section 210, Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023.

Exact Text of Section 210 BNS

210. Omission to produce document or electronic record to public servant by person legally bound to produce it.— Whoever, being legally bound to produce or deliver any document or electronic record to any public servant, as such, intentionally omits to produce or deliver the same,—

(a) shall be punished with simple imprisonment for a term which may extend to one month, or with fine which may extend to five thousand rupees, or with both;

(b) where the document or electronic record is required to be produced or delivered in a Court, with simple imprisonment for a term which may extend to six months, or with fine which may extend to ten thousand rupees, or with both.

Meaning and Scope of Section 210 BNS

Section 210 का मुख्य उद्देश्य उन व्यक्तियों को जवाबदेह बनाना है, जो कानूनन किसी लोक सेवक को दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड देने के लिए बाध्य होने के बावजूद जानबूझकर ऐसा नहीं करते।

इस अपराध के लिए केवल दस्तावेज प्रस्तुत न करना पर्याप्त नहीं है। यह भी आवश्यक है कि संबंधित व्यक्ति पर कानून के अनुसार दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड प्रस्तुत करने अथवा सौंपने का दायित्व हो और वह जानबूझकर उस दायित्व का पालन न करे।

इस प्रकार, Section 210 में कानूनी बाध्यता और जानबूझकर की गई चूक दोनों महत्वपूर्ण तत्व हैं। यदि कोई व्यक्ति ऐसा दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करता जिसे देने के लिए वह कानूनी रूप से बाध्य ही नहीं है, तो केवल उस आधार पर इस Section के अंतर्गत अपराध स्थापित नहीं होता।

Section 210, Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023.

Essential Ingredients of Section 210 BNS

Section 210 के अंतर्गत अपराध स्थापित करने के लिए यह दिखाना आवश्यक है कि संबंधित दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड मौजूद है, उसे प्रस्तुत करने या सौंपने का कानूनी दायित्व संबंधित व्यक्ति पर है, दस्तावेज किसी लोक सेवक को उसके आधिकारिक कार्य के संबंध में दिया जाना है और व्यक्ति ने जानबूझकर उसे प्रस्तुत या सुपुर्द नहीं किया।

यदि दस्तावेज न्यायालय में प्रस्तुत या सौंपा जाना आवश्यक है, तो दंड निर्धारित करने के लिए यह तथ्य भी महत्वपूर्ण होगा। न्यायालय में प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेज के मामले में Section 210(b) लागू हो सकता है।

Section 210(a) and Section 210(b), Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023.

Punishment Under Section 210 BNS

Section 210 में दो प्रकार की परिस्थितियों के लिए दंड दिया गया है।

General Case — Section 210(a)

जहाँ कोई व्यक्ति कानूनी रूप से बाध्य होने के बावजूद किसी लोक सेवक को दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड जानबूझकर प्रस्तुत नहीं करता या नहीं सौंपता, वहाँ उसे अधिकतम एक महीने के साधारण कारावास, ₹5,000 तक के जुर्माने या दोनों से दंडित किया जा सकता है।

Section 210(a), Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023.

Document Required by a Court — Section 210(b)

यदि दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड न्यायालय में प्रस्तुत या सौंपा जाना आवश्यक है, तो अधिकतम छह महीने का साधारण कारावास, ₹10,000 तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

इस उपधारा में अधिक कठोर दंड इसलिए निर्धारित है क्योंकि न्यायिक कार्यवाही के लिए आवश्यक दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को जानबूझकर रोकना न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।

Section 210(b), Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023.

Flowchart: How Section 210 BNS Applies

दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड
              ↓
क्या उसे प्रस्तुत करने का कानूनी दायित्व है?
              ↓
        हाँ             नहीं
         ↓               ↓
क्या जानबूझकर        Section 210 के
प्रस्तुत नहीं किया?   तत्व पूरे नहीं
         ↓
   हाँ ────────────────
         ↓
क्या दस्तावेज न्यायालय में
प्रस्तुत किया जाना आवश्यक था?
         ↓
   ┌───────────────┐
   ↓               ↓
 सामान्य मामला    न्यायालय का मामला
 Section 210(a)   Section 210(b)
   ↓               ↓
1 माह तक          6 माह तक
साधारण कारावास    साधारण कारावास
या ₹5,000 तक      या ₹10,000 तक
जुर्माना या दोनों  जुर्माना या दोनों

यह आरेख Section 210 के वैधानिक तत्वों और दंड के बीच अंतर को सरल रूप में दर्शाता है। वास्तविक मामले में कानूनी दायित्व और जानबूझकर की गई चूक के प्रमाण महत्वपूर्ण होंगे।

Section 210, Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023.

Cognizable or Non-cognizable Offence?

