धारा 4 — संरक्षण अधिकारी को सूचना तथा सूचना देने वाले व्यक्ति की दायित्व-मुक्ति
Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005 की धारा 4 का उद्देश्य घरेलू हिंसा की जानकारी को केवल पीड़ित महिला तक सीमित न रखकर किसी भी ऐसे व्यक्ति को सूचना देने का अधिकार देना है जिसे घरेलू हिंसा होने, हो रही होने या होने की संभावना का कारण हो। साथ ही, सद्भावना से सूचना देने वाले व्यक्ति को दीवानी या आपराधिक दायित्व से सुरक्षा दी गई है।
धारा 4 का वैधानिक प्रावधान
धारा 4 का शीर्षक है “Information to Protection Officer and exclusion of liability of informant”।
धारा 4(1) के अनुसार, कोई भी व्यक्ति, जिसे यह विश्वास करने का कारण हो कि घरेलू हिंसा का कोई कार्य किया गया है, किया जा रहा है या किए जाने की संभावना है, उसके संबंध में संबंधित Protection Officer (संरक्षण अधिकारी) को सूचना दे सकता है। [DV Act, 2005, s.4(1)]
धारा 4(2) सूचना देने वाले व्यक्ति को महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रदान करती है। इसके अनुसार, धारा 4(1) के उद्देश्य से सद्भावना में सूचना देने वाले किसी व्यक्ति पर उस सूचना को देने के कारण कोई civil या criminal liability नहीं आएगी। [DV Act, 2005, s.4(2)]
“कोई भी व्यक्ति” का क्या अर्थ है
धारा 4(1) में Legislature ने “Any person” शब्द का प्रयोग किया है। इसलिए सूचना देने का अधिकार केवल aggrieved person अर्थात् पीड़ित महिला तक सीमित नहीं है।
उदाहरण के लिए, पड़ोसी, रिश्तेदार, मित्र, सामाजिक कार्यकर्ता या कोई अन्य व्यक्ति, जिसे घरेलू हिंसा के संबंध में पर्याप्त कारण से जानकारी प्राप्त हुई है, Protection Officer को सूचना दे सकता है।
यह धारा विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि घरेलू हिंसा अक्सर घर की चारदीवारी के भीतर होती है और पीड़िता स्वयं भय, दबाव, आर्थिक निर्भरता या पारिवारिक परिस्थितियों के कारण तत्काल शिकायत नहीं कर पाती।
सूचना कब दी जा सकती है
धारा 4(1) तीन परिस्थितियों को स्पष्ट रूप से कवर करती है।
पहली स्थिति तब है जब घरेलू हिंसा हो चुकी है।
दूसरी स्थिति तब है जब घरेलू हिंसा वर्तमान में हो रही है।
तीसरी स्थिति तब है जब घरेलू हिंसा होने की संभावना है।
इसलिए धारा 4 केवल past violence की reporting तक सीमित नहीं है। यदि किसी व्यक्ति के पास यह कारण है कि घरेलू हिंसा आगे होने वाली है, तब भी Protection Officer को सूचना दी जा सकती है। [DV Act, 2005, s.4(1)]
क्या सूचना केवल लिखित रूप में देनी होती है
नहीं। मूल अधिनियम की धारा 4(1) सूचना देने के माध्यम को सीमित नहीं करती। Protection of Women from Domestic Violence Rules, 2006 का Rule 4 इस प्रक्रिया को स्पष्ट करता है।
Rule 4(1) के अनुसार, सूचना संबंधित क्षेत्र के Protection Officer को मौखिक या लिखित, दोनों रूपों में दी जा सकती है।
यदि सूचना मौखिक रूप से दी जाती है, तो Rule 4(2) के अनुसार Protection Officer को उसे लिखित रूप में दर्ज करना होगा और सूचना देने वाले व्यक्ति के हस्ताक्षर लेने होंगे। यदि informant ऐसी लिखित सूचना देने की स्थिति में नहीं है, तो Protection Officer को उसकी पहचान के संबंध में संतुष्ट होकर उसका रिकॉर्ड रखना होगा।
Rule 4(3) के अनुसार, Protection Officer द्वारा दर्ज की गई सूचना की एक प्रति informant को तत्काल और निःशुल्क दी जानी चाहिए।
धारा 4 और Domestic Incident Report में अंतर
धारा 4 के अंतर्गत सूचना देना और धारा 9 के अंतर्गत Protection Officer द्वारा Domestic Incident Report (DIR) तैयार करना दो अलग procedural stages हैं।
धारा 4 किसी भी व्यक्ति को घरेलू हिंसा की सूचना Protection Officer तक पहुंचाने की सुविधा देती है। इसके बाद, जब domestic violence की complaint प्राप्त होती है, Protection Officer की statutory duty के अंतर्गत Domestic Incident Report तैयार की जाती है। [DV Act, 2005, ss.4, 9]
Rules का Rule 5 स्पष्ट करता है कि domestic violence की complaint प्राप्त होने पर Protection Officer Form I में Domestic Incident Report तैयार करेगा और उसे Magistrate को प्रस्तुत करेगा तथा संबंधित police officer और service providers को उसकी प्रतियां भेजेगा।
इस प्रकार केवल धारा 4 के अंतर्गत किसी तीसरे व्यक्ति द्वारा सूचना दिए जाने का अर्थ यह नहीं है कि वही व्यक्ति स्वतः aggrieved person बन जाता है या उसे धारा 12 की application में applicant होना आवश्यक है।
