भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के अध्याय IV (Chapter IV) के तहत 'दुष्प्रेरण' (Abetment) और 'आपराधिक साजिश' (Criminal Conspiracy) दोनों ही अपूर्ण अपराधों (Inchoate Offences) की श्रेणी में आते हैं। हालाँकि दोनों अपराधों में योजना और सहभागिता शामिल है, लेकिन कानूनी रूप से दोनों के बीच बहुत ही स्पष्ट और तकनीकी अंतर है।
इस अंतर को समझने के लिए हमें BNS की धारा 45 (जो दुष्प्रेरण को परिभाषित करती है) और BNS की धारा 61 (जो आपराधिक साजिश को परिभाषित करती है) का क्लॉज़-वाइज़ (clause-wise) तुलनात्मक विश्लेषण करना होगा।
1. मूल कानूनी परिभाषा और दायरा (Legal Definition and Scope):
- दुष्प्रेरण (Abetment - Section 45): धारा 45 के अनुसार, कोई व्यक्ति किसी बात का दुष्प्रेरण तब करता है जब वह तीन में से कोई एक कार्य करता है: (a) किसी को उकसाता है (instigates), (b) किसी साजिश (conspiracy) में शामिल होता है, या (c) जानबूझकर सहायता (intentionally aids) करता है। इसका अर्थ है कि 'साजिश' (Conspiracy) केवल दुष्प्रेरण करने का एक तरीका (Mode) मात्र है।
- आपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy - Section 61): धारा 61(1) के अनुसार, जब दो या दो से अधिक व्यक्ति (two or more persons) किसी 'अवैध कार्य' (illegal act) को करने, या किसी ऐसे कार्य को जो अवैध नहीं है लेकिन उसे 'अवैध साधनों' (illegal means) से करने के लिए सहमत (agree) होते हैं, तो उस सहमति को 'आपराधिक साजिश' कहा जाता है। यहाँ साजिश अपने आप में एक 'स्वतंत्र अपराध' (Independent Offence) है।
2. सबसे मुख्य अंतर - 'कृत्य' बनाम 'सहमति' (Overt Act vs. Mere Agreement):
कानूनी दृष्टि से इन दोनों के बीच का सबसे बड़ा अंतर "कृत्य के घटित होने" (Requirement of an Act) से जुड़ा है:
- साजिश द्वारा दुष्प्रेरण (Abetment by Conspiracy - Section 45(b)): धारा 45(b) स्पष्ट करती है कि साजिश के तहत दुष्प्रेरण केवल तभी पूरा माना जाएगा जब उस साजिश के अनुसरण में (in pursuance of that conspiracy) कोई वास्तविक 'कार्य' (act) या 'अवैध लोप' (illegal omission) घटित हो जाए। बिना किसी ठोस कदम उठाए, केवल बात करने से धारा 45(b) के तहत अपराध सिद्ध नहीं होता।
- स्वतंत्र आपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy - Section 61): धारा 61 का 'परंतुक' (Proviso) एक अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्धांत स्थापित करता है। यह कहता है कि यदि सहमति किसी "अपराध को करने की है" (agreement to commit an offence), तो मात्र वह 'सहमति' (Mere Agreement) ही अपने आप में पूर्ण अपराध है। इसके लिए यह बिल्कुल ज़रूरी नहीं है कि साजिश के अलावा कोई और कार्य (some act besides the agreement) किया गया हो।
3. व्यक्तियों की संख्या (Number of Persons required):
- धारा 61 (Criminal Conspiracy): इस धारा के लागू होने के लिए कम से कम 'दो या अधिक व्यक्तियों' (two or more persons) के बीच सहमति (agreement) का होना अनिवार्य है। एक व्यक्ति खुद से साजिश नहीं कर सकता।
- धारा 45 (Abetment): दुष्प्रेरण में, एक अकेला व्यक्ति (Abettor) भी किसी दूसरे व्यक्ति को उकसाकर (instigate) दुष्प्रेरण का अपराध कर सकता है।
4. कानूनी दृष्टांत (Practical Example) से अंतर समझें: मान लीजिए 'A' और 'B' एक कमरे में बैठकर बैंक लूटने की योजना बनाते हैं और सहमत होते हैं कि वे कल हथियार खरीदेंगे।
- निष्कर्ष 1 (धारा 61 लागू): जैसे ही 'A' और 'B' ने बैंक लूटने (जो कि एक अपराध है) की 'सहमति' (Agreement) बनाई, वैसे ही उन्होंने धारा 61 के तहत 'आपराधिक साजिश' का पूर्ण अपराध कर दिया। इसके लिए उनका हथियार खरीदना या बैंक तक जाना ज़रूरी नहीं है।
- निष्कर्ष 2 (धारा 45(b) लागू): अब मान लीजिए कि अपनी योजना के अनुसरण (pursuance) में 'A' बाज़ार जाकर एक पिस्तौल खरीद लाता है। पिस्तौल खरीदना एक 'कार्य' (Act) है जो साजिश के तहत किया गया। अब जैसे ही यह कार्य हुआ, यह मामला धारा 45(b) के तहत 'साजिश द्वारा दुष्प्रेरण' (Abetment by conspiracy) भी बन गया।
Supreme Court Insight:
सुप्रीम कोर्ट ने 'Kehar Singh v. State (Delhi Administration)' और 'Nalini v. State of Tamil Nadu' जैसे ऐतिहासिक मामलों में स्पष्ट किया है कि "सहमति ही आपराधिक साजिश का सार है" (Agreement is the gist of the offence)। न्यायालय ने यह भी स्थापित किया कि पुरानी IPC में धारा 120A/120B (अब BNS की धारा 61) को 1913 में जोड़ा ही इसलिए गया था क्योंकि मूल कानून (धारा 107/BNS धारा 45) में केवल 'साजिश की योजना' बनाना दंडनीय नहीं था जब तक कि कोई 'overt act' (ठोस कृत्य) न किया जाए। इसलिए, कानून के उस खालीपन को भरने के लिए 'स्वतंत्र आपराधिक साजिश' का सिद्धांत लाया गया।)
संक्षेप में, धारा 61 (Conspiracy) अपराध की जड़ (Root) है जहाँ केवल 'सहमति' ही अपराध है, जबकि धारा 45(b) (Abetment) उसका अगला चरण है जहाँ साजिश के साथ-साथ अपराध की दिशा में कोई 'कदम' (Act) उठाया जाना अनिवार्य है।
