भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 68 "अधिकार संपन्न व्यक्ति द्वारा यौन संबंध (Sexual intercourse by a person in authority)" के अपराध और उसकी सजा से संबंधित है।
यह धारा विशेष रूप से उन मामलों को लक्षित करती है जहाँ कोई व्यक्ति अपने पद या प्रभाव का दुरुपयोग करके किसी महिला के साथ यौन संबंध बनाता है, और यह कृत्य कानूनी रूप से बलात्कार (Rape) की श्रेणी में नहीं आता है।
अपराध की परिस्थितियाँ: इस धारा के तहत किसी पुरुष को तब दोषी माना जाएगा, जब वह नीचे दी गई किसी स्थिति में हो और उस अधिकार या विश्वास के रिश्ते (fiduciary relationship) का दुरुपयोग करके अपनी कस्टडी (custody), प्रभार (charge) या अपने परिसर में मौजूद किसी महिला को यौन संबंध बनाने के लिए प्रेरित करता है या फुसलाता (induce or seduce) है:
- वह व्यक्ति अधिकार की स्थिति या विश्वास के रिश्ते में हो।
- वह एक लोक सेवक (Public servant) हो।
- वह किसी जेल, रिमांड होम, कानूनी हिरासत स्थल, या महिलाओं/बच्चों की संस्था का अधीक्षक (Superintendent) या प्रबंधक हो।
- वह किसी अस्पताल के प्रबंधन (management) का हिस्सा हो या वहां के स्टाफ में शामिल हो।
सजा का प्रावधान: इस अपराध के लिए दोषी पाए जाने पर व्यक्ति को कम से कम 5 वर्ष के कठोर कारावास (Rigorous Imprisonment) की सजा दी जाएगी। इस सजा की अवधि को 10 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, और अपराधी पर जुर्माना भी लगाया जाएगा।
कानून में दिए गए महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण:
- यौन संबंध: यहाँ "यौन संबंध" का बिल्कुल वही अर्थ है जो BNS की धारा 63 (बलात्कार की परिभाषा) के खंड (a) से (d) में वर्णित यौन कृत्यों में शामिल है।
- अधीक्षक (Superintendent): इसमें केवल पदनाम वाला अधीक्षक ही नहीं, बल्कि ऐसा कोई भी व्यक्ति शामिल है जो अपने पद के कारण जेल या संस्था में रहने वालों (inmates) पर किसी भी प्रकार का अधिकार या नियंत्रण (authority or control) रखता हो।
- अस्पताल और संस्था: इस धारा में अस्पताल और महिलाओं/बच्चों की संस्था का वही अर्थ माना जाएगा जो धारा 64(2) के तहत गंभीर बलात्कार के मामलों के स्पष्टीकरण में दिया गया है।
