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भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023: महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराध

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भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023: महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराध

1. प्रस्तावना और वैधानिक संदर्भ

भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 का अध्याय V महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए समर्पित एक व्यापक कानूनी ढांचा प्रस्तुत करता है। एक वरिष्ठ कानूनी विशेषज्ञ के रूप में, यह रेखांकित करना आवश्यक है कि यह संहिता औपनिवेशिक विरासत (IPC) को आधुनिक, न्याय-केंद्रित और अधिक कठोर दंडात्मक प्रावधानों के साथ प्रतिस्थापित करती है। इस अध्याय का मुख्य उद्देश्य न केवल अपराधों का दमन करना है, बल्कि समाज के सबसे संवेदनशील वर्गों के लिए एक सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना और न्याय प्रणाली में उनकी गरिमा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना है।

2. महत्वपूर्ण परिभाषाएँ (धारा 2 के आधार पर)

BNS की धारा 2 के अंतर्गत दी गई परिभाषाएँ इस संहिता की वैधानिक नींव हैं। स्रोत संदर्भ के अनुसार सटीक परिभाषाएँ निम्नलिखित हैं:

  • बच्चा (Child) [धारा 2(3)]: कोई भी व्यक्ति जो अठारह वर्ष से कम आयु का है।
  • पुरुष (Man) [धारा 2(19)]: किसी भी आयु का पुरुष मानव।
  • स्त्री (Woman) [धारा 2(35)]: किसी भी आयु की स्त्री मानव।
  • सद्भाव (Good Faith) [धारा 2(11)]: कोई भी कार्य जो 'उचित सतर्कता और ध्यान' (Due care and attention) के बिना किया गया या माना गया हो, वह 'सद्भाव' में किया गया नहीं माना जाएगा।

3. यौन अपराध: बलात्कार और संबंधित प्रावधान (धारा 63 - 73)

बलात्कार की परिभाषा (धारा 63)

धारा 63 के अनुसार, एक पुरुष 'बलात्कार' करता है यदि वह महिला के साथ निम्नलिखित परिस्थितियों में यौन कृत्य करता है:

  1. उसकी इच्छा के विरुद्ध।
  2. उसकी सहमति के बिना।
  3. मृत्यु या चोट के भय में डालकर प्राप्त की गई सहमति।
  4. भ्रम के तहत सहमति (धारा 63-iv): जब पुरुष जानता है कि वह महिला का पति नहीं है, लेकिन महिला सहमति इसलिए देती है क्योंकि उसे विश्वास दिलाया गया है कि वह पुरुष उसका पति है या वह पुरुष उसका वैध रूप से विवाहित पति है।
  5. विकृतचित्तता, नशे या किसी नशीले पदार्थ के प्रभाव में दी गई सहमति, जहाँ महिला कृत्य की प्रकृति समझने में असमर्थ हो।
  6. 18 वर्ष से कम आयु की महिला के साथ (सहमति हो या न हो)।
  7. जब महिला सहमति व्यक्त करने में असमर्थ हो।

स्पष्टीकरण 2 (सहमति): सहमति का अर्थ एक 'स्पष्ट स्वैच्छिक समझौता' है। यदि महिला शारीरिक प्रतिरोध नहीं करती है, तो केवल इस आधार पर उसे 'सहमति' नहीं माना जाएगा। भ्रम (Misconception of fact) के तहत दी गई सहमति कानूनी रूप से शून्य है।

दंडात्मक संरचना (धारा 64 - 71)

अपराध का प्रकार

संबंधित धारा

निर्धारित दंड

सामान्य बलात्कार

64(1)

न्यूनतम 10 वर्ष का कठोर कारावास, जो आजीवन कारावास तक हो सकता है, और जुर्माना।

लोक सेवक/पुलिस/सशस्त्र बल द्वारा बलात्कार

64(2)

न्यूनतम 10 वर्ष, जो शेष प्राकृतिक जीवन के लिए आजीवन कारावास तक हो सकता है, और जुर्माना।

16 वर्ष से कम की बालिका से बलात्कार

65(1)

न्यूनतम 20 वर्ष, जो शेष प्राकृतिक जीवन के लिए आजीवन कारावास तक हो सकता है, और जुर्माना।

12 वर्ष से कम की बालिका से बलात्कार

65(2)

न्यूनतम 20 वर्ष का कठोर कारावास, आजीवन कारावास (शेष प्राकृतिक जीवन) या मृत्युदंड।

