भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 102 "जिस व्यक्ति की मृत्यु कारित करने का इरादा था, उससे भिन्न व्यक्ति की मृत्यु कारित करके आपराधिक मानव वध" (Culpable homicide by causing death of person other than person whose death was intended) के महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांत को स्पष्ट करती है।
आपराधिक कानून के क्षेत्र में इस प्रावधान को आमतौर पर 'द्वेष का हस्तांतरण' (Doctrine of Transfer of Malice) के रूप में जाना जाता है।
धारा 102 के मुख्य कानूनी प्रावधान:
इस धारा के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति कोई ऐसा कार्य करता है और उस कार्य से किसी की जान चली जाती है, तो उसे निम्नलिखित परिस्थितियों में उत्तरदायी माना जाएगा:
- आपराधिक इरादा या ज्ञान: व्यक्ति कोई ऐसा कार्य करता है जो किसी की मृत्यु कारित करने (जान लेने) के स्पष्ट इरादे (intends to cause death) से किया गया हो, या वह यह भली-भांति जानता हो कि उसके इस कृत्य से किसी की मृत्यु होने की पूरी संभावना है।
- किसी अन्य (निर्दोष/तीसरे) व्यक्ति की मृत्यु: इस घातक कृत्य के परिणामस्वरूप वह व्यक्ति आपराधिक मानव वध (culpable homicide) करता है, लेकिन उसके हाथों किसी ऐसे व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है जिसकी मृत्यु कारित करने का उसका न तो कोई इरादा था और न ही उसे यह ज्ञान था कि उसके कृत्य से उस विशिष्ट व्यक्ति की मृत्यु हो सकती है।
सजा और अपराध की प्रकृति का निर्धारण:
ऐसी स्थिति में, कानून अपराधी को यह कहकर बचने का कोई मौका नहीं देता कि पीड़ित व्यक्ति उसका वास्तविक लक्ष्य (target) नहीं था।
धारा 102 स्पष्ट रूप से यह निर्धारित करती है कि अपराधी द्वारा किया गया 'आपराधिक मानव वध' बिल्कुल उसी श्रेणी (description) का माना जाएगा, जिस श्रेणी का वह तब माना जाता जब उसने उसी व्यक्ति की मृत्यु कारित की होती जिसे वह वास्तव में मारना चाहता था (या जिसके मरने की उसे संभावना थी)।
इस प्रावधान का उद्देश्य और एक सरल उदाहरण:
इस कानून का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी अपराधी अपने घातक कृत्य के परिणामों से यह कहकर न बच सके कि उसकी गोली या प्रहार किसी गलत व्यक्ति को लग गया।
उदाहरण: मान लीजिए 'A' का स्पष्ट इरादा 'B' की हत्या करने का है। इसी इरादे से 'A' जहर मिला हुआ खाना 'B' के लिए रखता है या 'B' पर गोली चलाता है। लेकिन वह खाना गलती से 'C' खा लेता है या गोली 'B' के बजाय पास खड़े 'C' को लग जाती है, जिससे 'C' की मृत्यु हो जाती है। 'A' का 'C' को मारने का कोई इरादा नहीं था।
- इस स्थिति में 'A' अदालत में यह बचाव (defense) नहीं ले सकता कि "यह एक दुर्घटना थी" या "उसका इरादा 'C' को मारने का नहीं था"।
- धारा 102 के तहत 'A' का आपराधिक इरादा (Mens rea) 'B' से 'C' पर पूरी तरह से स्थानांतरित (transfer) हो जाएगा।
- चूंकि 'A' का मूल कृत्य 'हत्या' (Murder) की श्रेणी का था, इसलिए उसे 'C' की हत्या के लिए भी पूर्ण रूप से 'हत्या' का ही दोषी माना जाएगा और उसी के अनुसार सजा दी जाएगी।
संक्षेप में, यह धारा यह सुनिश्चित करती है कि यदि कोई व्यक्ति जान लेने के आपराधिक और दुर्भावनापूर्ण इरादे से कोई कृत्य करता है, तो वह उस कृत्य से होने वाली किसी भी व्यक्ति की मृत्यु के लिए उसी स्तर का जिम्मेदार होगा, चाहे मरने वाला व्यक्ति कोई भी हो।
