दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 की धारा 2 के तहत दहेज की कानूनी परिभाषा

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दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 की धारा 2 के तहत दहेज की कानूनी परिभाषा के केंद्र में “संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति” (property or valuable security) का लेन-देन है। इस परिभाषा के व्यापक संदर्भ को निम्नलिखित बिंदुओं से गहराई से समझा जा सकता है:

विवाह के संबंध में दी गई संपत्ति (Property in connection with marriage):

कानून के अनुसार, कोई भी संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति तभी दहेज मानी जाती है जब वह प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से “उक्त पक्षों के विवाह के संबंध में” (in connection with the marriage) दी गई हो या देने की सहमति दी गई हो। इसका अर्थ यह है कि संपत्ति का हस्तांतरण केवल एक सामान्य भेंट नहीं है, बल्कि वह विशेष रूप से विवाह के आयोजन, समझौते या उससे जुड़े किसी कारण से जुड़ी हुई है।

मूल्यवान प्रतिभूति (Valuable Security) का अर्थ:

अधिनियम की व्याख्या II यह स्पष्ट करती है कि “मूल्यवान प्रतिभूति” (valuable security) शब्द का बिल्कुल वही अर्थ है जो भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) 1860 की धारा 30 में परिभाषित किया गया है। यह स्पष्ट करता है कि दहेज केवल नकद धन या भौतिक वस्तुओं (गहने, वाहन आदि) तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कानूनी दस्तावेज़, बांड, शेयर, या संपत्ति के वे कागजात भी शामिल हैं जो किसी कानूनी अधिकार का निर्माण या हस्तांतरण करते हैं।

लेन-देन के पक्ष और समय का व्यापक दायरा:

दहेज की परिभाषा केवल वर-वधू तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका दायरा बहुत विस्तृत है:

  • यह संपत्ति विवाह के एक पक्ष द्वारा दूसरे पक्ष को दी जा सकती है।
  • यह माता-पिता या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा विवाह के किसी भी पक्ष को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से दी जा सकती है।
  • यह लेन-देन केवल विवाह के दिन तक सीमित नहीं है; यह विवाह से पहले, विवाह के समय, या विवाह के बाद किसी भी समय हो सकता है, बशर्ते इसका संबंध विवाह से हो।

परिभाषा से बाहर रखी गई संपत्तियां (Exceptions):

कानून स्पष्ट रूप से उन संपत्तियों और उपहारों को अलग करता है जो इस परिभाषा के तहत दहेज नहीं माने जाते:

  • मेहर (Mahr/Dower): जिन व्यक्तियों पर मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरियत) लागू होता है, उनके मामले में ‘मेहर’ को दहेज की परिभाषा में शामिल नहीं किया गया है।
  • बिना मांगे दिए गए उपहार (Presents without demand): वधू या वर को विवाह के समय दिए गए वे उपहार जो बिना किसी मांग के दिए गए हों, दहेज नहीं माने जाते। हालांकि, इसके लिए यह अनिवार्य शर्त है कि इन उपहारों को नियमों के तहत एक सूची में दर्ज किया जाए। इसके अतिरिक्त, वधू को दिए गए उपहार प्रथागत प्रकृति (customary nature) के होने चाहिए और उनका मूल्य उपहार देने वाले की वित्तीय स्थिति (financial status) के अनुसार अत्यधिक नहीं होना चाहिए।

संपत्ति पर महिला का कानूनी अधिकार:

दहेज की परिभाषा के संदर्भ में अधिनियम एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी स्थापित करता है कि यदि कोई संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति (जो दहेज है) महिला (वधू) के अलावा किसी अन्य व्यक्ति द्वारा प्राप्त की जाती है, तो उस व्यक्ति के लिए यह कानूनी रूप से अनिवार्य है कि वह उस संपत्ति को महिला को हस्तांतरित करे। जब तक यह संपत्ति महिला को सौंपी नहीं जाती, तब तक वह व्यक्ति इसे महिला के लाभ के लिए ट्रस्ट (trust) के रूप में अपने पास रखेगा।

संक्षेप में, परिभाषा में “विवाह के संबंध में दी गई संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति” केवल एक लेन-देन का विवरण नहीं है; यह दहेज की मांग, इसके हस्तांतरण के समय और उस संपत्ति पर महिला के एकाधिकार को भी स्पष्ट रूप से संरक्षित करती है।

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