मृत्यु या 'वानस्पतिक अवस्था' (Persistent Vegetative State) कारित करना

66

न्यूनतम 20 वर्ष का कठोर कारावास, जो शेष प्राकृतिक जीवन के लिए आजीवन कारावास या मृत्युदंड तक हो सकता है।

अलग रह रही पत्नी के साथ यौन संबंध (बिना सहमति)

67

2 से 7 वर्ष तक का कारावास (साधारण या कठोर) और जुर्माना।

प्राधिकारी व्यक्ति द्वारा यौन शोषण (Induce/Seduce)

68

5 से 10 वर्ष तक का कठोर कारावास और जुर्माना।

शादी के झूठे वादे/पहचान छिपाकर यौन संबंध

69

10 वर्ष तक का कारावास (साधारण या कठोर) और जुर्माना।

सामूहिक बलात्कार (Gang Rape)

70(1)

न्यूनतम 20 वर्ष का कठोर कारावास, जो शेष प्राकृतिक जीवन के लिए आजीवन कारावास तक हो सकता है।

18 वर्ष से कम की बालिका से सामूहिक बलात्कार

70(2)

शेष प्राकृतिक जीवन के लिए आजीवन कारावास या मृत्युदंड।

बार-बार अपराध करने वाले (Repeat Offenders)

71

शेष प्राकृतिक जीवन के लिए आजीवन कारावास या मृत्युदंड।

जुर्माने का प्रावधान: धारा 65 और 70 के तहत आरोपित जुर्माना पीड़िता के चिकित्सा उपचार और पुनर्वास के खर्चों को पूरा करने के लिए न्यायसंगत होना चाहिए और इसे सीधे पीड़िता को भुगतान किया जाना चाहिए।

पहचान की सुरक्षा (धारा 72 - 73)

  • धारा 72: पीड़ित की पहचान उजागर करना 2 वर्ष तक के कारावास और जुर्माने से दंडनीय है।
  • धारा 73: न्यायालय की अनुमति के बिना कार्यवाही का प्रकाशन 2 वर्ष तक के कारावास और जुर्माने से दंडनीय है।

4. महिलाओं के विरुद्ध आपराधिक बल और हमला (धारा 74 - 79)

  • शील भंग (धारा 74): महिला की लज्जा (Modesty) भंग करने के आशय से हमला करने पर 1 से 5 वर्ष तक का कारावास और जुर्माना।
  • यौन उत्पीड़न (धारा 75):
    • शारीरिक संपर्क, यौन अनुग्रह की मांग या पोर्नोग्राफी दिखाना (कृत्य i, ii, iii): 3 वर्ष तक का कठोर कारावास या जुर्माना।
    • कामुक टिप्पणी (कृत्य iv): 1 वर्ष तक का कारावास या जुर्माना।
  • विवस्त्र करने के आशय से हमला (धारा 76): महिला को नग्न करने के लिए बल प्रयोग या उकसाना। दंड: 3 से 7 वर्ष तक का कारावास और जुर्माना।
  • दृश्यरतिकता (Voyeurism) (धारा 77): निजी कृत्य देखते हुए चित्र खींचना। प्रथम दोषसिद्धि: 1-3 वर्ष; द्वितीय दोषसिद्धि: 3-7 वर्ष का कारावास।
  • पीछा करना (Stalking) (धारा 78): बार-बार संपर्क करना या इलेक्ट्रॉनिक संचार की निगरानी। प्रथम दोषसिद्धि: 3 वर्ष तक; द्वितीय दोषसिद्धि: 5 वर्ष तक कारावास।
  • शब्द, भंगिमा या कृत्य (धारा 79): लज्जा का अनादर करने के उद्देश्य से शब्द या संकेत। दंड: 3 वर्ष तक का साधारण कारावास और जुर्माना।

5. विवाह से संबंधित अपराध (धारा 80 - 87)

