धारा 16: किसी अपराध का दुष्प्रेरण (Abetment of an offence)
पोक्सो अधिनियम, 2012 का अध्याय 4 किसी अपराध के दुष्प्रेरण (Abetment/उकसाने या सहायता करने) और उसे करने के प्रयास से संबंधित है। इस अध्याय की धारा 16 कानूनी रूप से यह परिभाषित करती है कि इस अधिनियम के तहत किसी अपराध का दुष्प्रेरण कब और कैसे गठित होता है।
यह धारा किसी मुख्य अपराधी के साथ-साथ उन लोगों को भी कानून के दायरे में लाती है जो प्रत्यक्ष रूप से अपराध नहीं करते, लेकिन अपराध को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
धारा 16 के तहत दुष्प्रेरण के तीन तरीके (Three Modes of Abetment):
कोई व्यक्ति किसी अपराध के किए जाने का दुष्प्रेरण तब करता है, जब वह:
- उकसाता है (Instigates): वह उस अपराध को करने के लिए किसी अन्य व्यक्ति को उकसाता (उत्तेजित या प्रेरित करता) है।
- षड्यंत्र में शामिल होता है (Engages in Conspiracy): वह उस अपराध को करने के लिए किसी षड्यंत्र में एक या अधिक अन्य व्यक्तियों के साथ सम्मिलित होता है, बशर्ते उस षड्यंत्र के अनुसरण में और उस अपराध को करने के उद्देश्य से कोई कार्य या अवैध लोप (illegal omission) घटित हुआ हो।
- साशय सहायता करता है (Intentionally Aids): वह उस अपराध के किए जाने में किसी कार्य या अवैध लोप द्वारा जानबूझकर (साशय) सहायता प्रदान करता है।
धारा 16 के तीन महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण (Explanations):
दुष्प्रेरण के दायरे को और अधिक स्पष्ट और व्यापक बनाने के लिए इस धारा में तीन स्पष्टीकरण जोड़े गए हैं:
- स्पष्टीकरण 1 (दुर्व्यपदेशन या छिपाव): यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर झूठे प्रतिनिधित्व (दुर्व्यपदेशन/misrepresentation) द्वारा या किसी ऐसे तात्विक तथ्य (material fact) को छिपाकर जिसे प्रकट करने के लिए वह कानूनी रूप से आबद्ध है, स्वेच्छा से कोई अपराध करवाता है या करवाने का प्रयत्न करता है, तो कानूनन यह माना जाएगा कि उसने उस अपराध को करने के लिए उकसाया है।
- स्पष्टीकरण 2 (अपराध को सुकर बनाना): जो कोई व्यक्ति किसी अपराध के होने से पूर्व या होने के समय, उस कार्य को आसान (सुकर/facilitate) बनाने के लिए कोई कदम उठाता है, तो यह माना जाएगा कि उसने उस कार्य को करने में सहायता की है।
- स्पष्टीकरण 3 (बालकों के संदर्भ में विशेष सुरक्षा): यह स्पष्टीकरण विशेष रूप से बच्चों के शोषण को रोकने के लिए तैयार किया गया है। इसके अनुसार, यदि कोई व्यक्ति किसी बालक को इस अधिनियम के तहत किसी अपराध के प्रयोजन के लिए:
- धमकी, बल प्रयोग या प्रपीड़न (coercion) के किसी अन्य रूप द्वारा,
- अपहरण (abduction), कपट (fraud), या प्रलोभन (deception) द्वारा,
- अपनी शक्ति या स्थिति के दुरुपयोग द्वारा,
- बालक की लाचारी/भेद्यता (vulnerability) का लाभ उठाकर, या
- बालक पर नियंत्रण रखने वाले किसी व्यक्ति (जैसे माता-पिता या संरक्षक) को धन या कोई अन्य फायदा देकर उसकी सहमति प्राप्त करता है, और फिर उस बालक को नियोजित करता है, आश्रय देता है या प्राप्त करता है, तो यह माना जाएगा कि उसने उस अपराध के होने में सहायता की है।
दुष्प्रेरण (Section 16) पर भारत के सर्वोच्च न्यायालय का प्रमुख निर्णय (Leading Supreme Court Judgment):
1. State of Maharashtra Vs. Bandu @ Shripad Budhe (2018) - [दुष्प्रेरण और सक्रिय संलिप्तता पर अग्रणी मामला]:
- तथ्य और निर्णय: इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने पोक्सो अधिनियम के तहत दुष्प्रेरण (धारा 16) और प्रयत्न (धारा 18) के सिद्धांतों की विस्तृत व्याख्या की। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि बाल यौन शोषण के मामलों में केवल वही व्यक्ति दोषी नहीं है जिसने शारीरिक रूप से कृत्य किया है, बल्कि वे सभी लोग जो अपराधी को बच्चे तक पहुंच प्रदान करते हैं, कमरे की व्यवस्था करते हैं, बच्चे को डराते-धमकाते हैं, या माता-पिता को प्रलोभन देकर बच्चे को सौंपने के लिए मजबूर करते हैं, वे सभी धारा 16 के तहत दुष्प्रेरण के समान रूप से उत्तरदायी हैं। न्यायालय ने माना कि धारा 17 के तहत दुष्प्रेरण की सजा उतनी ही गंभीर होगी जितनी कि मुख्य अपराध के लिए निर्धारित है।
