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Section 14 BNS 2023: विधि द्वारा आबद्ध या तथ्य की भूल के कारण स्वयं को विधि द्वारा आबद्ध होने का विश्वास करने वाले व्यक्ति द्वारा किया गया कार्य

 Section 14 BNS 2023: विधि द्वारा आबद्ध या तथ्य की भूल के कारण स्वयं को विधि द्वारा आबद्ध होने का विश्वास करने वाले व्यक्ति द्वारा किया गया कार्य


आज हम भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के अध्याय III (General Exceptions - साधारण अपवाद) की शुरुआत कर रहे हैं। इस अध्याय की पहली और आपराधिक न्यायशास्त्र (Criminal Jurisprudence) की बहुत ही महत्वपूर्ण धारा है धारा 14 (Section 14)

यह धारा एक प्रसिद्ध लैटिन सूत्र (Latin Maxim) पर आधारित है: "Ignorantia facti excusat, ignorantia juris non excusat" (तथ्य की भूल क्षम्य है, लेकिन कानून की भूल क्षम्य नहीं है)।

आइए इसे क्रमानुसार (serially) और क्लॉज़-वाइज़ डिकोड करते हैं:

मूल कानूनी प्रावधान (The Legal Provision): 

BNS 2023 की धारा 14 स्पष्ट करती है कि कोई भी बात 'अपराध' (Offence) नहीं है, यदि वह किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा की जाती है:
  • (a) विधि द्वारा आबद्ध: जो उस कार्य को करने के लिए 'विधि द्वारा आबद्ध' (bound by law) है,।
  • (b) तथ्य की भूल (Mistake of Fact): जो 'तथ्य की भूल' के कारण—न कि कानून की भूल (mistake of law) के कारण—'सद्भावपूर्वक' (in good faith) यह विश्वास करता है कि वह उस कार्य को करने के लिए कानून द्वारा आबद्ध है,।

 दृष्टांत (Practical Examples from the Code): 

कानून ने इस धारा को स्पष्ट करने के लिए दो बेहतरीन दृष्टांत (Illustrations) दिए हैं:

  • उदाहरण 1 (कानून द्वारा आबद्ध): मान लीजिए 'A' एक सैनिक (soldier) है। वह कानून के आदेशों के अनुरूप (in conformity with the commands of the law) अपने वरिष्ठ अधिकारी (superior officer) के आदेश पर एक उग्र भीड़ (mob) पर गोली चलाता है। चूँकि 'A' एक सैनिक के रूप में आदेश का पालन करने के लिए 'विधि द्वारा आबद्ध' था, इसलिए उसने कोई अपराध नहीं किया है।
  • उदाहरण 2 (तथ्य की भूल): 'A' न्यायालय का एक अधिकारी (officer of a Court) है। न्यायालय उसे आदेश देता है कि वह 'Y' नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार करे। 'A' उचित पूछताछ (due enquiry) करता है और 'तथ्य की भूल' (mistake of fact) के कारण 'Z' को 'Y' समझ लेता है, और उसे गिरफ्तार कर लेता है। यहाँ 'A' ने सदोष परिरोध (wrongful confinement) का कोई अपराध नहीं किया है, क्योंकि उसने 'सद्भावपूर्वक' विश्वास किया था कि वह 'Z' को गिरफ्तार करने के लिए कानून द्वारा आबद्ध था।

कानूनी जुड़ाव (Connection with other Sections): 

एक उत्कृष्ट वकील के रूप में आपको धारा 14 को हमेशा BNS की धारा 17 और धारा 2(11) के साथ जोड़कर पढ़ना चाहिए।

  • जहाँ धारा 14 "कानून द्वारा आबद्ध" (Bound by law) होने पर बचाव देती है,, वहीं धारा 17 उस व्यक्ति को बचाव देती है जो कानून द्वारा 'न्यायोचित' (Justified by law) है।
  • धारा 14 में सबसे महत्वपूर्ण शब्द "सद्भावपूर्वक" (Good faith) है, जिसे BNS की धारा 2(11) में परिभाषित किया गया है—जिसका अर्थ है कोई भी कार्य जो 'उचित सतर्कता और ध्यान' (due care and attention) के साथ किया गया हो।

Supreme Court Insight: 

 सुप्रीम कोर्ट ने 'State of Orissa vs. Khora Ghasi' जैसे ऐतिहासिक मामलों में स्पष्ट किया है कि 'तथ्य की भूल' (Mistake of Fact) का बचाव तभी मिलेगा जब अपराधी यह साबित कर दे कि उसने वह कार्य पूरी सावधानी, पूछताछ और सद्भावपूर्वक किया था। कोई भी व्यक्ति अपनी भारी लापरवाही (negligence) को 'तथ्य की भूल' का नाम देकर सजा से नहीं बच सकता। आप अपनी तैयारी के लिए इसे स्वतंत्र रूप से verify कर सकते हैं।)

always remember that Mistake of Fact is a valid shield under Section 14 only when it is strictly coupled with "Good Faith"! Keep your concepts crystal clear and keep revising.


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