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Section 42 of POCSO Act 2012 धारा 42: आनुषंगिक दंड (Alternative Punishment)

 धारा 42: आनुषंगिक दंड (Alternative Punishment)

पोक्सो अधिनियम, 2012 के अध्याय 9 (प्रकीर्ण) के अंतर्गत आने वाली धारा 42 एक अत्यंत महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांत को स्थापित करती है. यह धारा उस स्थिति से निपटती है जब अभियुक्त द्वारा किया गया कोई कृत्य पोक्सो कानून और देश के सामान्य आपराधिक कानून (जैसे भारतीय दंड संहिता - IPC) दोनों के तहत एक साथ अपराध की श्रेणी में आता है.

यह धारा दोहरे दंड (Double Jeopardy) के निषेध के संवैधानिक सिद्धांत (अनुच्छेद 20(2)) का सम्मान करते हुए यह सुनिश्चित करती है कि अपराधी को कानून में उपलब्ध सबसे कठोरतम सजा दी जाए.


धारा 42 के विधिक प्रावधानों का संपूर्ण विश्लेषण (Detailed Clause-by-Clause Analysis):

1. ओवरलैपिंग अपराधों का दायरा (Scope of Overlapping Offences):

यदि किसी व्यक्ति का कोई कृत्य (Act) या लोप (Omission) इस अधिनियम (पोक्सो) के अधीन भी एक दंडनीय अपराध है, और साथ ही निम्नलिखित विनिर्दिष्ट कानूनों की धाराओं के तहत भी अपराध गठित करता है:

  • भारतीय दंड संहिता (IPC), 1860 की धाराएं:
    • धारा 166क (लोक सेवक द्वारा कानून के तहत दिए गए निर्देश की अवज्ञा करना).
    • धारा 354क से 354घ (यौन उत्पीड़न, निर्वस्त्र करने के इरादे से हमला, दृश्यरतिकता/Voyeurism, और पीछा करना/Stalking).
    • धारा 370 और 370क (व्यक्तियों का दुर्व्यापार और दुर्व्यापार किए गए बालक का लैंगिक शोषण).
    • धारा 375 और 376 (बलात्संग की परिभाषा और उसके लिए दंड).
    • धारा 376क, 376कख, 376ख, 376ि, 376घ, 376घक, 376घख, और 376ङ (यौन उत्पीड़न और बलात्संग के विभिन्न गुरुतर रूप, जिसमें नाबालिगों से सामूहिक बलात्कार और बार-बार अपराध करने पर मिलने वाले कठोर दंड शामिल हैं).
    • धारा 509 (स्त्री की लज्जा का अनादर करने के आशय से कहे गए शब्द, किए गए अंगविक्षेप या कृत्य).
  • सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम, 2000 की धारा:
    • धारा 67ख (इंटरनेट या डिजिटल माध्यमों पर बच्चों से संबंधित अश्लील सामग्री [CSAM] के प्रकाशन, पारेषण या सृजन से जुड़े अपराध).

2. "गुरुतर दंड" (Greater in Degree of Punishment) का सिद्धांत:

  • मूल कानूनी नियम: यदि कोई अपराधी उपरोक्त दोनों कानूनों (पोक्सो और आईपीसी/आईटी एक्ट) के तहत समान कृत्य के लिए दोषी पाया जाता है, तो उस समय लागू किसी भी अन्य कानून में किसी बात के होते हुए भी, उसे उस कानून के तहत दंडित किया जाएगा जो सजा मात्रा में अधिक गंभीर (गुरुतर / greater in degree) होगी.
  • उदाहरण के लिए: यदि किसी कृत्य के लिए पोक्सो अधिनियम के तहत न्यूनतम 10 वर्ष के कारावास का प्रावधान है और आईपीसी की संबंधित धारा के तहत 7 वर्ष की सजा का प्रावधान है, तो न्यायालय पोक्सो के तहत 10 वर्ष की अधिक गंभीर सजा सुनाएगा.

धारा 42 (आनुषंगिक दंड) पर भारत के सर्वोच्च न्यायालय के अग्रणी निर्णय (Leading Supreme Court Judgments):

1. Shatrughna Baban Meshram Vs. State of Maharashtra (2020) - [धारा 42 और दोहरे दंड के निषेध पर ऐतिहासिक निर्णय]:

  • विधिक प्रश्न: सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष यह मुख्य कानूनी सवाल था कि यदि अभियुक्त का एक ही कृत्य आईपीसी (जैसे धारा 376) और पोक्सो अधिनियम (जैसे धारा 6 - गुरुतर प्रवेशी लैंगिक हमला) दोनों के तहत दंडनीय है, तो क्या न्यायालय दोनों कानूनों के तहत अलग-अलग सजाएं सुनाकर उन्हें एक साथ चला सकता है?
  • सर्वोच्च न्यायालय की व्यवस्था: न्यायालय ने पोक्सो अधिनियम की धारा 42 की विस्तृत व्याख्या करते हुए स्पष्ट किया कि:
    1. यदि कोई कृत्य आईपीसी और पोक्सो दोनों के तहत अपराध है, तो आरोपी को केवल उसी कानून के तहत सजा दी जाएगी जिसमें सजा का प्रावधान अधिक गंभीर (greater in degree) है.
    2. अदालतें अभियुक्त को आईपीसी और पोक्सो दोनों के तहत अलग-अलग संचयी सजा (Cumulative Punishment) नहीं दे सकतीं, क्योंकि यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 20(2) (दोहरे दंड के खिलाफ अधिकार) का उल्लंघन होगा. सजा केवल एक ही अधिनियम के तहत लागू की जाएगी, जो अधिक कठोर हो.

2. State of Uttar Pradesh Vs. Pawan Kumar (2022) - [गुरुतर दंड के निर्धारण का न्यायिक मानक]:

  • निर्णय: इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने दोहराया कि धारा 42 का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चों के खिलाफ होने वाले जघन्य अपराधों में अभियोजन कमजोर न पड़े. यदि पोक्सो के कड़े प्रावधानों के तहत न्यूनतम अनिवार्य सजा सामान्य आईपीसी की तुलना में अधिक है, तो विशेष न्यायालय पोक्सो के तहत ही सजा अधिरोपित करेगा. न्यायाधीशों को सजा तय करते समय दोनों अधिनियमों के दंडात्मक प्रावधानों की तुलना करनी चाहिए और जो सजा आरोपी के लिए अधिक गंभीर हो, उसे ही लागू किया जाना चाहिए.


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