भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 में ‘सामुदायिक सेवा’ (Community Service) एक बहुत ही प्रगतिशील (progressive) और ऐतिहासिक कदम है। आपराधिक न्याय प्रशासन (Criminal Justice Administration) में यह दंडात्मक न्याय (Retributive Justice) से सुधारात्मक न्याय (Reformative Justice) की ओर एक बड़ा बदलाव है।
संहिता के ‘उद्देश्यों और कारणों के विवरण’ (Statement of Objects and Reasons) में यह स्पष्ट किया गया है कि छोटे-मोटे अपराधों (petty offences) के लिए पहली बार ‘सामुदायिक सेवा’ को एक वैध दंड के रूप में पेश किया गया है।
आइए इसे क्रमानुसार (serially) और क्लॉज़-वाइज़ (clause-wise) विस्तार से समझते हैं:
1. सामुदायिक सेवा का मुख्य प्रावधान (The Main Provision):
BNS की धारा 4 न्यायालय द्वारा दी जा सकने वाली सजाओं को परिभाषित करती है। इस धारा के खंड (f) के तहत, 6 मुख्य प्रकार की सजाओं में ‘सामुदायिक सेवा’ को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है। इसका सरल अर्थ यह है कि जज साहब अपराधी को जेल भेजने या उस पर आर्थिक जुर्माना लगाने के बजाय, उसे समाज की भलाई का कोई कार्य (जैसे किसी सार्वजनिक पार्क की सफाई करना, अनाथालय में काम करना या पेड़ लगाना) करने का आदेश दे सकते हैं।
नई प्रक्रिया संहिता BNSS – Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 की धारा 23 मजिस्ट्रेट को यह शक्ति देती है कि वह तय करे कि अपराधी को किस प्रकार की सामुदायिक सेवा करनी होगी।)
2. सामुदायिक सेवा में डिफ़ॉल्ट का नियम (Rule of Default in Community Service):
एक Expert Lawyer के तौर पर आपको यह जानना चाहिए कि यदि कोई अपराधी न्यायालय द्वारा आदेशित यह सेवा करने से इनकार कर दे, तो कानून क्या करेगा। BNS की धारा 8(4) और 8(5) इसका समाधान देती हैं। इन प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति सामुदायिक सेवा के भुगतान में विफल (default) रहता है, तो न्यायालय उस विफलता के लिए उसे ‘सादा कारावास’ (simple imprisonment) की सजा सुना सकता है। यह डिफ़ॉल्ट जेल की सजा उस अपराध के जुर्माने की राशि के आधार पर अधिकतम 2 महीने, 4 महीने या 1 वर्ष तक हो सकती है।
3. किन अपराधों में मिलती है सामुदायिक सेवा? (Applicable Offences):
पूरी संहिता में केवल 6 विशिष्ट धाराएं ऐसी हैं जहाँ स्पष्ट रूप से ‘सामुदायिक सेवा’ को एक विकल्प या अनिवार्य सजा के रूप में रखा गया है।
- धारा 202 (लोक सेवक द्वारा अवैध व्यापार): यदि कोई लोक सेवक (Public Servant), जो कानूनी रूप से व्यापार न करने के लिए बाध्य है, अवैध रूप से व्यापार करता है, तो उसे 1 वर्ष तक का सादा कारावास, जुर्माना, या ‘सामुदायिक सेवा’ दी जा सकती है।
- धारा 209 (उद्घोषणा पर हाजिर न होना): BNSS की धारा 84 के तहत जारी उद्घोषणा (proclamation) के बाद तय स्थान और समय पर पेश न होने वाले व्यक्ति को जेल, जुर्माना, या ‘सामुदायिक सेवा’ की सजा मिल सकती है।
- धारा 226 (आत्महत्या का प्रयास): यदि कोई व्यक्ति किसी लोक सेवक को उसका कानूनी कर्तव्य निभाने से रोकने या मजबूर करने के इरादे से आत्महत्या का प्रयास (Attempt to commit suicide) करता है, तो उसे 1 वर्ष तक की सादी जेल, जुर्माना, या ‘सामुदायिक सेवा’ से दंडित किया जाएगा।
- धारा 303(2) का परंतुक (छोटी चोरी): यह सबसे महत्वपूर्ण नियम है! यदि चोरी की गई संपत्ति का मूल्य 5000 रुपये से कम है, और अपराधी पहली बार यह अपराध कर रहा है, तो संपत्ति वापस लौटा देने पर उसे अनिवार्य रूप से ‘सामुदायिक सेवा’ की सजा दी जाएगी।
- धारा 355 (नशे में सार्वजनिक दुराचार): नशे की हालत (intoxication) में किसी सार्वजनिक स्थान पर जाकर ऐसा बर्ताव करना जिससे लोगों को परेशानी हो, इस अपराध के लिए 24 घंटे तक की सादी जेल, 1000 रुपये जुर्माना, या ‘सामुदायिक सेवा’ तय की गई है।
- धारा 356(2) (मानहानि): किसी अन्य व्यक्ति को बदनाम (defame) करने के अपराध में न्यायालय 2 वर्ष तक का सादा कारावास, जुर्माना, या फिर ‘सामुदायिक सेवा’ की सजा दे सकता है।
Short Trick for Memory – “S-T-A-M-P-D”:
Judicial Exams के लिए इन 6 अपराधों को याद रखने हेतु मेरी इस आसान ट्रिक का इस्तेमाल करें:
- S = Suicide attempt to compel public servant (धारा 226)
- T = Theft under ₹5000 by first timer (धारा 303)
- A = Absconding / Non-appearance (धारा 209)
- M = Misconduct in public by drunk person (धारा 355)
- P = Public servant trading unlawfully (धारा 202)
- D = Defamation (धारा 356)