Type Here to Get Search Results !

Section 35 BNS 2023: शरीर और संपत्ति की निजी प्रतिरक्षा का अधिकार (Right of private defence of body and of property)

 Section 35 BNS 2023: शरीर और संपत्ति की निजी प्रतिरक्षा का अधिकार (Right of private defence of body and of property)

Contents(toc)

भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 34 में हमने 'निजी प्रतिरक्षा' (Private Defence) के मूल सिद्धांत को समझा था। अब, धारा 35 (Section 35) उस अधिकार के 'दायरे' (Scope) और 'विस्तार' को स्पष्ट करती है।

यह धारा एक बहुत ही महान और परोपकारी कानूनी सिद्धांत (altruistic legal principle) पर आधारित है कि "आपको केवल अपनी नहीं, बल्कि अपने साथी नागरिकों की भी रक्षा करने का अधिकार है।"

आइए इसे एक Expert Lawyer की तरह क्लॉज़-वाइज़ (clause-wise) डिकोड करते हैं:

मूल कानूनी प्रावधान (The Legal Provision): 

BNS की धारा 35 के अनुसार, धारा 37 में दी गई पाबंदियों (restrictions) के अधीन रहते हुए, प्रत्येक व्यक्ति को निम्नलिखित अधिकारों की रक्षा करने का अधिकार है:

  • (a) शरीर की रक्षा (Defence of Body): वह अपने स्वयं के शरीर, और किसी भी अन्य व्यक्ति के शरीर की रक्षा कर सकता है, यदि हमलावर कोई ऐसा अपराध कर रहा है जो मानव शरीर को प्रभावित करता हो (offence affecting the human body)।
  • (b) संपत्ति की रक्षा (Defence of Property): वह अपनी या किसी भी अन्य व्यक्ति की चल (movable) या अचल (immovable) संपत्ति की रक्षा कर सकता है।

संपत्ति के मामलों में अपराध की सीमाएं (Limitations in Property Cases):

कानून ने शरीर की रक्षा के लिए तो दायरा बहुत बड़ा रखा है (कोई भी अपराध जो शरीर को प्रभावित करे), लेकिन संपत्ति की रक्षा का अधिकार केवल 4 विशिष्ट प्रकार के अपराधों या उनके प्रयास (attempt) के खिलाफ ही मिलता है:

  1. चोरी (Theft)
  2. लूट (Robbery)
  3. रिष्टि / नुकसान (Mischief)
  4. आपराधिक अतिचार (Criminal Trespass) यदि संपत्ति का अपराध इन चार के अलावा कोई और है (जैसे धोखाधड़ी या गबन), तो वहाँ निजी प्रतिरक्षा का अधिकार सीधे तौर पर इस खंड के तहत लागू नहीं होता।

Practical Examples (दृष्टांत) से समझें:

  • शरीर की रक्षा (Body): मान लीजिए आप सड़क से गुज़र रहे हैं और देखते हैं कि कुछ गुंडे एक अनजान व्यक्ति (stranger) को पीट रहे हैं। आप आगे बढ़कर उन गुंडों पर बल प्रयोग करके उस व्यक्ति को बचा लेते हैं। धारा 35(a) आपको पूरी तरह से मुकदमों से सुरक्षित करती है क्योंकि आप "किसी अन्य व्यक्ति के शरीर" की रक्षा कर रहे थे।
  • संपत्ति की रक्षा (Property): 'A' देखता है कि उसके पड़ोसी 'Z' के घर में रात के समय चोर घुस रहे हैं। 'A' अपने पड़ोसी की संपत्ति को चोरी (Theft) और अतिचार (Trespass) से बचाने के लिए चोरों पर बल प्रयोग करता है। 'A' ने कोई अपराध नहीं किया है, क्योंकि धारा 35(b) उसे 'अन्य व्यक्ति की संपत्ति' बचाने का भी पूरा अधिकार देती है।

कानूनी जुड़ाव (Legal Linkage): 

इस धारा को हमेशा BNS की धारा 37 (Acts against which there is no right of private defence) के साथ जोड़कर पढ़ना अनिवार्य है। धारा 35 आपको अधिकार देती है, लेकिन धारा 37 बताती है कि आप इस अधिकार के बहाने हमलावर से 'बदला' नहीं ले सकते या अपनी रक्षा के लिए 'ज़रूरत से ज़्यादा बल' (more harm than necessary) का प्रयोग नहीं कर सकते।

Court Insight 

 सुप्रीम कोर्ट ने Kashiram vs. State of M.P. और अन्य मुकदमों में बहुत स्पष्ट रूप से कहा है कि "एक नागरिक को समाज में पुलिस की तरह काम करने की ज़रूरत नहीं है, लेकिन जब किसी असहाय व्यक्ति पर हमला हो रहा हो, तो कानून उसे मूकदर्शक (mute spectator) बने रहने को नहीं कहता।" धारा 35 (पुरानी IPC की धारा 97) एक सभ्य समाज में 'भाइचारे' और 'नागरिक कर्तव्य' (civic duty) को कानूनी मान्यता देती है। आप अपनी तैयारी के लिए इस जजमेंट को स्वतंत्र रूप से verify कर सकते हैं।

Section 35 empowers you not just to be your own bodyguard, but also a protector for anyone in distress, provided you stay within the limits of the law! Keep your concepts crystal clear and keep revising.


Tags

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

Top Post Ad

Below Post Ad

Ads Area