संपत्ति का समपहरण किस प्रकार के अपराधों में होता है?

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आज हम भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के अंतर्गत ‘संपत्ति के समपहरण’ (Forfeiture of Property) के बेहद तकनीकी और गंभीर विषय का गहराई से विश्लेषण करेंगे।

जैसा कि हमने BNS की धारा 4 में ‘D-L-I-F-F-C’ ट्रिक के माध्यम से पढ़ा था, “संपत्ति का समपहरण” (Forfeiture of Property) न्यायालय द्वारा दी जाने वाली 6 वैध सजाओं में से एक है।

समपहरण (Forfeiture) का कानूनी अर्थ:

सरल शब्दों में, समपहरण का अर्थ है राज्य (State) द्वारा किसी अपराधी की संपत्ति (Property) को बिना कोई मुआवजा (compensation) दिए कानूनी रूप से जब्त कर लेना। यह एक ऐसा दंड है जो अपराधी को आर्थिक रूप से पंगु बना देता है।

BNS 2023 के तहत, हर छोटे-मोटे अपराध में संपत्ति जब्त नहीं की जाती। कानून ने बहुत ही विशिष्ट और गंभीर श्रेणियों के अपराधों (specific and severe categories of offences) के लिए ही इसका प्रावधान किया है। आइए इन्हें क्रमानुसार (serially) और Clause-wise डिकोड करते हैं:

1. भारत के मित्र राष्ट्रों में लूटपाट (Depredation on friendly foreign States) – धारा 154:

यह ‘राज्य के विरुद्ध अपराध’ (Offences Against the State) से संबंधित अध्याय VII की एक अत्यंत महत्वपूर्ण धारा है।

  • प्रावधान: यदि कोई व्यक्ति भारत सरकार के साथ शांति (peace) रखने वाले किसी विदेशी राज्य (foreign State) के क्षेत्रों में लूटपाट (depredation) करता है, या लूटपाट करने की तैयारी करता है, तो उसे 7 साल तक के कारावास और जुर्माने की सजा मिलेगी।
  • समपहरण का नियम: इस धारा के तहत विशेष रूप से यह आदेश दिया जाता है कि उस लूटपाट को करने में उपयोग की गई (used or intended to be used) या उस लूटपाट से अर्जित की गई (acquired) कोई भी संपत्ति जब्त (forfeited) कर ली जाएगी।
  • Practical Example: मान लीजिए ‘A’, भारत का निवासी है और वह एक ऐसे पड़ोसी देश में लूटपाट करने के लिए हथियारों से भरी एक जीप लेकर जाता है, जिसके साथ भारत के शांतिपूर्ण संबंध हैं। यहाँ न केवल ‘A’ द्वारा लूटा गया सोना (acquired property) जब्त किया जाएगा, बल्कि उसकी जीप और हथियार (property used) भी राज्य द्वारा समपहृत (forfeited) कर लिए जाएंगे।

2. मित्र राष्ट्रों से लूटी गई संपत्ति प्राप्त करना (Receiving property taken by war or depredation) – धारा 155:

  • प्रावधान: यदि कोई व्यक्ति यह जानते हुए किसी संपत्ति को प्राप्त करता है (receives) कि वह संपत्ति भारत सरकार के खिलाफ युद्ध (धारा 153) या किसी मित्र राष्ट्र में लूटपाट (धारा 154) करके लाई गई है, तो उसे 7 साल तक का कारावास और जुर्माना होगा।
  • समपहरण का नियम: इस अपराध में भी कानून स्पष्ट करता है कि इस तरह प्राप्त की गई “संपत्ति का समपहरण” (forfeiture of the property so received) किया जाएगा।

3. फर्जी स्टाम्प से जुड़े अपराध (Prohibition of Fictitious Stamps) – धारा 186:

  • प्रावधान: डाक महसूल (postage rate) को दर्शाने वाले सरकार के फर्जी स्टाम्प (fictitious stamps) बनाना, बेचना या अपने पास रखना अपराध है।
  • समपहरण का नियम: धारा 186(2) यह शक्ति देती है कि ऐसा कोई भी फर्जी स्टाम्प, या उसे बनाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली कोई भी ‘डाई’ (die), ‘प्लेट’ (plate), ‘उपकरण’ (instrument) या ‘सामग्री’ (materials) यदि पुलिस द्वारा जब्त (seized) की जाती है, तो उसे समपहृत (forfeited) कर लिया जाएगा।

अन्य धाराओं के साथ कानूनी जुड़ाव (Legal Connection with Other Sections): एक बेहतरीन वकील के रूप में आपको यह भी पता होना चाहिए कि यदि कोई अपराधी अपनी संपत्ति को ‘समपहरण’ (Forfeiture) से बचाने की कोशिश करता है, तो कानून उसे कैसे दंडित करता है:

  • धारा 243 और 244 (Fraudulent removal of property): यदि किसी न्यायालय ने सजा के तौर पर किसी संपत्ति को समपहृत (forfeit) करने का आदेश दिया है, और अपराधी उस संपत्ति को जब्त होने से बचाने के लिए धोखाधड़ी से उसे छिपाता है (conceals), हटाता है, या किसी और को ट्रांसफर कर देता है, तो यह कृत्य अपने आप में 3 साल तक की जेल वाला अपराध है।
  • धारा 255 और 256 (Public Servant Disobeying Law): यदि कोई लोक सेवक (Public servant) कानून के दिशा-निर्देशों का जानबूझकर उल्लंघन करता है या गलत रिकॉर्ड बनाता है ताकि किसी व्यक्ति की संपत्ति को समपहरण (forfeiture) से बचाया जा सके, तो ऐसे भ्रष्ट लोक सेवक को 2 से 3 साल तक की जेल हो सकती है।

Supreme Court Insight :

Although BNS defines forfeiture mainly for State offences and Stamp counterfeiting, in practical Indian Criminal Jurisprudence, ‘Forfeiture of Property’ has become a massive weapon under special laws. Supreme Court jurisprudence clearly establishes that under acts like UAPA (Unlawful Activities Prevention Act), NDPS (Narcotics Drugs Act), and PMLA (Prevention of Money Laundering Act), the “Proceeds of Crime” (अपराध से कमाई गई संपत्ति) और आतंकवाद या ड्रग्स व्यापार में लिप्त किसी भी संपत्ति का समपहरण बड़े पैमाने पर किया जाता है। अदालतें मानती हैं कि “Crime should not pay” (अपराध से किसी को आर्थिक लाभ नहीं होना चाहिए)।

So my dear students, always remember that under general criminal law (BNS), forfeiture is primarily used to strip offenders of assets connected to depredations against friendly nations or state infrastructure (like stamps), but combined with special laws, it acts as the strongest deterrent against organized financial and terror crimes!

Keep your concepts crystal clear and keep revising!

Chapter II Of BNS 2023 (Punishments) Explained

भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 5

Section 4 BNS 2023: Types of Punishments under the New Criminal Law

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