भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023: धारा 57 (जनता द्वारा या दस से अधिक व्यक्तियों द्वारा अपराध किए जाने का दुष्प्रेरण - Abetting commission of offence by public or by more than ten persons)
आपराधिक न्यायशास्त्र (Criminal Jurisprudence) में यह धारा 'Mass Incitement' (सामूहिक उकसावे) से निपटती है। जब कोई व्यक्ति किसी एक-दो व्यक्तियों को नहीं, बल्कि पूरी 'जनता' (Public) या एक बड़े समूह को अपराध करने के लिए भड़काता है, तो कानून उसे बहुत सख्ती से लेता है और एक गंभीर अपराध मानता है।
आइए इस प्रावधान का क्लॉज़-वाइज़ (clause-wise) और तकनीकी विश्लेषण करते हैं:
1. मूल कानूनी प्रावधान (The Legal Provision): BNS 2023 की धारा 57 के अनुसार, जो कोई व्यक्ति 'साधारणतः जनता' (public generally) द्वारा, या 'दस से अधिक व्यक्तियों' (more than ten persons) की किसी संख्या या वर्ग द्वारा किसी अपराध के किए जाने का दुष्प्रेरण (abetment) करेगा, उसे किसी भी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि 7 वर्ष तक की हो सकेगी, और जुर्माने से दंडित किया जाएगा।
2. तकनीकी विश्लेषण (Technical Analysis):
- भीड़ को भड़काना (Inciting the Mob): यह धारा इस सिद्धांत पर आधारित है कि एक-दो व्यक्तियों को उकसाने की तुलना में भीड़ (Mob) को उकसाना समाज की शांति के लिए कहीं अधिक खतरनाक है। इसलिए, यदि उकसाए गए व्यक्तियों की संख्या 10 से अधिक है, तो मास्टरमाइंड पर यह विशेष और कठोर धारा लागू होती है।
- अपराध का होना ज़रूरी नहीं: जैसा कि दुष्प्रेरण के मूल सिद्धांतों में स्पष्ट है, दुष्प्रेरण का अपराध भड़काते ही पूरा हो जाता है। भले ही जनता या उन 10 से अधिक लोगों ने आपके उकसाने पर असल में कोई अपराध न किया हो, केवल 'भड़काने' के कृत्य के लिए आपको 7 साल तक की जेल हो सकती है।
3. दृष्टांत (Practical Illustration from BNS): कानून न्यायालय में इस धारा को लागू करने के लिए एक बहुत ही स्पष्ट दृष्टांत (Illustration) देता है:
- मान लीजिए 'A' एक सार्वजनिक स्थान पर एक पोस्टर या पर्चा (placard) लगाता है, जिसमें 10 से अधिक सदस्यों वाले एक 'संप्रदाय' (sect) को यह उकसाया गया है कि वे एक निश्चित समय और स्थान पर इकट्ठा होकर एक विरोधी संप्रदाय के सदस्यों पर हमला करें, जो अपना जुलूस निकाल रहे हैं।
- निष्कर्ष: यहाँ 'A' ने धारा 57 के तहत अपराध किया है, क्योंकि उसने 10 से अधिक लोगों को एक अपराध (हमला करने) के लिए भड़काया है।
4. कानूनी जुड़ाव (Legal Linkage): एक उत्कृष्ट विधि विशेषज्ञ के रूप में आपको इस धारा को BNS के अध्याय XI (सार्वजनिक शांति के खिलाफ अपराध - Of Offences Against The Public Tranquillity) के साथ जोड़कर पढ़ना चाहिए। विशेष रूप से इसे धारा 189 (गैरकानूनी जमावड़ा - Unlawful Assembly) और धारा 191 (दंगा - Rioting) के साथ पढ़ें। जब कोई व्यक्ति धारा 57 के तहत 10 से अधिक लोगों को उकसाता है, तो उसका सीधा और संभावित परिणाम अक्सर 5 या अधिक लोगों का गैरकानूनी जमावड़ा बनाना या दंगा भड़काना ही होता है।
Supreme Court Insight
सुप्रीम कोर्ट ने सामूहिक उकसावे (जैसे कि पुरानी IPC की धारा 117 जो अब हुबहू BNS की धारा 57 है) से जुड़े मामलों में स्पष्ट किया है कि 'जनता को उकसाना' (Public Incitement) केवल मौखिक भाषण देकर ही नहीं, बल्कि पर्चे बांटकर, अखबार में लेख लिखकर या सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट करके भी किया जा सकता है। न्यायालय का यह मानना है कि जब लक्षित दर्शक (Target Audience) एक अनिर्दिष्ट भीड़ (unspecified public) होती है, तो यह समाज के खिलाफ एक बड़ा अपराध है, क्योंकि भीड़ का मनोविज्ञान (mob psychology) उकसावे में आकर तर्कहीन और हिंसक हो जाता है।
