भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023: धारा 20 और 21 (शिशु का कार्य - Doli Incapax & Doli Capax)
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आज हम भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के अध्याय III (General Exceptions) की दो अत्यंत महत्वपूर्ण और दिलचस्प धाराओं—धारा 20 (Section 20) और धारा 21 (Section 21) का गहराई से विश्लेषण (detailed analysis) करेंगे।
आपराधिक न्यायशास्त्र (Criminal Jurisprudence) में बच्चों के आपराधिक दायित्व (Criminal Liability of Children) को निर्धारित करने के लिए ये धाराएं दो प्रसिद्ध लैटिन सूत्रों—'Doli Incapax' (अपराध करने में अक्षम) और 'Doli Capax' (अपराध करने में सक्षम)—पर आधारित हैं। एक बच्चे का मस्तिष्क पूरी तरह से विकसित नहीं होता है, इसलिए कानून मानता है कि उनमें 'आपराधिक आशय' (Mens Rea) बनाने की क्षमता नहीं होती।
आइए इन दोनों धाराओं को क्रमानुसार (serially) और क्लॉज़-वाइज़ डिकोड करते हैं:
धारा 20: सात वर्ष से कम आयु के शिशु का कार्य (Absolute Immunity - Doli Incapax)
- मूल कानूनी प्रावधान: BNS 2023 की धारा 20 बहुत ही स्पष्ट शब्दों में कहती है कि कोई भी बात 'अपराध' (Offence) नहीं है, जो सात वर्ष से कम आयु (under seven years of age) के शिशु द्वारा की जाती है,।
- कानूनी प्रभाव (Legal Effect): यह धारा 7 साल से कम उम्र के बच्चों को 'पूर्ण उन्मुक्ति' (Absolute Immunity) प्रदान करती है। कानून की नजर में यह एक अकाट्य अनुमान (Conclusive Proof) है कि 7 साल से छोटा बच्चा कोई अपराध कर ही नहीं सकता, चाहे उसका कृत्य कितना भी गंभीर क्यों न हो।
- अन्य धाराओं से कानूनी जुड़ाव (Linkage with Section 3): इसे BNS की धारा 3 (साधारण स्पष्टीकरण) के साथ जोड़कर पढ़ना बहुत जरूरी है। धारा 3 का दृष्टांत (a) स्पष्ट करता है कि यद्यपि संहिता में अपराधों की परिभाषाओं में बार-बार यह नहीं लिखा गया है कि 7 वर्ष से कम उम्र का बच्चा अपराध नहीं कर सकता, लेकिन उन सभी परिभाषाओं को इस 'साधारण अपवाद' के अधीन ही समझा जाना चाहिए,।
धारा 21: सात से बारह वर्ष के अपरिपक्व समझ वाले शिशु का कार्य (Qualified Immunity)
- मूल कानूनी प्रावधान: धारा 21 के अनुसार, कोई भी बात अपराध नहीं है जो सात वर्ष से ऊपर और बारह वर्ष से कम आयु (above seven and under twelve years of age) के ऐसे शिशु द्वारा की जाती है, जिसकी समझ अभी इतनी परिपक्व (sufficient maturity of understanding) नहीं हुई है कि वह उस अवसर पर अपने आचरण की प्रकृति और परिणामों (nature and consequences of his conduct) को सही से आंक सके।
- तकनीकी विश्लेषण (Technical Analysis): 7 से 12 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए उन्मुक्ति (immunity) 'पूर्ण' नहीं है, बल्कि 'शर्तों पर आधारित' (Qualified) है। यदि अदालत को लगता है कि बच्चा इतना समझदार था कि वह अपने किए गए काम का परिणाम जानता था (Doli Capax), तो उसे धारा 21 का बचाव नहीं मिलेगा। बचाव केवल 'अपरिपक्व समझ' (immature understanding) वाले बच्चों को ही मिलता है।
Practical Examples (दृष्टांत) से समझें:
- उदाहरण 1 (धारा 20 के तहत): एक 6 वर्षीय बच्चा खेलते समय अपने पिता की पिस्तौल उठा लेता है और गलती से गोली चलने पर किसी की मौत हो जाती है। यहाँ बच्चा पूर्ण रूप से निर्दोष है, क्योंकि उसकी आयु 7 वर्ष से कम है,।
- उदाहरण 2 (धारा 21 के तहत): एक 10 वर्षीय बच्चा 'A' एक दुकान से घड़ी उठा लेता है। यदि वह घड़ी को अपने खिलौनों के बीच रख देता है, यह बिना समझे कि चोरी क्या होती है, तो उसे 'अपरिपक्व समझ' (immature understanding) का मानते हुए धारा 21 का बचाव मिलेगा।
- उदाहरण 3 (धारा 21 का अपवाद): लेकिन, यदि वही 10 वर्षीय बच्चा 'A' घड़ी चुराने के बाद उसे छिपा देता है या उसे बेचकर पैसे लेने की कोशिश करता है, तो उसका यह आचरण (conduct) दर्शाता है कि उसमें 'परिपक्व समझ' (sufficient maturity) आ गई है। ऐसे में उसे धारा 21 का बचाव नहीं मिलेगा।
Court Insight & Legal Linkage:
आपको पता होना चाहिए कि भले ही 7 से 12 वर्ष का बच्चा 'परिपक्व समझ' वाला साबित हो जाए, या बच्चा 12 से 18 वर्ष का हो, उसे भारत में सामान्य अपराधियों की तरह जेल नहीं भेजा जाता। इसके लिए 'किशोर न्याय अधिनियम' (Juvenile Justice Act, 2015) लागू होता है और मामला Juvenile Justice Board (JJB) के सामने जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने 'Kakoo vs State of Himachal Pradesh' केस में स्पष्ट किया था कि धारा 21 (पुरानी IPC धारा 83) के तहत परिपक्वता साबित करने का पूरा भार (Burden of Proof) अभियोजन पक्ष यानी पुलिस पर होता है। आप अपनी तैयारी के लिए इसे स्वतंत्र रूप से verify कर सकते हैं।
Sections 20 and 21 beautifully balance criminal justice with child psychology! Keep these concepts of 'Doli Incapax' crystal clear and keep revising.
