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Section 45 of BNS 2023

 भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 45 (किसी बात का दुष्प्रेरण - Abetment of a thing)

आपराधिक न्यायशास्त्र (Criminal Jurisprudence) में भारतीय न्याय संहिता (BNS) के अध्याय IV की यह सबसे बुनियादी और पहली धारा है। यह धारा 'अपूर्ण अपराधों' (Inchoate Offences) के सिद्धांत पर काम करती है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जो व्यक्ति पर्दे के पीछे से अपराध की योजना बनाता है या मदद करता है (Mastermind/Aider), वह भी मुख्य अपराधी के समान ही कानूनी रूप से जिम्मेदार ठहराया जाए।

आइए एक Expert Lawyer की तरह इस प्रावधान को क्लॉज़-वाइज़ (clause-wise) और क्रमानुसार डिकोड करते हैं:

1. मूल कानूनी प्रावधान (The Legal Provision): BNS 2023 की धारा 45 के अनुसार, कोई व्यक्ति किसी बात का 'दुष्प्रेरण' (Abetment) करता है, यदि वह इन तीन में से कोई एक कार्य करता है:

  • (a) उकसाना (Instigation): किसी व्यक्ति को वह बात करने के लिए उकसाता (instigate) है।
  • (b) साजिश/षड्यंत्र (Conspiracy): उस बात को करने के लिए एक या अधिक व्यक्तियों के साथ किसी 'साजिश' (conspiracy) में शामिल होता है।
    • कानूनी शर्त: यह दुष्प्रेरण केवल तभी पूरा माना जाएगा जब उस साजिश के अनुसरण में (in pursuance of) और उस कार्य को करने के लिए कोई वास्तविक 'कार्य' (act) या 'अवैध लोप' (illegal omission) घटित हो जाए।
  • (c) जानबूझकर सहायता (Intentional Aiding): किसी कार्य या अवैध लोप द्वारा उस बात के किए जाने में 'जानबूझकर सहायता' (intentionally aids) करता है।

2. धारा 45 के महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण (Technical Explanations): कानून ने 'उकसाने' और 'सहायता करने' के दायरे को बहुत विस्तृत करने के लिए दो स्पष्टीकरण (Explanations) दिए हैं:

  • स्पष्टीकरण 1 (छल या जानकारी छिपाना): यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर गलत बयानी (wilful misrepresentation) करता है, या किसी ऐसे महत्वपूर्ण तथ्य को छिपाता है (wilful concealment of a material fact) जिसे बताने के लिए वह कानूनी रूप से बाध्य है, और ऐसा करके वह कोई काम करवाता है, तो कानून यह मानेगा कि उसने 'उकसाकर' (instigate) दुष्प्रेरण किया है।

    • BNS का शानदार दृष्टांत (Practical Illustration): मान लीजिए 'A' एक पुलिस अधिकारी है जिसके पास कोर्ट से 'Z' को गिरफ्तार करने का वारंट है। 'B' यह बात जानता है और यह भी जानता है कि वहां खड़ा व्यक्ति 'C' है, 'Z' नहीं। फिर भी 'B' जानबूझकर पुलिस वाले 'A' से झूठ बोलता है कि 'C' ही 'Z' है, और 'A' से 'C' को गिरफ्तार करवा देता है। यहाँ 'B' ने 'उकसाने' (instigation) के माध्यम से 'C' की गिरफ्तारी का दुष्प्रेरण किया है।
  • स्पष्टीकरण 2 (सहायता का समय): जो कोई व्यक्ति किसी कार्य के किए जाने से 'पूर्व' (prior to) या उसके किए जाने के 'समय' (at the time of the commission) उस कार्य को आसान बनाने (facilitate) के लिए कुछ करता है, तो उसे 'सहायता करना' (aid) कहा जाता है।

    • सरल शब्दों में: यदि आप बैंक डकैती से एक दिन पहले अपराधियों को बैंक का नक्शा देते हैं, या डकैती के समय बाहर कार स्टार्ट करके उनका इंतज़ार करते हैं ताकि वे भाग सकें, तो आप दोनों ही स्थितियों में धारा 45 के तहत 'सहायक' (Aider) हैं।

3. कानूनी जुड़ाव (Legal Linkage): एक बेहतरीन वकील के रूप में आपको इस धारा को BNS की धारा 46 (जो 'दुष्प्रेरक' या Abettor को परिभाषित करती है) और धारा 61 (आपराधिक साजिश - Criminal Conspiracy) के साथ जोड़कर पढ़ना चाहिए। धारा 45(b) में 'साजिश द्वारा दुष्प्रेरण' के लिए किसी ठोस कदम (act/illegal omission) का उठाया जाना ज़रूरी है, जबकि धारा 61 के तहत केवल 'गंभीर अपराध की सहमति' (agreement) ही अपने आप में एक दंडनीय आपराधिक साजिश बन जाती है।

Supreme Court Insight - 

सुप्रीम कोर्ट ने Sanju @ Sanjay Singh Sengar vs. State of M.P. और Swamy Prahaladdas vs. State of M.P. जैसे ऐतिहासिक मामलों में 'Instigation' (उकसाने) की बहुत ही बारीक व्याख्या की है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि केवल गुस्से में आकर या अचानक हुए झगड़े में कह देना कि "जाओ और मर जाओ" (Go and die) धारा 45 के तहत 'उकसाना' नहीं है। 'Instigation' के लिए 'सक्रिय भागीदारी' (active complicity) और उस व्यक्ति का स्पष्ट आपराधिक आशय (Mens Rea) होना अनिवार्य है कि सामने वाला वास्तव में वह कृत्य करे।

Short Trick for Memory - "The I-C-A Rule": Exams में Abetment के तीन मुख्य प्रकारों को तुरंत याद रखने के लिए इस सूत्र का उपयोग करें:

  • I = Instigation (उकसाना)
  • C = Conspiracy (साजिश)
  • A = Aiding (सहायता)

 Section 45 clearly defines that the law will not only punish the hands that commit the crime, but also the minds that plot it and the voices that incite it! Keep your concepts crystal clear and keep revising.


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