भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 85 "पति या पति के रिश्तेदारों द्वारा महिला के साथ क्रूरता (Cruelty)" के अपराध और उसके लिए सजा का प्रावधान करती है। यह प्रावधान महिलाओं को वैवाहिक घर में होने वाली प्रताड़ना से बचाने के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण ढाल है।
धारा 85 के तहत सजा का प्रावधान: इस धारा के अनुसार, यदि किसी महिला का पति या उस पति का कोई भी रिश्तेदार उस महिला के साथ क्रूरता (cruelty) करता है, तो उसे अधिकतम 3 वर्ष तक के कारावास की सजा दी जा सकती है। कारावास की सजा के साथ-साथ, ऐसे दोषी व्यक्ति पर अनिवार्य रूप से जुर्माना (fine) भी लगाया जाएगा।
'क्रूरता' (Cruelty) की स्पष्ट परिभाषा (धारा 86 के संदर्भ में): इस अपराध को स्पष्ट रूप से परिभाषित करने के लिए, BNS 2023 की अगली ही धारा (धारा 86) में यह विस्तार से बताया गया है कि धारा 85 के प्रयोजनों के लिए "क्रूरता" में क्या-क्या शामिल होगा। कानून के अनुसार, निम्नलिखित दो प्रकार के आचरण क्रूरता माने जाएंगे:
- शारीरिक या मानसिक प्रताड़ना: कोई भी ऐसा जानबूझकर किया गया आचरण (wilful conduct) जो इतना गंभीर हो कि वह उस महिला को आत्महत्या (suicide) करने के लिए मजबूर कर दे, या जिससे उस महिला के जीवन, शरीर के अंगों (limb) या स्वास्थ्य (चाहे वह मानसिक स्वास्थ्य हो या शारीरिक) को गंभीर चोट या खतरा पहुंचे।
- संपत्ति की अवैध मांग के लिए उत्पीड़न: महिला को इस उद्देश्य से परेशान या उत्पीड़ित (harassment) करना ताकि उसे या उसके किसी रिश्तेदार को किसी संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति (valuable security) की अवैध मांग (unlawful demand) पूरी करने के लिए मजबूर (coerce) किया जा सके। इसके अलावा, यदि ऐसी कोई मांग पूरी न होने के कारण महिला या उसके किसी रिश्तेदार को परेशान किया जाता है, तो वह भी इसी क्रूरता की श्रेणी में आएगा।
सरल शब्दों में, यह कानूनी प्रावधान विवाहित महिलाओं को उनके वैवाहिक जीवन में होने वाले हर प्रकार के दुर्व्यवहार, घरेलू हिंसा, मानसिक प्रताड़ना और विशेष रूप से संपत्ति (जैसे दहेज) की मांग को लेकर होने वाले उत्पीड़न से सख्त कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है।