BNSS की First Schedule के अनुसार Section 210(a) और Section 210(b) के अंतर्गत अपराध non-cognizable और bailable हैं।

Non-cognizable अपराध में पुलिस को सामान्यतः बिना वारंट गिरफ्तारी करने का अधिकार नहीं होता; जाँच की प्रक्रिया BNSS के लागू प्रावधानों के अनुसार संचालित होती है। Bailable अपराध में जमानत का अधिकार लागू वैधानिक शर्तों के अधीन उपलब्ध होता है।

इस अपराध के विचारण के संबंध में First Schedule यह बताती है कि यदि अपराध न्यायालय में किया गया है, तो संबंधित न्यायालय Chapter XXVIII के प्रावधानों के अधीन कार्यवाही कर सकता है; और यदि अपराध न्यायालय में नहीं किया गया है, तो कोई भी मजिस्ट्रेट इसका विचारण कर सकता है।

First Schedule, Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023—Section 210 BNS.

Practical Examples of Section 210 BNS

मान लीजिए कि किसी लोक सेवक को किसी वैधानिक कार्यवाही के लिए एक व्यक्ति से विशेष दस्तावेज प्राप्त करने का कानूनी अधिकार है और उस व्यक्ति पर दस्तावेज प्रस्तुत करने का कानूनी दायित्व भी है। यदि वह व्यक्ति जानबूझकर दस्तावेज प्रस्तुत करने से इनकार करता है या उसे रोकता है, तो तथ्यों के अनुसार Section 210 लागू हो सकती है।

दूसरी स्थिति में, यदि किसी न्यायालय में चल रही कार्यवाही के दौरान कोई व्यक्ति कानूनी रूप से आवश्यक इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड प्रस्तुत करने के लिए बाध्य है, लेकिन जानबूझकर उसे प्रस्तुत नहीं करता, तो Section 210(b) के अंतर्गत अधिकतम छह महीने के साधारण कारावास या ₹10,000 तक के जुर्माने या दोनों का प्रश्न उत्पन्न हो सकता है।

इन उदाहरणों में निर्णायक बात यह है कि दस्तावेज प्रस्तुत करने का वैधानिक दायित्व वास्तव में मौजूद था और चूक जानबूझकर की गई थी।

Section 210, Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023.

Difference Between Section 210 and Section 211 BNS

Section 210 और Section 211 दोनों दस्तावेजों या सूचना से जुड़े वैधानिक दायित्वों की अवहेलना से संबंधित हैं, लेकिन दोनों का विषय अलग है।

Section 210 उस स्थिति से संबंधित है जिसमें कोई व्यक्ति कानूनी रूप से बाध्य होने के बावजूद दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड प्रस्तुत या सुपुर्द नहीं करता। इसके विपरीत, Section 211 उस व्यक्ति द्वारा लोक सेवक को आवश्यक सूचना या नोटिस न देने से संबंधित है, जो कानूनन ऐसा करने के लिए बाध्य है।

इसलिए दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड प्रस्तुत न करने के मामले में Section 210 और सूचना या नोटिस न देने के मामले में Section 211 के प्रावधानों का परीक्षण किया जाना चाहिए।

Sections 210 and 211, Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023.

Difference Between Section 210 BNS and Old Section 175 IPC

भारतीय दंड संहिता, 1860 (Indian Penal Code, 1860) की Section 175 में उस व्यक्ति द्वारा दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड प्रस्तुत न करने से संबंधित अपराध का प्रावधान था, जो कानूनन उसे किसी लोक सेवक को प्रस्तुत करने के लिए बाध्य था।

वर्तमान Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 की Section 210 इसी विषय से संबंधित है। वर्तमान प्रावधान में सामान्य मामले और न्यायालय में दस्तावेज प्रस्तुत करने के मामले के लिए अलग दंड निर्धारित हैं।

Section 210, Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023; Section 175, Indian Penal Code, 1860.

Conclusion

Section 210 BNS, 2023 उन व्यक्तियों के विरुद्ध दंड का प्रावधान करती है, जो कानूनी रूप से बाध्य होने के बावजूद लोक सेवक को दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड जानबूझकर प्रस्तुत नहीं करते या नहीं सौंपते। सामान्य मामले में अधिकतम एक महीने का साधारण कारावास या ₹5,000 तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। यदि दस्तावेज न्यायालय में प्रस्तुत किया जाना आवश्यक है, तो अधिकतम छह महीने का साधारण कारावास या ₹10,000 तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

इस प्रावधान को लागू करने के लिए कानूनी बाध्यता, जानबूझकर की गई चूक और दस्तावेज के प्रस्तुत किए जाने के उद्देश्य का परीक्षण आवश्यक है।

Related Sections

Section 209 BNS: BNSS की Section 84 के अंतर्गत उद्घोषणा के बाद उपस्थित न होने का अपराध।

Section 211 BNS: कानूनी रूप से बाध्य होने पर भी लोक सेवक को नोटिस या सूचना न देना।

Section 212 BNS: लोक सेवक को जानबूझकर झूठी सूचना देना।

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