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Section 48 of BNS 2023


BNS 2023 के अध्याय IV (Chapter IV) में पिछली बार हमने 'धारा 47' को समझा था। आज हम उसकी बिल्कुल विपरीत परिस्थिति यानी धारा 48 (Section 48) का अत्यंत गहराई से विश्लेषण (detailed analysis) करेंगे।

आपराधिक न्यायशास्त्र (Criminal Jurisprudence) में यह धारा 'Extra-territorial Jurisdiction' (राज्यक्षेत्रातीत अधिकारिता) का एक और शानदार और सशक्त उदाहरण है, जो हमारी सीमाओं को सुरक्षित करती है।

आइए एक Expert Lawyer की तरह इस प्रावधान को क्लॉज़-वाइज़ डिकोड करते हैं:

1. मूल कानूनी प्रावधान (The Legal Provision): 

BNS 2023 की धारा 48 का शीर्षक है: "भारत में अपराध के लिए भारत के बाहर दुष्प्रेरण" (Abetment outside India for offence in India)। यह धारा स्पष्ट रूप से घोषणा करती है कि यदि कोई व्यक्ति भारत के बाहर (without and beyond India) रहकर, भारत के भीतर किसी ऐसे कार्य के किए जाने का दुष्प्रेरण (abetment) करता है जो यदि भारत में किया जाता तो एक 'अपराध' (offence) होता, तो वह व्यक्ति इस संहिता के अर्थ के अंतर्गत दुष्प्रेरण का पूर्ण दोषी माना जाएगा।

2. तकनीकी विश्लेषण और दोषसिद्धि की शर्तें (Technical Analysis): 

इस धारा का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी व्यक्ति (चाहे वह विदेशी हो या भारतीय) किसी अन्य सुरक्षित देश में बैठकर भारत की शांति भंग करने की साजिश न रच सके। अदालत में दोषसिद्धि के लिए ये शर्तें पूरी होनी चाहिए:

  • मास्टरमाइंड भारत के बाहर हो: उकसाने वाला या साजिश रचने वाला व्यक्ति (Abettor) उस समय भारत की सीमाओं के बाहर (without and beyond India) मौजूद होना चाहिए।
  • अपराध भारत में होना हो: जिस अपराध का दुष्प्रेरण किया जा रहा है, वह 'भारत में' (in India) किया जाना चाहिए और भारतीय कानून (BNS) के तहत वह कृत्य एक 'अपराध' की श्रेणी में आना चाहिए।

3. BNS का स्पष्ट दृष्टांत (Practical Illustration):

कानून ने इस तकनीकी बिंदु को स्पष्ट करने के लिए एक बहुत ही सीधा दृष्टांत (Illustration) दिया है:

  • मान लीजिए 'A' 'X' नामक किसी विदेशी देश में बैठा है और वह भारत में (in India) एक हत्या (murder) करने के लिए 'B' को उकसाता है (instigates)।
  • निष्कर्ष (Conclusion): यहाँ 'A' 'हत्या के दुष्प्रेरण' (abetting murder) का पूरी तरह से दोषी है, भले ही वह उकसाते समय भारत में मौजूद नहीं था।

4. कानूनी जुड़ाव (Legal Linkage): 

एक बेहतरीन वकील के रूप में आपको धारा 48 को हमेशा BNS की धारा 47 के साथ तुलनात्मक रूप से (comparatively) पढ़ना चाहिए। जहाँ धारा 47 "भारत में बैठकर विदेश में अपराध" करवाने को दंडनीय बनाती है, वहीं धारा 48 "विदेश में बैठकर भारत में अपराध" करवाने को रोकती है। इसके अलावा, आपको इसे BNS की धारा 1(4) और 1(5) के साथ भी जोड़कर पढ़ना चाहिए, जो भारतीय अदालतों को भारत के बाहर किए गए अपराधों (Offences committed beyond India) पर मुकदमा चलाने की 'Extra-territorial' शक्ति प्रदान करती है।

Supreme Court Insight: 

सुप्रीम कोर्ट ने 'Mobarik Ali Ahmed vs. State of Bombay' जैसे लैंडमार्क मामलों में यह स्पष्ट किया है कि भले ही कोई व्यक्ति शारीरिक रूप से (physically) भारत में कभी मौजूद न रहा हो, लेकिन यदि उसके कार्यों या साजिश का प्रभाव (effect) भारत में अपराध के रूप में होता है, तो उसे भारतीय अदालतों द्वारा दंडित किया जा सकता है। धारा 48 (जो पुरानी IPC की धारा 108B के समतुल्य है) इसी न्यायशास्त्रीय सिद्धांत को दुष्प्रेरण (Abetment) पर लागू करती है। 


Section 48 sends a clear legal message to global masterminds: Distance is not a defense when the crime is targeted at India! 

Keep your concepts crystal clear and keep revising.

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