भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 76 महिलाओं की गरिमा और सम्मान की रक्षा के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण और सख्त कानूनी प्रावधान है। यह धारा विशेष रूप से "महिला को निर्वस्त्र करने के इरादे से उस पर हमला करने या आपराधिक बल का प्रयोग करने" (Assault or use of criminal force to woman with intent to disrobe) के अपराध और उसकी सजा को स्पष्ट करती है।
धारा 76 के मुख्य प्रावधान:
- अपराध की प्रकृति: इस धारा के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति किसी महिला पर हमला (assault) करता है या उसके खिलाफ आपराधिक बल (criminal force) का इस्तेमाल करता है, और उसका इरादा उस महिला के कपड़े उतारना (disrobe) या उसे नग्न (naked) होने के लिए मजबूर करना होता है, तो वह इस धारा के तहत अपराध का दोषी माना जाएगा।
- उकसाने (Abetment) पर भी सजा: यदि कोई व्यक्ति स्वयं ऐसा नहीं करता है, लेकिन इस तरह के कृत्य (महिला को निर्वस्त्र करने) के लिए किसी और को उकसाता है या सहायता (abets) करता है, तो उसे भी इस धारा के तहत समान रूप से दोषी माना जाएगा।
सजा का प्रावधान: इस गंभीर और अपमानजनक अपराध के लिए कानून में बहुत ही कड़ी सजा निर्धारित की गई है:
- न्यूनतम सजा: दोषी पाए जाने पर व्यक्ति को कम से कम 3 वर्ष के कारावास की सजा दी ही जाएगी।
- अधिकतम सजा: अपराध की गंभीरता को देखते हुए इस सजा को अधिकतम 7 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है।
- कारावास की प्रकृति: अदालत द्वारा दिया जाने वाला यह कारावास साधारण या कठोर (imprisonment of either description) किसी भी प्रकार का हो सकता है।
- जुर्माना: कारावास के साथ-साथ, अपराधी पर अनिवार्य रूप से जुर्माना (fine) भी लगाया जाएगा।
संक्षेप में, यह धारा (जिसका जिक्र हमने अपनी पहली बातचीत में भी किया था) महिलाओं के खिलाफ होने वाले उस विशिष्ट शारीरिक हमले को लक्षित करती है जिसका उद्देश्य उन्हें सार्वजनिक या निजी तौर पर निर्वस्त्र करके उनकी गरिमा को गंभीर ठेस पहुंचाना होता है।
