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Section 47 BNS 2023

 Section 47 BNS 2023: भारत के बाहर के अपराधों का भारत में दुष्प्रेरण (Abetment in India of offences outside India)


अभी तक हमने समझा कि दुष्प्रेरण (Abetment) क्या है और दुष्प्रेरक (Abettor) कौन होता है। अब भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 47  एक बहुत ही अहम सवाल का जवाब देती है: क्या होगा यदि साजिश भारत में रची जाए, लेकिन अपराध किसी दूसरे देश में हो?

आपराधिक न्यायशास्त्र (Criminal Jurisprudence) में इसे 'Extra-territorial Jurisdiction' (राज्यक्षेत्रातीत अधिकारिता) का सिद्धांत कहा जाता है। यह धारा सुनिश्चित करती है कि कोई भी अपराधी भारतीय सरज़मीं का इस्तेमाल दुनिया के किसी भी कोने में अपराध की साजिश रचने के लिए एक 'Safe Haven' (सुरक्षित पनाहगार) के रूप में न कर सके।

आइए एक Expert Lawyer की तरह इस प्रावधान को डिकोड करते हैं:

1. मूल कानूनी प्रावधान (The Legal Provision): BNS 2023 की धारा 47 यह स्पष्ट करती है कि यदि कोई व्यक्ति भारत में (in India) रहकर किसी ऐसे कार्य का दुष्प्रेरण करता है जो भारत के बाहर (without and beyond India) किया जाना है, और यदि वह कार्य भारत में किया जाता तो वह एक 'अपराध' (offence) होता, तो उस व्यक्ति को इस संहिता के तहत दुष्प्रेरण का दोषी माना जाएगा।

2. दोषसिद्धि की शर्तें (Crucial Elements for the Offence): अदालत में इस धारा के तहत दोषसिद्धि के लिए दो बातें साबित करनी होती हैं:

  • मास्टरमाइंड भारत में हो: उकसाने वाला या साजिश रचने वाला व्यक्ति दुष्प्रेरण करते समय भारत की सीमा के भीतर होना चाहिए।
  • भारतीय कानून के तहत अपराध: जो कार्य विदेश में किया जा रहा है, वह भारतीय कानून (BNS) की नजर में अपराध होना चाहिए (भले ही वह कार्य उस विदेशी राष्ट्र के कानून में अपराध हो या न हो)।

3. BNS का स्पष्ट दृष्टांत (Practical Illustration): कानून ने इस तकनीकी बिंदु को स्पष्ट करने के लिए एक सीधा दृष्टांत (Illustration) दिया है:

  • मान लीजिए 'A' भारत में बैठा है और वह 'B' को (जो 'X' नामक देश में रहने वाला एक विदेशी नागरिक है) उसी 'X' देश में किसी की हत्या (murder) करने के लिए उकसाता है (instigates)।
  • निष्कर्ष (Conclusion): चूँकि हत्या करना भारत में एक अपराध है, इसलिए 'A' को भारत की अदालत में 'हत्या के दुष्प्रेरण' (abetting murder) का पूर्ण रूप से दोषी माना जाएगा और उसे वही सजा मिलेगी जो भारत में हत्या के दुष्प्रेरण के लिए मिलती है।

4. कानूनी जुड़ाव (Legal Linkage): एक उत्कृष्ट वकील के रूप में आपको धारा 47 को हमेशा BNS की धारा 1(5) (जो संहिता के Extra-territorial application को लागू करती है) और ठीक इसकी विपरीत धारा 48 (Section 48) के साथ जोड़कर पढ़ना चाहिए।

  • तुलना (Comparison): जहाँ धारा 47 "भारत से विदेश" में अपराध करवाने पर लागू होती है, वहीं धारा 48 "विदेश में बैठकर भारत में" अपराध का दुष्प्रेरण (Abetment outside India for offence in India) करने वाले पर लागू होती है।

Supreme Court Insight: 

सुप्रीम कोर्ट ने 'Fatma Bibi Ahmed Patel vs. State of Gujarat' जैसे मामलों में स्पष्ट किया है कि भारत के बाहर के किसी विदेशी नागरिक द्वारा भारत के बाहर किए गए कार्य के लिए उसे भारत में तब तक दंडित नहीं किया जा सकता जब तक कि उसका कृत्य सीधे तौर पर भारत से न जुड़ा हो या भारतीय कानून ने उस पर स्पष्ट अधिकारिता न जताई हो। धारा 47 और 48 इसी Jurisdictional gap (अधिकार क्षेत्र की खाई) को भरती हैं। 

Section 47 clearly establishes that you cannot use Indian soil to mastermind crimes across the globe!


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