भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 83 "विधिपूर्ण विवाह के बिना धोखे से विवाह कर्म (ceremony) पूरा करने" के अपराध और उसकी सजा का प्रावधान करती है। यह धारा भी विवाह से संबंधित अपराधों (Offences relating to marriage) की श्रेणी में आती है।
धारा 83 के मुख्य कानूनी प्रावधान:
अपराध की परिस्थितियां: इस धारा के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति निम्नलिखित कृत्य करता है, तो उसे इस अपराध का दोषी माना जाएगा:
- धोखाधड़ी का इरादा (Fraudulent intention): यदि कोई व्यक्ति बेईमानी से (dishonestly) या धोखाधड़ी करने के स्पष्ट इरादे से किसी के साथ विवाह की रस्में या समारोह (ceremony of being married) संपन्न करता है।
- सच्चाई का ज्ञान (Knowledge): वह व्यक्ति यह रस्में यह भली-भांति जानते हुए करता है कि इन कर्मकांडों को पूरा करने के बावजूद वह कानूनी रूप से विवाहित (lawfully married) नहीं हो रहा है (अर्थात यह महज एक दिखावटी या फर्जी शादी है)।
सजा का प्रावधान: इस प्रकार के धोखाधड़ी वाले कृत्य के लिए कानून में सख्त सजा निर्धारित की गई है:
- कारावास: इस अपराध के दोषी व्यक्ति को अधिकतम 7 वर्ष तक के कारावास की सजा दी जा सकती है।
- कारावास की प्रकृति: अदालत द्वारा दिया जाने वाला यह कारावास मामले की परिस्थितियों के आधार पर साधारण या कठोर (imprisonment of either description) किसी भी प्रकार का हो सकता है।
- जुर्माना: कारावास की सजा के साथ-साथ, अपराधी पर अनिवार्य रूप से जुर्माना (fine) भी लगाया जाएगा।
सरल शब्दों में, यह धारा उन मामलों को लक्षित करती है जहाँ कोई व्यक्ति सामने वाले व्यक्ति (या समाज) को धोखा देने के लिए झूठी शादी का नाटक रचता है और विवाह के कर्मकांडों को पूरा करता है, जबकि उसे व्यक्तिगत रूप से यह पता होता है कि कानूनी दृष्टि से यह शादी पूरी तरह अमान्य है। यह प्रावधान लोगों को फर्जी शादियों के जाल में फंसने और उनके जीवन के साथ होने वाले खिलवाड़ से बचाने के लिए बनाया गया है।