  • दहेज मृत्यु (धारा 80): विवाह के 7 वर्ष के भीतर असामान्य मृत्यु और दहेज प्रताड़ना। दंड: 7 वर्ष से आजीवन कारावास।
  • धारा 81 बनाम धारा 69: धारा 81 में मुख्य तत्व 'कपटपूर्वक विवाह का विश्वास' दिलाकर 'सहवास' (Cohabitation) करना है (दंड: 10 वर्ष तक), जबकि धारा 69 में 'शादी के झूठे वादे' पर 'यौन संबंध' बनाना मुख्य अपराध है।
  • द्विविवाह (धारा 82): पति/पत्नी के जीवित रहते पुनः विवाह करना। दंड: 7 वर्ष तक कारावास।
  • क्रूरता (धारा 85-86): पति या रिश्तेदार द्वारा क्रूरता। धारा 86 के अनुसार, 'क्रूरता' में महिला को आत्महत्या के लिए उकसाना या संपत्ति की अवैध मांग के लिए प्रताड़ित करना (शारीरिक या मानसिक) शामिल है। दंड: 3 वर्ष तक कारावास।

6. गर्भपात और अजन्मे बच्चों से संबंधित अपराध (धारा 88 - 92)

  • सहमति के बिना गर्भपात (धारा 89): स्त्री की सहमति के बिना गर्भपात करना। दंड: आजीवन कारावास या 10 वर्ष तक कारावास।
  • गर्भपात के दौरान मृत्यु (धारा 90): यदि कृत्य से महिला की मृत्यु हो जाती है। दंड: 10 वर्ष तक कारावास।
  • जीवित जन्म रोकना (धारा 91): बच्चे को जीवित पैदा होने से रोकना। दंड: 10 वर्ष तक कारावास।
  • अजन्मे बच्चे की मृत्यु (धारा 92): किसी ऐसे कार्य द्वारा 'त्वरित अजन्मे बच्चे' (Quick unborn child) की मृत्यु कारित करना, जो 'आपराधिक मानव वध' (Culpable Homicide) की श्रेणी में आता हो। दंड: 10 वर्ष तक कारावास और जुर्माना।

7. बच्चों के विरुद्ध विशिष्ट अपराध (धारा 93 - 99)

  • परित्याग (धारा 93): 12 वर्ष से कम आयु के बच्चे को छोड़ देना। दंड: 7 वर्ष तक कारावास।
  • अपराध के लिए उपयोग (धारा 95): बच्चे को अपराध के लिए काम पर रखना। दंड: 3 से 10 वर्ष तक कारावास।
  • तस्करी (Procuration) (धारा 96): अवैध संभोग के लिए प्रेरित करना। दंड: 10 वर्ष तक कारावास।
  • खरीद-बिक्री और 'आशय का अनुमान' (धारा 98 - 99):
    • वैधानिक अनुमान: यदि 18 वर्ष से कम आयु की बालिका किसी वेश्या या वेश्यालय चलाने वाले को बेची जाती है, तो धारा 98/99 के तहत अदालत यह मान लेगी (Shall be presumed) कि उसे वेश्यावृत्ति के लिए बेचा गया है, जब तक कि इसके विपरीत सिद्ध न हो जाए।
    • दंड: 7 से 14 वर्ष तक का कारावास।

8. संबंधित सामान्य अपवाद और प्रक्रियात्मक बिंदु

  • सामान्य अपवाद (धारा 20): 7 वर्ष से कम आयु के बच्चे द्वारा किया गया कृत्य अपराध नहीं है।
  • प्रक्रियात्मक जवाबदेही (धारा 199): यदि कोई लोक सेवक धारा 64, 65, 66, 67, 68, 70, 71, 74, 76, 77, 79, 124, 143 या 144 से संबंधित जानकारी दर्ज करने में विफल रहता है, तो उसे 6 महीने से 2 वर्ष तक के कारावास का दंड दिया जाएगा।
  • चिकित्सा उपचार (धारा 200): अस्पताल द्वारा पीड़ित के उपचार से इनकार करने पर 1 वर्ष तक का दंड।

9. निष्कर्ष

भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 एक ऐतिहासिक वैधानिक सुधार है। सामूहिक बलात्कार और बच्चों के विरुद्ध अपराधों के लिए 'मृत्युदंड' और 'प्राकृतिक जीवन काल तक आजीवन कारावास' जैसे प्रावधान अपराधियों के लिए निवारक (Deterrent) का कार्य करते हैं। धारा 4 के तहत 'सामुदायिक सेवा' (Community Service) को दंड के रूप में शामिल करना छोटे अपराधों में एक सुधारवादी दृष्टिकोण को दर्शाता है। यह संहिता स्पष्ट परिभाषाओं और सख्त जवाबदेही के माध्यम से महिलाओं और बच्चों के लिए 'त्वरित और संपूर्ण न्याय' सुनिश्चित करने की दिशा में एक दृढ़ कदम है।

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