भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 71 विशेष रूप से जघन्य यौन अपराधों की पुनरावृत्ति करने वाले "आदतन अपराधियों के लिए सजा" (Punishment for repeat offenders) का अत्यंत सख्त प्रावधान करती है।
यह धारा सुनिश्चित करती है कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ गंभीर यौन अपराध करने वाले जो अपराधी एक बार सजा पाने के बाद दोबारा ऐसे अपराध करते हैं, उन्हें कोई रियायत न मिले।
धारा 71 के मुख्य प्रावधान: इस धारा के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को पहले भी निम्नलिखित में से किसी विशिष्ट धारा के तहत अपराध के लिए दोषी ठहराया जा चुका है, और वह व्यक्ति दोबारा इनमें से किसी भी धारा के तहत अपराध करता है (और दोषी ठहराया जाता है), तो उस पर धारा 71 लागू होगी:
- धारा 64: बलात्कार (Rape)
- धारा 65: 16 वर्ष या 12 वर्ष से कम उम्र की नाबालिगों से बलात्कार
- धारा 66: बलात्कार के दौरान हमला जिससे पीड़िता की मृत्यु हो जाए या वह 'परसिस्टेंट वेजिटेटिव स्टेट' (लगातार अचेत अवस्था) में चली जाए
- धारा 70: सामूहिक बलात्कार (Gang rape)
सजा का प्रावधान (Punishment): ऐसे आदतन (repeat) अपराधी के लिए कानून में केवल दो ही प्रकार की कठोर सजाएँ निर्धारित की गई हैं:
- आजीवन कारावास: जिसे कानून में बहुत स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है कि इस कारावास का अर्थ अपराधी के "शेष प्राकृतिक जीवन (remainder of natural life) तक की जेल" होगा। यानी अपराधी अपने जीवन की अंतिम सांस तक जेल में ही रहेगा।
- मृत्युदंड (Death Penalty): यदि न्यायालय उचित समझे तो ऐसे आदतन यौन अपराधी को मृत्युदंड की सजा भी दे सकता है।
संक्षेप में, यह प्रावधान समाज की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए महिलाओं और बच्चों के खिलाफ दोबारा जघन्य यौन अपराध करने वालों के प्रति 'जीरो-टॉलरेंस' नीति को लागू करता है।
