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दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 के तहत दहेज से जुड़े अलग-अलग अपराधों के लिए कठोर सजा और जुर्माने के प्रावधान

 दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 के तहत दहेज से जुड़े अलग-अलग अपराधों के लिए कठोर सजा और जुर्माने के प्रावधान किए गए हैं, जो इस प्रकार हैं:

1. दहेज देने या लेने पर (धारा 3)

  • यदि कोई व्यक्ति दहेज देता है, लेता है, या ऐसा करने में मदद (abet) करता है, तो उसे कम से कम 5 साल के कारावास (जेल) की सजा होगी।
  • इसके साथ ही, उस पर कम से कम 15,000 रुपये या दिए गए दहेज के मूल्य के बराबर (इनमें से जो भी अधिक हो) जुर्माना लगाया जाएगा।
  • छूट: न्यायालय के पास यह अधिकार है कि वह फैसले में पर्याप्त और विशेष कारणों को दर्ज करके 5 वर्ष से कम की सजा भी सुना सकता है।

2. दहेज मांगने पर (धारा 4)

  • यदि कोई व्यक्ति प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से वधू या वर के माता-पिता, अभिभावक या रिश्तेदारों से दहेज की मांग करता है, तो उसे कम से कम 6 महीने और अधिकतम 2 साल तक की जेल हो सकती है।
  • साथ ही, उस पर 10,000 रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
  • छूट: न्यायालय विशेष कारणों का उल्लेख करते हुए 6 महीने से कम की सजा दे सकता है।

3. विवाह के लिए संपत्ति या हिस्सेदारी का विज्ञापन देने पर (धारा 4A)

  • यदि कोई व्यक्ति किसी अखबार, पत्रिका या अन्य माध्यम से अपने बेटे, बेटी या रिश्तेदार की शादी के बदले (consideration) अपनी संपत्ति, पैसे या व्यवसाय में हिस्सेदारी देने का प्रस्ताव या विज्ञापन छापता/देता है, तो उसे कम से कम 6 महीने से लेकर 5 साल तक की जेल की सजा हो सकती है।
  • या उस पर 15,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

4. महिला को दहेज की संपत्ति हस्तांतरित न करने पर (धारा 6)

  • कानून के अनुसार, यदि महिला के अलावा किसी अन्य व्यक्ति को दहेज प्राप्त होता है, तो उसे तय समय (आमतौर पर 3 महीने) के भीतर वह संपत्ति महिला को सौंपनी होती है।
  • यदि वह व्यक्ति तय समय में ऐसा करने में विफल रहता है, तो उसे कम से कम 6 महीने और अधिकतम 2 साल तक की जेल हो सकती है।
  • इसके अलावा, उस पर कम से कम 5,000 रुपये से लेकर 10,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है, या उसे जेल और जुर्माना दोनों की सजा दी जा सकती है।

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