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Section 9 of POCSO Act 2012 गुरुतर लैंगिक हमले (Aggravated Sexual Assault)

 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (POCSO Act) की धारा 9 "गुरुतर लैंगिक हमले" (Aggravated Sexual Assault) को बहुत ही विस्तार से परिभाषित करती है.

सरल शब्दों में कहें तो, जब धारा 7 में परिभाषित "लैंगिक हमला" (बिना प्रवेशन के किया गया यौन स्पर्श या शारीरिक संपर्क) कुछ विशेष संवेदनशील परिस्थितियों, रक्षक या विश्वास के पदों पर बैठे व्यक्तियों द्वारा, या क्रूरतापूर्ण तरीकों से किया जाता है, तो वह "गुरुतर लैंगिक हमला" (Aggravated Sexual Assault) बन जाता है.

धारा 9 के तहत निम्नलिखित परिस्थितियों में किए गए लैंगिक हमले को 'गुरुतर लैंगिक हमला' माना गया है:

1. प्राधिकारियों और रक्षकों द्वारा किया गया अपराध:

  • (क) पुलिस अधिकारी द्वारा: यदि कोई पुलिस अधिकारी अपने थाने की सीमा के भीतर, ड्यूटी के दौरान, या पुलिस अधिकारी के रूप में अपनी पहचान का उपयोग करते हुए किसी बालक पर लैंगिक हमला करता है.
  • (ख) सशस्त्र बल या सुरक्षा बल के सदस्य द्वारा: बलों का कोई सदस्य अपनी तैनाती के क्षेत्र में, ड्यूटी के दौरान, या अपनी पहचान का इस्तेमाल करते हुए ऐसा अपराध करता है.
  • (ग) लोक सेवक (Public Servant) द्वारा: यदि कोई लोक सेवक अपने पद का दुरुपयोग करते हुए किसी बालक पर लैंगिक हमला करता है.

2. संस्थानों के प्रबंधन या कर्मचारियों द्वारा किया गया अपराध:

  • (घ) अभिरक्षा या देखरेख गृहों में: किसी जेल, रिमांड होम, संरक्षण गृह, संप्रेक्षण गृह (Observation Home) या कानूनन स्थापित देखरेख संस्थान का प्रबंधक या कर्मचारी वहां रहने वाले किसी बालक पर हमला करता है.
  • (ङ) अस्पताल में: किसी सरकारी या निजी अस्पताल का प्रबंधक या कर्मचारी वहां किसी बालक पर लैंगिक हमला करता है.
  • (च) शैक्षणिक या धार्मिक संस्थाओं में: किसी स्कूल, कॉलेज, शैक्षणिक संस्थान या धार्मिक संस्था का प्रबंधक या कर्मचारी वहां के किसी बालक पर यह अपराध करता है.

3. सामूहिक हमला, हथियारों और गंभीर क्रूरता का उपयोग:

  • (छ) सामूहिक लैंगिक हमला (Gang Sexual Assault): जब एक से अधिक व्यक्तियों के समूह द्वारा सामान्य आशय (Common Intention) से लैंगिक हमला किया जाता है. स्पष्टीकरण के अनुसार, समूह का प्रत्येक व्यक्ति इस प्रकार उत्तरदायी होगा मानो उसने वह कृत्य अकेले किया हो.
  • (ज) घातक हथियारों का प्रयोग: हमला करते समय घातक आयुध (weapons), अग्न्यायुध (firearms), गर्म पदार्थ या संक्षारक पदार्थ (जैसे एसिड) का उपयोग करना.
  • (झ) घोर चोट पहुँचाना: हमले के दौरान बालक को घोर उपहति (grievous hurt), शारीरिक नुकसान या उसके जननांगों को क्षति पहुँचाना.
  • (ञ) गंभीर परिणाम उत्पन्न होना: यदि लैंगिक हमले के कारण:
    • बालक शारीरिक रूप से अशक्त हो जाता है या मानसिक रूप से रोगी हो जाता है या अस्थायी/स्थायी रूप से सामान्य कार्य करने में अक्षम हो जाता है.
    • बालक एचआईवी (HIV) या किसी अन्य प्राणघातक संक्रमण/बीमारी की चपेट में आ जाता है.

