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Section 13 of POCSO Act 2012 अश्लील प्रयोजनों के लिए बालक का उपयोग (Use of child for pornographic purposes)

 धारा 13: अश्लील प्रयोजनों के लिए बालक का उपयोग (Use of child for pornographic purposes)

लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (POCSO Act) के अध्याय 3 के अंतर्गत धारा 13 बालकों को अश्लील (Pornographic) गतिविधियों में धकेले जाने और उनके शोषण को रोकने के लिए कानूनी रूप से परिभाषित ढांचा प्रदान करती है. यह धारा इस प्रकार के अपराधों के दायरे को अत्यंत व्यापक बनाती है ताकि अपराधियों को किसी भी तकनीकी खामी का लाभ न मिल सके.


धारा 13 के मुख्य विधिक प्रावधान:

  1. अपराध का गठन: यदि कोई भी व्यक्ति किसी बालक का उपयोग किसी भी रूप या प्ररूप (form) में लैंगिक परितोष (Sexual gratification) के प्रयोजनों के लिए करता है, तो वह इस अपराध का दोषी माना जाएगा.
  2. माध्यमों का दायरा: इसके अंतर्गत मीडिया के सभी रूपों को शामिल किया गया है, चाहे वह:
    • टेलीविजन चैनल (Television Channels) हों,
    • इन्टरनेट (Internet) हो,
    • कोई अन्य इलेक्ट्रॉनिक प्ररूप (Electronic Form) हो, या
    • कोई मुद्रित प्ररूप (Printed Form) हो.
  3. व्यक्तिगत बनाम वितरण का उद्देश्य: कानून स्पष्ट करता है कि यह अपराध तब भी गठित होगा जब ऐसे प्रसारित कार्यक्रमों या विज्ञापनों का आशय व्यक्तिगत उपयोग के लिए हो अथवा वितरण (distribution) के लिए.
  4. शामिल किए गए विशिष्ट कृत्य: धारा 13 के तहत निम्नलिखित तीन प्रकार के कृत्यों को बाल यौन शोषण और अश्लील उपयोग की श्रेणी में रखा गया है:
    • (क) किसी बालक की जननेन्द्रियों (Genitals) का प्रदर्शन करना.
    • (ख) किसी बालक का उपयोग वास्तविक या नकली लैंगिक कार्यों (चाहे वह प्रवेशन/Penetration के साथ हो या प्रवेशन के बिना) में करना.
    • (ग) किसी बालक का कोई भी अशोभनीय (indecent) या अश्लीलतापूर्ण प्रदर्शन (Obscene representation) करना.

धारा 13 का महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण (Explanation):

इस धारा के उद्देश्यों को और अधिक स्पष्ट करने के लिए अधिनियम में एक व्यापक स्पष्टीकरण जोड़ा गया है. इसके अनुसार, "किसी बालक का उपयोग" पद के अंतर्गत केवल बच्चे का प्रत्यक्ष शारीरिक रूप से उपस्थित होना ही अनिवार्य नहीं है, बल्कि यदि अश्लील सामग्री को:

  • तैयार करने (creating),
  • उत्पादन करने (producing),
  • प्रस्थापित करने (presenting),
  • पारेषित करने (transmitting),
  • प्रकाशित करने (publishing),
  • सुकर बनाने (facilitating), या
  • वितरित करने (distributing) के लिए मुद्रण, इलेक्ट्रॉनिक, कंप्यूटर या किसी अन्य आधुनिक तकनीक के किसी भी माध्यम से बालक को अंतर्वलित (involve) किया जाता है, तो उसे भी इस धारा के तहत "बालक का उपयोग" माना जाएगा और आरोपी को दोषी ठहराया जाएगा.


धारा 13 पर भारत के सर्वोच्च न्यायालय के प्रमुख निर्णय (Leading Supreme Court Judgments):

1. Just Rights for Children Alliance Vs. S. Harish & Anr. (2024) - [बाल अश्लील सामग्री पर ऐतिहासिक निर्णय]:

  • विवरण: यह माननीय सर्वोच्च न्यायालय का सबसे हालिया और मील का पत्थर साबित होने वाला निर्णय है जो पोक्सो अधिनियम की धारा 13 और 15 के संयुक्त प्रभाव से संबंधित है। न्यायालय ने मद्रास उच्च न्यायालय के उस आदेश को पूरी तरह से रद्द कर दिया जिसमें कहा गया था कि केवल व्यक्तिगत रूप से बाल अश्लील सामग्री (CSAM) डाउनलोड करना या देखना अपराध नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट व्यवस्था दी कि बाल अश्लील सामग्री का निर्माण, संचरण और यहाँ तक कि व्यक्तिगत रूप से भंडारण या उसे देखना भी पोक्सो के तहत गंभीर अपराध है क्योंकि यह बच्चों के शोषण और उनके अश्लील उपयोग (धारा 13) के चक्र को बढ़ावा देता है।

2. In Re: Prajwala Letter dated 18.2.2015 (Videos of Sexual Violence and Child Pornography) - [ऑनलाइन प्रसार पर प्रतिबंध]:

  • विवरण: इस ऐतिहासिक मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर बाल यौन शोषण सामग्री और अश्लील वीडियो के बढ़ते ऑनलाइन प्रसार का स्वतः संज्ञान लिया था। न्यायालय ने माना कि धारा 13 और स्पष्टीकरण के तहत तकनीकी माध्यमों (जैसे कंप्यूटर और इंटरनेट) से बच्चों को अश्लील सामग्रियों में अंतर्वलित करना प्रतिबंधित है। कोर्ट ने भारत सरकार और प्रमुख तकनीकी कंपनियों (इंटरमीडियरीज) को सख्त निर्देश दिए कि वे ऐसी सामग्रियों को डिजिटल स्पेस से तुरंत ब्लॉक करने और अपराधियों की पहचान करने के लिए विशेष तंत्र स्थापित करें।


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