“Reason to believe” का महत्व
धारा 4 में केवल सूचना देने की स्वतंत्रता नहीं दी गई है, बल्कि Legislature ने यह शर्त रखी है कि व्यक्ति के पास “reason to believe” होना चाहिए।
इसका व्यावहारिक अर्थ यह है कि सूचना पूर्णतः मनगढ़ंत, दुर्भावनापूर्ण या बिना किसी आधार की नहीं होनी चाहिए। व्यक्ति के पास उपलब्ध परिस्थितियों, घटनाओं, चोट, धमकी, प्रत्यक्ष जानकारी या अन्य परिस्थितिजन्य तथ्यों के आधार पर घरेलू हिंसा के संबंध में विश्वास करने का कारण होना चाहिए।
हालांकि, धारा 4(1) में informant से न्यायालयीन स्तर का प्रमाण प्रस्तुत करने की अपेक्षा नहीं की गई है। यह प्रावधान मुख्यतः early reporting and preventive intervention का mechanism है।
Good Faith में सूचना देने वाले को सुरक्षा
धारा 4(2) इस provision का अत्यंत महत्वपूर्ण भाग है।
यदि कोई व्यक्ति good faith में घरेलू हिंसा की सूचना Protection Officer को देता है, तो केवल उस सूचना को देने के कारण उसके विरुद्ध civil या criminal liability नहीं आएगी। [DV Act, 2005, s.4(2)]
इस protection का उद्देश्य लोगों को घरेलू हिंसा की जानकारी देने के लिए प्रोत्साहित करना है। यदि पड़ोसी या रिश्तेदार को यह भय हो कि सूचना देने पर उसके विरुद्ध civil suit या criminal prosecution हो सकता है, तो घरेलू हिंसा की घटनाओं की reporting प्रभावित हो सकती है।
यह immunity good faith से जुड़ी है। धारा 4(2) का statutory protection उसी सूचना को सुरक्षित करता है जो धारा 4(1) के उद्देश्य से सद्भावना में दी गई हो।
Protection Officer की भूमिका
धारा 4 के अंतर्गत सूचना मिलने के बाद Protection Officer की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। धारा 9 के अनुसार Protection Officer को complaint प्राप्त होने पर Domestic Incident Report तैयार करने, आवश्यकता होने पर Magistrate के समक्ष application में सहायता करने, legal aid उपलब्ध कराने, shelter home तथा medical assistance की व्यवस्था कराने आदि के संबंध में statutory duties दी गई हैं। [DV Act, 2005, s.9]
Rules का Rule 8 Protection Officer के इन कार्यों को और विस्तृत करता है। इसमें aggrieved person को complaint तैयार करने में सहायता, उसके अधिकारों की जानकारी देना, Section 12 की application में सहायता, safety plan तैयार करना और legal aid उपलब्ध कराने जैसी duties शामिल हैं।
Emergency situation में Rules का Rule 9 और अधिक महत्वपूर्ण है। यदि Protection Officer या service provider को telephone, e-mail या अन्य माध्यम से विश्वसनीय सूचना मिलती है कि घरेलू हिंसा हो रही है या होने की संभावना है, तो police की तत्काल सहायता लेकर मौके पर जाने और Domestic Incident Report तैयार कर Magistrate के समक्ष प्रस्तुत करने की व्यवस्था की गई है।
धारा 4 का व्यावहारिक प्रभाव
धारा 4 को इस प्रकार समझा जा सकता है कि यह reporting mechanism बनाती है, जबकि धारा 9 उस सूचना के बाद Protection Officer की statutory action निर्धारित करती है।
अर्थात्, किसी महिला को स्वयं आगे आकर शिकायत करने में असमर्थता हो तो कोई अन्य व्यक्ति Protection Officer को सूचना दे सकता है। Protection Officer को प्राप्त सूचना के आधार पर Act और Rules के अनुसार आगे की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
धारा 4 का सार यह है कि घरेलू हिंसा की सूचना देने का अधिकार व्यापक है, सूचना मौखिक या लिखित हो सकती है, और good faith में सूचना देने वाले व्यक्ति को उस सूचना के कारण civil या criminal liability से statutory protection प्राप्त है। [DV Act, 2005, s.4]
धारा 4 और Rule 4 का संबंध
यहाँ एक महत्वपूर्ण distinction याद रखना चाहिए।
Act की Section 4 यह अधिकार देती है कि कोई भी व्यक्ति घरेलू हिंसा की सूचना Protection Officer को दे सकता है और good faith informant को liability से protection मिलता है।
Rules का Rule 4 बताता है कि ऐसी सूचना practically कैसे दी और record की जाएगी—मौखिक या लिखित सूचना, मौखिक सूचना को लिखित करना, informant के हस्ताक्षर/पहचान का record तथा सूचना की प्रति निःशुल्क देना।
इसलिए परीक्षा या न्यायालयीन drafting में “Section 4 read with Rule 4 of the Protection of Women from Domestic Violence Rules, 2006” का संयुक्त संदर्भ अधिक पूर्ण है।
