धारा 15: बालकों को संलिप्त करने वाली अश्लील सामग्री के भंडारण के लिए दंड (Punishment for storage of child pornographic material)
पोक्सो अधिनियम, 2012 का अध्याय 3 बालकों के अश्लील शोषण से संबंधित है. इस अध्याय की धारा 15 विशेष रूप से बाल यौन शोषण सामग्री (Child Sexual Abuse Material - CSAM) या बालकों को संलिप्त करने वाली अश्लील सामग्री के भंडारण (Storage), रखने, संचरण (Transmission) और व्यावसायिक उपयोग के लिए दंड का निर्धारण करती है.
वर्ष 2019 के संशोधन (अधिनियम संख्यांक 25, प्रभावी तिथि 16.08.2019) द्वारा इस धारा को पूरी तरह से प्रतिस्थापित कर कड़े और श्रेणीबद्ध दंडों का प्रावधान किया गया है.
धारा 15 के विस्तृत विधिक प्रावधान:
धारा 15 के अंतर्गत अपराध और दंड को तीन विशिष्ट श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है:
1. साझा या पारेषित करने के आशय से भंडारण और रिपोर्ट न करना (धारा 15(1)):
- अपराध: यदि कोई व्यक्ति बालक संबंधी अश्लील सामग्री को किसी अन्य व्यक्ति के साथ साझा (share) या पारेषित (transmit) करने के आशय से अपने पास रखता है या उसका भंडारण करता है, और वह:
- उसे मिटाने (delete) या नष्ट करने में असफल रहता है, अथवा
- अधिनियम के तहत विहित किए गए प्राधिकारी को इसकी रिपोर्ट करने में विफल रहता है.
- दंड:
- प्रथम अपराध की दशा में: न्यूनतम पांच हजार (5,000) रुपये का जुर्माना.
- दूसरे या पश्चात्त्वर्ती अपराध की दशा में: न्यूनतम दस हजार (10,000) रुपये का जुर्माना.
2. अश्लील सामग्री का संचरण, प्रदर्शन या वितरण करना (धारा 15(2)):
- अपराध: यदि कोई व्यक्ति कानूनी रिपोर्टिंग के प्रयोजन अथवा न्यायालय में साक्ष्य (evidence) के रूप में उपयोग करने के अतिरिक्त, किसी भी समय और किसी भी तरीके से ऐसी सामग्री का पारेषण (transmission), प्रदर्शन (exhibition), प्रचार (promotion) या वितरण (distribution) करता है.
- दंड: दोषी पाए जाने पर उसे किसी भी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन (3) वर्ष तक की हो सकती है, या जुर्माने से, अथवा दोनों से दंडित किया जाएगा.
3. वाणिज्यिक प्रयोजनों के लिए भंडारण करना (धारा 15(3)):
- अपराध: यदि कोई व्यक्ति व्यावसायिक या वाणिज्यिक उद्देश्यों (Commercial purposes/लाभ कमाने के लिए) के लिए बालकों से जुड़ी अश्लील सामग्री का भंडारण करता है या उसे अपने पास रखता है.
- दंड:
- पहली दोषसिद्धि पर: न्यूनतम तीन (3) वर्ष का कारावास (जो पांच (5) वर्ष तक का हो सकेगा), या जुर्माना, या दोनों.
- दूसरी और पश्चात्त्वर्ती दोषसिद्धि की दशा में: न्यूनतम पांच (5) वर्ष का कठोर कारावास (जो सात (7) वर्ष तक का हो सकेगा), और साथ ही वह जुर्माने का भी दायी होगा.
धारा 15 (CSAM भंडारण और प्रसार) पर भारत के सर्वोच्च न्यायालय के प्रमुख निर्णय (Leading Supreme Court Judgments):
1. Just Rights for Children Alliance Vs. S. Harish & Anr. (2024) - [धारा 15 पर सबसे ऐतिहासिक और मील का पत्थर निर्णय]:
- तथ्य और विवाद: इस मामले में मद्रास उच्च न्यायालय ने फैसला दिया था कि यदि कोई व्यक्ति केवल व्यक्तिगत रूप से अपने फोन या कंप्यूटर पर बाल अश्लील सामग्री (CSAM) डाउनलोड करता है या देखता है, और उसे दूसरों के साथ साझा (Share) नहीं करता, तो वह पोक्सो की धारा 15 के तहत अपराधी नहीं माना जा सकता।
- सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय: मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने मद्रास उच्च न्यायालय के फैसले को पूरी तरह खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक व्यवस्था देते हुए स्पष्ट किया कि बालकों से जुड़ी अश्लील सामग्री को केवल अपने पास रखना, डाउनलोड करना या देखना भी पोक्सो अधिनियम की धारा 15 के तहत एक दंडनीय अपराध है। न्यायालय ने माना कि व्यक्तिगत उपभोग (personal consumption) भी उस आपराधिक तंत्र को जीवित रखता है जहाँ बच्चों का यौन शोषण (धारा 13/14) किया जाता है। अतः इसे 'निजता' या 'व्यक्तिगत उपयोग' के बहाने छूट नहीं दी जा सकती।
2. In Re: Prajwala Letter dated 18.2.2015 (2020) - [इंटरनेट से ऐसी सामग्री हटाने का दायित्व]:
- निर्णय: इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इंटरनेट पर बच्चों के खिलाफ होने वाले यौन अपराधों और वीडियो के प्रसार पर अंकुश लगाने के लिए कड़े कदम उठाए थे। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि धारा 15 के तहत अवैध भंडारण और पारेषण को रोकने के लिए गूगल, फेसबुक, यूट्यूब जैसी बड़ी तकनीकी कंपनियों (Intermediaries) का यह कानूनी दायित्व है कि वे अपने प्लेटफॉर्म पर ऐसी किसी भी आपत्तिजनक सामग्री को अपलोड होने से रोकें और उसे तुरंत ब्लॉक करें।