4. पीड़ित की भेद्यता (Vulnerability) और पारिवारिक संबंध:

  • (ट) अशक्तता का लाभ उठाना: बालक की मानसिक या शारीरिक अशक्तता (Disability) का फायदा उठाकर लैंगिक हमला करना.
  • (ठ) बार-बार अपराध करना: उसी बालक पर एक से अधिक बार या निरंतर लैंगिक हमला करना.
  • (ड) 12 वर्ष से कम आयु के बालक के साथ: यदि पीड़ित बालक की आयु 12 वर्ष से कम है.
  • (ढ) पारिवारिक या घरेलू संबंध (Domestic/Fiduciary Relations): यदि हमलावर बालक का रक्त संबंधी, दत्तक (adopted), विवाह या संरक्षकता द्वारा रिश्तेदार है, या माता-पिता के साथ घरेलू संबंध रखता है अथवा साझी गृहस्थी (Shared Household) में रहता है.
  • (ण) सेवा प्रदाता द्वारा: बालक को सेवाएं देने वाली किसी संस्था का मालिक, प्रबंधक या कर्मचारी होने के नाते अपराध करना.
  • (त) न्यासी (Trustee) या प्राधिकारी द्वारा: बालक से जुड़े किसी संस्थान या गृह में ट्रस्टी या प्राधिकारी के पद पर रहते हुए अपराध करना.

5. अन्य विशेष गंभीर परिस्थितियां:

  • (थ) गर्भावस्था के दौरान: यह जानते हुए लैंगिक हमला करना कि बालिका पहले से गर्भवती है.
  • (द) हत्या का प्रयास: लैंगिक हमला करने के साथ-साथ बालक की हत्या करने का प्रयत्न करना.
  • (ध) आपदा या दंगों के दौरान: सांप्रदायिक या पंथिक हिंसा, प्राकृतिक आपदा या ऐसी ही किसी गंभीर स्थिति के दौरान बालक पर लैंगिक हमला करना.
  • (न) पूर्व दोषसिद्धि (Repeat Offender): यदि अपराधी पहले भी इस अधिनियम या किसी अन्य कानून के तहत यौन अपराध के लिए दोषी ठहराया जा चुका हो.
  • (प) सार्वजनिक रूप से निर्वस्त्र करना: बालक पर लैंगिक हमला करना और उसे सार्वजनिक रूप से निर्वस्त्र (नग्न) करके प्रदर्शित करना.
  • (फ) शीघ्र लैंगिक परिपक्वता (Early Sexual Maturity) के लिए ड्रग्स देना: (यह 2019 के संशोधन द्वारा जोड़ा गया है) इस आशय से कि कोई बालक जल्दी यौन रूप से परिपक्व हो जाए, उसे कोई दवा, हार्मोन या रासायनिक पदार्थ देना, फुसलाना, प्रपीड़ित करना या देने में सहायता करना.


धारा 9 (गुरुतर लैंगिक हमला) के संदर्भ में भारत के सर्वोच्च न्यायालय के प्रमुख निर्णय (Leading Supreme Court Judgments):

  1. Attorney General for India Vs. Satish & Anr. (2021) - "Skin-to-Skin" Case: यद्यपि यह मामला मूल रूप से धारा 7 (लैंगिक हमला) से संबंधित था, लेकिन यह धारा 9 (गुरुतर लैंगिक हमला) के मामलों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति दुर्भावनापूर्ण और "लैंगिक आशय" (Sexual Intent) से बच्चे को छूता है, चाहे वह कपड़ों के ऊपर से ही क्यों न हो, तो वह 'लैंगिक हमला' माना जाएगा। यदि यह कृत्य धारा 9 में वर्णित किसी भी व्यक्ति (जैसे डॉक्टर, पुलिस, शिक्षक या रिश्तेदार) द्वारा या परिस्थितियों में किया जाता है, तो वह सीधे धारा 9 के तहत 'गुरुतर लैंगिक हमला' की श्रेणी में आएगा।

  2. State of Uttar Pradesh Vs. Pawan Kumar (2022) / उपधारणा का सिद्धांत: सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में पोक्सो अधिनियम की धारा 29 और 30 (कतिपय अपराधों के बारे में न्यायालय की उपधारणा) के लागू होने की व्याख्या की। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जब किसी आरोपी पर धारा 9 (गुरुतर लैंगिक हमला) के तहत मुकदमा चलता है और अभियोजन पक्ष (Prosecution) बच्चे के साथ हुए कृत्य के प्राथमिक तथ्य सिद्ध कर देता है, तो न्यायालय कानूनन यह मानकर चलेगा (Presume) कि आरोपी ने यह कृत्य 'आपराधिक मानसिक दशा' और लैंगिक आशय के साथ ही किया था। इसके बाद खुद को निर्दोष साबित करने की जिम्मेदारी पूरी तरह से आरोपी पर आ जाती है।



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