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Chapter IV : दुष्प्रेरण, आपराधिक साजिश और प्रयास के विषय में Abetment, Criminal Conspiracy and Attempt

भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 का अध्याय IV (Chapter IV) आपराधिक न्यायशास्त्र (Criminal Jurisprudence) में बहुत महत्वपूर्ण है। इस अध्याय का शीर्षक है—"दुष्प्रेरण, आपराधिक साजिश और प्रयास के विषय में" (Of Abetment, Criminal Conspiracy and Attempt)

यह अध्याय उन 'अपूर्ण अपराधों' (Inchoate Offences) से निपटता है जहाँ मुख्य अपराध शायद पूरा न हुआ हो, लेकिन व्यक्ति की आपराधिक मंशा (Mens Rea) और उसके कृत्य कानून की नज़र में दंडनीय हो जाते हैं। यह अध्याय धारा 45 से लेकर धारा 62 तक विस्तृत है।

आइए एक Expert Lawyer की तरह इस पूरे अध्याय (Chapter IV) का एक संक्षिप्त (brief) लेकिन क्रमबद्ध (serial) विश्लेषण करते हैं:

भाग 1: दुष्प्रेरण (Abetment) - धारा 45 से 60

यह भाग बताता है कि अपराध करने वाले के साथ-साथ अपराध करवाने वाला (Mastermind) भी उतना ही दोषी है।

  • धारा 45 और 46 (मूल परिभाषाएं): धारा 45 स्पष्ट करती है कि दुष्प्रेरण (Abetment) तीन तरीकों से होता है—किसी को उकसाना (instigating), साजिश में शामिल होना (conspiracy), या जानबूझकर सहायता करना (intentionally aids)। धारा 46 बताती है कि 'दुष्प्रेरक' (Abettor) वह व्यक्ति है जो अपराध को उकसाता है।
  • धारा 47 और 48 (क्षेत्राधिकार): ये धाराएं स्पष्ट करती हैं कि यदि भारत में बैठकर भारत के बाहर अपराध का दुष्प्रेरण किया जाए, या विदेश में बैठकर भारत में अपराध का दुष्प्रेरण किया जाए, तो दोनों ही स्थितियां BNS के तहत दंडनीय हैं।
  • धारा 49 से 57 (सजा के प्रावधान): ये धाराएं अलग-अलग परिस्थितियों में दुष्प्रेरक की सजा तय करती हैं।
    • धारा 49: यदि उकसाने के परिणामस्वरूप अपराध हो जाता है, तो दुष्प्रेरक को वही सजा मिलेगी जो उस मुख्य अपराध की है।
    • धारा 51: यदि आपने उकसाया कुछ और था, लेकिन उसका 'संभावित परिणाम' (probable consequence) कुछ और निकल आया (जैसे घर जलाने को कहा था, लेकिन आग लगाने वाले ने चोरी भी कर ली), तो दुष्प्रेरक उस संभावित परिणाम के लिए भी उत्तरदायी होगा।
    • धारा 54: यदि दुष्प्रेरक अपराध होते समय घटनास्थल पर मौजूद (present) है, तो कानून यही मानेगा कि उसने खुद वह अपराध किया है।
  • धारा 58 से 60 (योजना को छिपाना): यदि कोई व्यक्ति (या कोई लोक सेवक - Public Servant) किसी ऐसे अपराध की योजना (design) को जानबूझकर छिपाता है (conceals) जिसकी सजा मृत्युदंड या आजीवन कारावास आदि है, तो योजना छिपाना भी अपने आप में एक अपराध है।

भाग 2: आपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy) - धारा 61

  • धारा 61: जब दो या दो से अधिक व्यक्ति (two or more persons) किसी 'अवैध कार्य' (illegal act) को करने, या किसी ऐसे कार्य को जो अवैध नहीं है लेकिन उसे 'अवैध साधनों' (illegal means) से करने के लिए सहमत (agree) होते हैं, तो उसे 'आपराधिक साजिश' कहा जाता है।
  • सजा (Punishment): यदि साजिश किसी ऐसे गंभीर अपराध की है जिसकी सजा मौत, उम्रकैद या 2 साल से अधिक की जेल है, तो साजिशकर्ताओं को भी मुख्य अपराधी के समान ही सजा मिलेगी। अन्य छोटी साजिशों के लिए अधिकतम 6 महीने की जेल या जुर्माना हो सकता है।

भाग 3: अपराध करने का प्रयास (Attempt) - धारा 62

  • धारा 62: यह धारा उन सभी अपराधों के 'प्रयास' (Attempt) के लिए एक सामान्य दंड निर्धारित करती है जिनकी सजा आजीवन कारावास या अन्य कारावास है, और जिनके प्रयास के लिए BNS में कोई अलग से स्पष्ट प्रावधान नहीं है।
  • सजा: ऐसे मामलों में, प्रयास करने वाले को उस अपराध के लिए निर्धारित अधिकतम कारावास की 'आधी सजा' (one-half of the longest term) या जुर्माना या दोनों दिए जा सकते हैं।
  • Practical Example: 'A' आभूषण चुराने के इरादे से 'Z' का बक्सा तोड़ता है, लेकिन बक्सा खोलने पर पाता है कि उसमें कोई आभूषण है ही नहीं। यहाँ चोरी का अपराध पूरा नहीं हुआ, लेकिन 'A' ने चोरी करने की दिशा में 'प्रयास' (attempt) कर दिया है, इसलिए वह धारा 62 के तहत दोषी है।

सुप्रीम कोर्ट ने कई मामलों (जैसे 'State of Maharashtra v. Mohd. Yakub') में 'तैयारी' (Preparation) और 'प्रयास' (Attempt) के बीच का अंतर स्पष्ट किया है। केवल अपराध की तैयारी करना (कुछ अपवादों को छोड़कर) दंडनीय नहीं है, लेकिन जैसे ही तैयारी पूरी होने के बाद अपराध की दिशा में पहला कदम (Direct movement) उठाया जाता है, वह धारा 62 के तहत 'प्रयास' बन जाता है।)

Short Trick for Memory - "The A-C-A Chapter": Exams में अध्याय IV की संरचना को याद रखने के लिए मेरी यह ACA ट्रिक याद रखें:

  • A = Abetment (दुष्प्रेरण - धारा 45 से 60)
  • C = Conspiracy (आपराधिक साजिश - धारा 61)
  • A = Attempt (प्रयास - धारा 62)

this is the complete bird's-eye view of Chapter IV! यह अध्याय सुनिश्चित करता है कि अपराध की जड़ (साजिश/दुष्प्रेरण) को भी उतनी ही सख्ती से काटा जाए जितना कि मुख्य अपराध को।


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