धारा 14: अश्लील प्रयोजनों के लिए बालक के उपयोग के लिए दंड (Punishment for use of child for pornographic purposes)
पोक्सो अधिनियम, 2012 की धारा 14 उन अपराधियों के लिए सजा का निर्धारण करती है जो धारा 13 के तहत बच्चों का अश्लील प्रयोजनों (Pornographic purposes) के लिए उपयोग करते हैं.
वर्ष 2019 के संशोधन (अधिनियम संख्यांक 25, प्रभावी तिथि 16.08.2019) द्वारा इस धारा को पूरी तरह से प्रतिस्थापित कर सजा को अधिक कठोर और संचयी (cumulative) बनाया गया है.
धारा 14 के विधिक प्रावधान:
1. पहली बार अपराध करने पर दंड (धारा 14(1)):
- यदि कोई व्यक्ति पहली बार अश्लील प्रयोजनों के लिए किसी बालक या बालकों का उपयोग (धारा 13 के तहत) करता है, तो उसे न्यूनतम पांच (5) वर्ष के कारावास से दंडित किया जाएगा, और वह जुर्माने का भी दायी होगा.
2. दूसरी या पश्चात्त्वर्ती बार अपराध करने पर दंड (धारा 14(1)):
- यदि कोई व्यक्ति दूसरी बार या उसके बाद पुनः यही अपराध करता है, तो उसे न्यूनतम सात (7) वर्ष के कारावास से दंडित किया जाएगा, और वह जुर्माने के लिए भी दायी होगा.
3. प्रत्यक्ष भागीदारी और संचयी दंड (Cumulative Punishment) (धारा 14(2)):
यह इस धारा का सबसे सख्त हिस्सा है, जो अपराधी को दोहरे दंड के दायरे में लाता है:
- यदि कोई अभियुक्त अश्लील प्रयोजनों के लिए बालक का उपयोग करते हुए, ऐसे अश्लील कृत्यों में प्रत्यक्ष रूप से भाग लेता है (directly participates) और ऐसा करते हुए वह अधिनियम के तहत निम्नलिखित गंभीर अपराधों में से कोई अपराध करता है:
- धारा 3 (प्रवेशी लैंगिक हमला)
- धारा 5 (गुरुतर प्रवेशी लैंगिक हमला)
- धारा 7 (लैंगिक हमला)
- धारा 9 (गुरुतर लैंगिक हमला)
- तो उसे धारा 14(1) के तहत मिलने वाले दंड के अतिरिक्त (in addition to), क्रमशः निम्नलिखित धाराओं के तहत भी अलग से दंडित किया जाएगा:
- धारा 4 (प्रवेशी लैंगिक हमले के लिए दंड)
- धारा 6 (गुरुतर प्रवेशी लैंगिक हमले के लिए दंड)
- धारा 8 (लैंगिक हमले के लिए दंड)
- धारा 10 (गुरुतर लैंगिक हमले के लिए दंड)
इसका अर्थ यह है कि यदि आरोपी स्वयं कैमरे के सामने बच्चे के साथ यौन कृत्य (यौन हमला या प्रवेशन) करता है, तो उसे अश्लील सामग्री निर्माण (धारा 14) की सजा तो मिलेगी ही, साथ ही उस पर हुए शारीरिक हमले (जैसे धारा 4 या 6) की सजा भी अलग से और संचयी रूप से लागू होगी.
धारा 14 और बाल यौन शोषण पर भारत के सर्वोच्च न्यायालय के प्रमुख निर्णय (Leading Supreme Court Judgments):
1. Just Rights for Children Alliance Vs. S. Harish & Anr. (2024) - [बाल अश्लील सामग्री के व्यावसायिक और व्यक्तिगत चक्र पर ऐतिहासिक निर्णय]:
- निर्णय: सर्वोच्च न्यायालय ने बाल अश्लील सामग्री (CSAM) के विरुद्ध इस ऐतिहासिक मामले में स्पष्ट किया कि बच्चों का अश्लील प्रयोजनों के लिए उपयोग करना उनके गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार का गंभीर उल्लंघन है। न्यायालय ने व्यवस्था दी कि बाल अश्लील सामग्री को देखना, डाउनलोड करना या उसका भंडारण करना भी उस पूरे पारिस्थितिकी तंत्र (ecosystem) को बढ़ावा देता है जिसके तहत बच्चों का धारा 13 और 14 के अनुसार अश्लील प्रयोजनों के लिए शोषण किया जाता है। न्यायालय ने ऐसी सामग्री को सहेजने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।
2. In Re: Prajwala (2015) - [इंटरनेट पर बच्चों के अश्लील प्रदर्शन को रोकने के निर्देश]:
- निर्णय: इस मार्गदर्शक मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों के यौन उत्पीड़न और अश्लील प्रदर्शन वाले वीडियो के प्रसार पर गहरा संज्ञान लिया था। न्यायालय ने माना कि धारा 14 के तहत सजा को प्रभावी बनाने के लिए तकनीकी बिचौलियों (Intermediaries) का यह दायित्व है कि वे अपने नेटवर्क से ऐसी किसी भी आपत्तिजनक सामग्री को तुरंत हटाएं, जो बच्चों को अश्लील कृत्य में शामिल करती है, ताकि बाल यौन शोषण के इस गंभीर अपराध को डिजिटल स्पेस में जड़ से खत्म किया जा सके।
